
साधना तिवारी
साधना तिवारी 15 वर्षों से मीडिया क्षेत्र में हैं। लगभग 9 वर्षों से अधिक समय से ZEE ग्रुप के साथ जुड़ी हुई ... Read More
Written By: Sadhna Tiwari | Updated : April 10, 2025 2:11 AM IST
World Homeopathy Day 2025: आज के दौर में जब हेल्थकेयर सेक्टर में एडवांस टेक्नोलॉजी और बेहतरीन दवाइओं जैसे ऑप्शन्स उपलब्ध हैं। वहीं, इन सबके बीच भी बहुत से लोग होम्योपैथी और अन्य नेचुरल ट्रीटमेंट मेथड्स में भी विश्वास रखते हैं। विशेषकर होम्योपैथी की मदद से जहां कई लोग अपनी बीमारियों का इलाज करा रहे हैं वहीं, कई स्टडीज में भी इसे असरदार और प्रासंगिक पाया गया है। भारत में ही होम्योपैथी की मौजूदगी की बात की जाए तो केंद्रीय होम्योपैथी अनुसंधान परिषद (CCRH) में 27 शोध संस्थानों और 6 क्लिनिकल सेंटर के माध्यम से 355 से अधिक शोध परियोजनाओं पर काम कर रहे हैं। इनमें से 129 ऐसे क्लीनिकल ट्रायल्स हैं जो किसी भी आधुनिक चिकित्सा प्रणाली की कसौटी पर खरे उतरते हैं। हम होम्योपैथी को सिर्फ "वैकल्पिक" नहीं, बल्कि एक वैज्ञानिक, विश्वसनीय और मानवीय चिकित्सा पद्धति के रूप में स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
केंद्रीय होम्योपैथी अनुसंधान परिषद (CCRH) के महानिदेशक, डॉ. सुभाष कौशिक ( Dr. Subash Kaushik, Director General, Central Council for Research in Homoeopathy , Ministry of AYUSH)होम्योपैथी के बारे में बात करते हुए कहा, जब मैं होम्योपैथी के बारे में सोचता हूँ, तो यह केवल एक चिकित्सा पद्धति नहीं लगती — बल्कि हमारी जीवनशैली का एक हिस्सा ही लगती है। अपने इस लंबे सफर में मैंने होम्योपैथी को न सिर्फ विज्ञान की दृष्टि से जाना जाता है, बल्कि लोगों के जीवन में इसके असर को महसूस भी किया है। एक मां के चेहरे की मुस्कान, जब उसका बच्चा बिना साइड इफेक्ट्स के ठीक होता है, एक बुज़ुर्ग की आंखों में संतोष, जब उन्हें राहत मिलती है — यही असली प्रमाण है होम्योपैथी के सौम्य इलाज का।
कोविड-19 के दौरान, जब पूरी दुनिया डर से गुजर रही थी, उस समय आयुष मंत्रालय द्वारा सुझाई गई Arsenicum album 30C जैसी होम्योपैथिक दवाओं ने लोगों में आशा की किरण जगाई। CCRH ने न सिर्फ महामारी संबंधी सलाह दी, बल्कि डेंगू, हीट स्ट्रोक और अन्य स्वास्थ्य संकटों पर भी अपना योगदान दिया। मुझे आज भी याद है कि कैसे सीमित संसाधनों के बावजूद, हमारे चिकित्सकों ने घर-घर जाकर लोगों को निःशुल्क दवाएं दीं और उन्हें भरोसा दिलाया कि यह मुश्किल समय भी जल्द ही गुज़र जाएगा। बस संभव एवं सावधानी बनाये रखे|
डॉ. कौशिक कहते हैं कि, आज जब हम विश्व होम्योपैथी दिवस 2025 मना रहे हैं, तो यह केवल एक तारीख नहीं — बल्कि एक संकल्प है। इस बार का आयोजन इसलिए विशेष है क्योंकि इसमें हम शोधकर्ताओं, चिकित्सकों, छात्रों और उद्योग क्षेत्र के प्रतिनिधियों को एक मंच पर लाकर, मिलकर सोचने और आगे बढ़ने का अवसर दे रहे हैं। प्रदर्शनी, विचार-मंथन सत्र, और अनुभव साझा करने के मंच — ये सभी भविष्य में होम्योपैथी की दिशा को तय करेंगे। आज CCRH, NCH और NIH मिलकर प्रशिक्षण और शोध सहयोगों के माध्यम से दुनिया को दिखा रहे हैं कि होम्योपैथी न केवल एक वैज्ञानिक पद्धति है, बल्कि तेज दवाओं के साइड-इफेक्ट्स से बचने के लिए भविष्य में एक कारगर विकल्प सिद्ध हो सकती है।
डॉ.कौशिक कहते हैं कि, मैं अपने अनुभवों से कह सकता हूँ — होम्योपैथी एक विज्ञान है जो व्यक्ति को पूरी तरह समझने की कोशिश करता है। इसमें सिर्फ बीमारी नहीं, बल्कि बीमारी से ग्रस्त इंसान, उसके हाव-भाव और भावनाओं को देखकर इलाज किया जाता है। यही इसकी विशेषता है जो बीमार लोगों को पूर्णत: स्वस्थ करने में मदद करती है|
Disclaimer : प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।