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Written By: Kishori Mishra | Updated : July 25, 2020 8:01 AM IST
क्या सबसे खतरनाक हेपेटाइटिस बी ही है? जानें कितना संभव है इसका इलाज
World Hepatitis Day 2020 : विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा हर साल 28 जुलाई को "विश्व हेपेटाइटिस दिवस" (World Hepatitis Day 2020) के रूप में मनाया जाता है। नोबेल-पुरस्कार विजेता वैज्ञानिक डॉ. बारूक ब्लमबर्ग का जन्मदिन 28 जुलाई को होता है, इसी मौके पर विश्व हेपेटाइटिस दिवस (World Hepatitis Day 2020) मनाया जाता है। वैज्ञानिक डॉ. बारूख ब्लमबर्ग ने हेपेटाइटिस बी वायरस (एचबीवी) की खोज की थी। इस वायरस के लिए इन्होंने एक नैदानिक परीक्षण और टीका विकसित किया था। हेपेटाइटिस (Hepatitis) मूल रूप से लिवर से संबंधित बीमारी है, जो वायरल इंफेक्शन होने के कारण होती है।
इस स्थिति में लिवर में सूजन की समस्या हो सकती है। हेपेटाइटिस में 5 तरह के वायरस होते हैं, जैसे- ए,बी,सी,डी और ई। इन पांच प्रकार के वायरस को लेकर सतर्क रहने की आवश्यकता होती है, क्योंकि इनके कारण ही महामारी जैसी अवस्था पनप सकती है और मौत की आबादी बढ़ सकती है। टाइप बी और सी के कारण लाखों लोग क्रॉनिक बीमारी का कारण बन रहे हैं, क्योंकि इनके कारण लिवर सिरोसिस और कैंसर (World Hepatitis Day 2020) होता है। ऐसे में इस बीमारी से दूर रहने के लिए बच्चों को हेपेटाइटिस का टीका लगाया जाता है, ताकि इससे बचा जा सके।
वर्ष 2016 के एक अध्ययन में पूरी दुनिया में वायरल हेपेटाइटिस के मरीजों की संख्या बताई गई थी। इसमें 19 साल से कम उम्र के 40 लाख बच्चे और किशोर हेपेटाइटिस-सी और 18 साल से कम उम्र के 48 लाख बच्चे और किशोर हेपेटाइटिस-बी से पीडि़त थे। महज 21 देश बच्चों में 80 फीसदी हेपेटाइटिस-सी संक्रमण के जिम्मेदार हैं और इनमें भी सबसे अधिक विकासशील देशों में देखी जाती है। बता दें कि बच्चों में मां के द्वारा मुख्य रूप से हेपेटाइटिस-सी का संरचरण होता है। ऐसा होने के बावजूद इस कैंसर पैदा करने वाली बीमारी के इलाज के लिए अधिक प्रभावी डायरेक्ट एक्टिंग एंटीवायरल (डीडीए) का इस्तेमाल ना तो गर्भवती महिलाओं पर किया जा रहा है और ना ही बच्चों पर, क्योंकि वैज्ञानिकों ने अबतक बच्चों में इस टीके की अनुसंशा नहीं की है। अध्ययन में बताया गया है कि हेपेटाइटिस-सी के मुकाबले बच्चों में नए हेपेटाइटिस-बी संक्रमण के मामलों में कमी आ रही है।
अगर आपके बच्चों को हेपेटाइटिस (World Hepatitis Day 2020) की समस्या हो जाती है, तो उनका विशेष ख्याल रखना होता है। आइए जानते हैं बच्चों में हेपेटाइटिस के दिखने वाले लक्षण और बचाव-
हेपेटाइटिस के प्रथम अवस्था में लक्षण कुछ साफ तरह नहीं पता नहीं चलता है लेकिन क्रॉनिक अवस्था में इसके कुछ लक्षण नजर आ जाते हैं-
शुरुआत में ही बच्चों को हेपेटाइटिस से बचाव के लिए टीका दिया जाता है। सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (Center for Disease Control and Prevention) के मुताबिक, 18 साल के उम्र तक और उससे वयस्क लोगों को छह से बारह महीने में हेपेटाइटिस की तीन डोज दी जाती है, इससे वे इस बीमारी से पूरी तरह से सुरक्षित रह सकते हैं। बच्चों को अगर यह बीमारी घेरती है, तो अपनाएं ये उपाय-
1. बीमारी का लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर की सलाह लें, इस बीमारी में लापरवाही घातक हो सकती है।
2. मानसून में हेपेटाइटिस फैलने का खतरा अधिक होता है, इसलिए बच्चों को इस मौसम में मसालेदार, तैलीय, मांसाहारी और भारी खाद्य पदार्थों का सेवन ना कराएं।
3. बच्चों को पॉलिश किए हुए सफेद चावल, दाल, डिब्बाबंद खाद्य पदार्थ, पेस्ट्री, केक, ऐल्कोहल, चॉकलेट्स से दूरी बनाएं रखें।
4. शाकाहारी आहार, हरी पत्तेदार सब्जियां, ब्राउन राइस, विटमिन सी युक्त खट्टे फल, सूखे खजूर, किशमिश, पपीता, नारियल पानी, बादाम और इलायची का भरपूर सेवन कराएं।
5. अगर किसी बच्चे को हेपेटाइटिस की समस्या हो जाती है, तो उन्हें अधिक से अधिक तरल पदार्थ पीने के लिए दें।
6. उन्हें अधिक से अधिक आराम करने के लिए कहें।
7. अगर पहले से ही आपके घर में किसी को हेपेटाइटिस है, तो अपने परिवार के सदस्यों को हेपेटाइटिस का टीका लगवाएं।
8. इसके साथ ही परिवार के हर एक सदस्य का परीक्षण कराएं। ब्लड टेस्ट से हेपेटाइटिस की जांच की जा सकती है।
9. कभी-कभी, रक्त टेस्ट में कुछ लोगों में हेपेटाइटिस बी या सी होता है। इसका अर्थ होता है कि उन्हें क्रॉनिक (लंबे समय तक रहने वाला) हैपेटाइटिस है। नियमित रूप से डॉक्टर्स की सलाह लें।
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