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Written By: Editorial Team | Updated : April 10, 2018 12:42 PM IST
ज़रा सोचिए ऑफिस से लौटने के बाद दौड़कर आपका छोटा बच्चा आपसे लिपट जाता है, दुनिया के सबसे खूबसूरत एहसासों में से एक है यह। लेकिन बहुत से माता-पिता ऐसे भी हैं जिनका बच्चा उनके साथ इस तरह का व्यवहार नहीं करता। उनका बच्चा अपने माता-पिता की मौजूदगी और उनका प्यार नहीं समझ पाता और न ही बदले में वह अपने पैरेंट्स के साथ साधारण बच्चों जैसा व्यवहार कर पाता है। ऐसा नहीं है कि ये बच्चे असामाजिक, पर ये ऑटिज़्म (autism) से पीड़ित हैं। ऑटिज़्म बच्चों के विकास से जुड़ी हुई एक समस्या है जो हजार में से एक बच्चा महसूस करता है। उसे आम लोगों की तरह दूसरों से बातचीत करने और रिश्ते बनाने में परेशानी होती है।
ऑटिज़्म के उपचार के पारम्परिक तरीकों से वांछित परिणाम नहीं प्राप्त होते क्योंकि वहां ऑटिज़्म के लक्षणों के उपचार पर पर अधिक ध्यान दिया जाता है न कि बच्चे पर। इसीलिए दुनियाभर में लोग अब धीरे-धीरे वैकल्पिक दवाइयों की शक्तियों के प्रति जागरूक हो रहे है, खासकर जब बात ऑटिस्टिक स्पेक्ट्रम पर गड़बड़ियों के इलाज करने की आती है। ऐसा ही एक अनुशासित तरीका है होम्योपैथी, जिसने न केवल ऑटिज़्म के इलाज में शानदार परिणाम दिए हैं बल्कि ऑटिज़्म को उलटने का भी काम किया है।
10 अप्रैल का दिन, विश्व होम्योपैथी दिवस (World Homeopathy Day) के तौर पर मनाया जाता है। हमने मशहूर होम्योपैथ डॉ. श्रीपाद खेडेकर (इम्पीरियल क्लिनिक) से बात की, और जाना कि वे ऑटिज़्म के बारे में। साथ ही किस तरह होम्योपैथी बच्चे के डीएनए को उत्तेजित कर ऑटिज़्म में सुधार करता है और बच्चे को ऑटिज़्म के साथ जीना सिखाने की बजाय उसके पूर्ण इलाज में मदद करता है। डॉ. खेडेकर बाल चिकित्सा विकास विकार प्रबंधन के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण स्थान पर हैं और उन्होंने प्राधिकरण हैं और उन्होंने सात साल के एक अंतरराष्ट्रीय अध्ययन की शुरूआत की है जिसमें बच्चों से जुड़े मुद्दों जैसे देरी से विकास, ऑटिज़्म, टूबेरौस स्क्लेरोसिस (tuberous sclerosis), डिस्पैक्सिया (dyspraxia), बॉर्डरलाइन अटेंशन डेफिसिट हाइपरएक्टिविटी डिसॉर्डर (borderline Attention Deficit Hyperactivity Disorder -ADHD) और सेरेब्रल पाल्सी (cerebral palsy) पर अध्ययन किया जाता है।
पारंपरिक उपचार के तरीकों में क्या कमी है?
डॉ. खेडेकर के अनुसार “ऑटिज़्म में, मानसिक गतिविधियों के बीच समन्वय बिल्कुल नहीं बैठता है। उपचार के पारम्परिक तरीकों में ऑटिज़्म सर्वोत्तम इलाज नहीं किया जा सकता, साथ ही यह काफी दमनकारी है। बच्चे की सक्रियता को दबाने के लिए दवाएं दी जाती है, या फिर वे ऑटिज़्म के दूसरे प्रभावों और परेशानियों पर ध्यान केंद्रित करते हैं। ऑटिज़्म के प्रबंधन की बजाय उसके इलाज की कोशिश करनी चाहिए जिसके सही तरीकों का पता बच्चे के डीएनए की जांच से मिल सकता है। डॉ. खेडेकर के अनुसार, “ सुधार कार्य बच्चे के डीएनए के स्तर पर किया जाना चाहिए। तभी बच्चे को ऑटिज़्म से निकालना सम्भव होगा। मैं इसे अनुवांशिक या जेनेटिक रिपेयर प्रोसेस मानता हूं। होम्योपैथी की सहायता से, हम बच्चे के रिपेयर मकैनिज़्म को उत्तेजित करते हैं।” इस ट्रीटमेंट का फो होम्योपैथी के माध्यम से उपचार और प्रबंधन का फोकस बच्चे के विकास से संबंधी इस गड़बड़ी के अनजाने लक्षणों का इलाज करना नहीं है। बल्कि, बच्चे के पूर्ण इलाज और इलाज के समय से बच्चे के व्यक्तित्व को विकसित करने में मदद करना है।
होम्योपैथी के अनुसार ऑटिज़्म के कारण क्या हैं?
डॉ. खेडेकर ने बताया कि ऑटिज़्म के सटीक कारणों की पहचान करना मुश्किल है। लेकिन अपने अनुभव में, उन्हें कई कारकों का पता चला जो ऑटिज़्म के मरीज़ों में आम थे।
• प्रेगनेंसी में तनाव- डॉ. खेडेकर का कहना है, “50% मामलों में प्रेगनेंसी के दौरान होनेवाले तनाव को अच्छी चीज़ माना गया है। गर्भावस्था में मां की मानसिक सेहत का असर बच्चे के विकास पर होता है। डॉ. खेडेकर ने बताया, “ज़्यादातर मामलों में, महिलाओं को अपने पति या ससुरालवालों के कारण प्रेगनेंसी के दौरान बहुत अधिक तनाव महसूस हो रहा था।”
• वैक्सीन में पारावाले यौगिक- डॉ. खेडेकर ने कहा "कुछ नये वैक्सिन या टीके ऑटिज़्म को बढ़ाने का काम कर सकते हैं क्योंकि इनमें पारा या मर्क्यूरी (Mercury) वाले यौगिक होते हैं।" डॉक्टर ने बताया कि, "हालांकि कोई स्टडी इसकी पुष्टि नहीं करती, लेकिन यह बात मुझे मेरे अनुभव के आधार पर समझ आयी है।"
बच्चों में ऑटिज़्म के संकेत क्या हैं?
डॉ. श्रीपाद खेडेकर बताते हैं, कि इस समस्या के शुरुआती लक्षण दो साल की उम्र से ही दिखायी पड़ने लगते हैं। इस विकार के प्रमुख लक्षण ये हैं।
• बच्चा किसी से आंख नहीं मिलाता।
• अपने माता-पिता से दूर ले जाने पर बच्चे में कोई बेचैनी नहीं दिखना।
• माता-पिता या परिवार के अन्य लोगों से कोई भावनात्मक जुड़ाव नहीं।
• अकेले रहना और अकेले खेलना।
• किसी से दोस्ती नहीं करना।
• बातचीत में परेशानी, अटकना, बात पूरी न कर पाना।
• एक ही काम बार-बार करना। जैसे- चिकोटी काटना, सिर घुमाना या अपने प्रायवेट पार्ट्स को बार-बार छूते रहना।
• खिलौने और निर्जिव चीज़ों से अत्यधिक लगाव।
हालांकि ये लक्षण केवल दो वर्षों के बाद दिखायी पड़ते हैं, लेकिन बच्चे को वास्तविक नुकसान बच्चा गर्भ में होता है। डॉ. खेडेकर के अनुसार, "जब मां तनाव से गुज़रती है, तब बच्चे (गर्भाशय में होने पर भी), अपनी बुद्धि का उपयोग अपनी मां के गर्भ में प्रतिकूल परिस्थितियों के प्रभाव को दूर करने के लिए करता है"। यह तब होता है जब ऑटिज़्म का विकार विकसित होने लगता है।
होम्योपैथी ऑटिज़्म का इलाज कैसे करता है?
• गुड बिहेवियर थेरेपी– बच्चे को एक चिकित्सक की देखभाल में रखना होगा जो बच्चे के व्यवहार को बदलने में मदद कर सकते हैं। यह बच्चे में एक सकारात्मक बदलाव लाएगा, जिसे बुनियादी कौशल सीखने, सुनने, पढ़ने, बातचीत करने और नकल करने आदि में मदद होगी।
• अच्छी डायट – ऑटिज़्म से पीड़ित बच्चों के साथ डॉ. खेडेकर के अनुभव में, उन्होंने पाया कि ज्यादातर बच्चों को आमतौर पर दूध में पाए जानेवाले प्रोटीन के प्रकार किसीन (casein) और ग्लूटेन से संवेदनशीलता होती है। डॉ. खेडेकर ने समझाया कि, "प्रोटीन और ग्लूटे-फ्री आहार बच्चों को ऑटिज़्म से लड़ने में मदद करता है।"
• अच्छी होम्योपैथिक थेरेपी- अंत में, ऑटिज़्म से पीड़ित बच्चे का इलाज करने का अंतिम चरण है सही होम्योपैथिक उपाय तैयार करना। इसके लिए, स्थितियों को समझते हुए नुस्खे तैयार किए जाने चाहिए। बच्चे की स्थिति को पूरी तरह से समझना होगा न कि केवल कुछ समस्याओं के आधार पर। इसका मतलब है कि ऑटिज़्म के इलाज के लिए बच्चे के मन और शरीर को समझना महत्वपूर्ण है।
होम्योपैथी काम कैसे करता है?
एक समानता लाने या इलाज करने के लिए, एक होम्योपैथ को बच्चे के व्यवहार और प्राथमिकताओं का ध्यानपूर्वक और तीव्रता से निरीक्षण करना होगा। “डॉक्टर बच्चे के व्यवहार का एक नोट बनाते हैं, जिसमें उसके चीखने, चिल्लाने, रेंगने या बार-बार एक ही काम करने जैसी हरकतें होती हैं। वह यह भी देखता है कि बच्चा कम या ज़्यादा तापमान, मीठा या खट्टी चीज़े खाने पर कैसी प्रतिक्रिया देता है।” डॉक्टर ने बताया, जिनके अनुसार बच्चे की आनुवंशिक बनावट के बारे में होम्योपैथ को समझने में मदद करता है, जो इस जानकारी के आधार पर सही होम्योपैथिक इलाज तय कर पाते हैं। इस नुस्खे का पालन किए जाने के बाद आनुवंशिक उत्क्रमण उलट जाता है और बच्चा ठीक हो जाता है।
आगे की राह
अगर आपको थोड़ा भी शक हो तो आपको बता दें कि डॉ. श्रीपाद खेडेकर की देखरेख में होम्योपैथी की मदद से ऑटिस्टिक बच्चों का इलाज किया गया जिन्होंने 7 सालों तक इस विषय पर स्टडी भी की। पूर्व और बाद के उपचार के अवलोकन में पाया गया कि 80 प्रतिशत बच्चे शारीरिक और मानसिक रूप से संतुलित जीवन जी रहे हैं! यहां तक कि जब पारम्परिक चिकित्सा पद्धतियों की बात उठी तो साबित कर दिया गया कि ऑटिज़्म जैसे कठिन प्रतीत होनेवाले जटिल विकारों का इलाज होम्योपैथी जैसे सरल और समग्र तरीकों से भी किया जा सकता है।
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डॉ. श्रीपाद खेडेकर ने विश्व प्रसिद्ध टेनिस स्टार नोवाक जोकोविच का अस्थमा का इलाज किया है। साथ ही उन्होंने यूरोपीयन प्रीमियर लीग खेलनेवाले कई यूरोपीय स्टार फुटबॉलर्स का भी इलाज किया है। यूरोप में प्रैक्टिस करनेवाले डॉ. श्रीपाद खेडेकर रिसर्च में विश्वास रखते हैं। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मेडिकल जर्नल्स के लिए सैकड़ों स्टडीज़ भी की हैं। वह एक चिकित्सक, शिक्षक, शोधकर्ता और लेखक हैं। उन्होंने होमियोपैथी पर चार पुस्तकें लिखी हैं। डॉ. श्रीपाद खेडेकर से उनके दादर (मुंबई) और बेलग्रेड (सर्बिया) के क्लिनिक्स में मिला जा सकता है और वे शुश्रुषा हॉस्पिटल मुंबई से भी जुड़े हुए हैं।
अधिक जानकारी प्राप्त करने के लिए उनकी वेबसाइट- www.imperialclinics.com पर देखें।
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अनुवादक-Sadhana Tiwari
चित्र स्रोत- Shutterstock.