World Haemophilia Day 2021: जानें खून बहना ना बंद होने की इस बीमारी के लक्षण, कारण और उपचार

World Haemophilia Day 2021: हीमोफीलिया रोग में चोट लगने पर अधिक खून निकलता है और खून जल्दी बंद नहीं होता। कई बार इसमें खून अधिक बह जाने से जान भी चली जाती है। जानें, हीमोफीलिया डिजीज के कारण, लक्षण और इलाज क्या हैं....

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Written By: Anshumala | Updated : April 15, 2021 2:15 PM IST

World Haemophilia Day 2021 in Hindi: हीमोफीलिया (Haemophilia) अनुवांशिक रोग है, जिसमें शरीर के बाहर बहता हुआ रक्त जमता नहीं है। इसके कारण चोट या दुर्घटना में यह जानलेवा साबित होती है, क्योंकि रक्त का बहना जल्द बंद नहीं होता। विशेषज्ञों के अनुसार, इस रोग का कारण एक रक्त प्रोटीन की कमी होती है, जिसे 'क्लॉटिंग फैक्टर' कहते हैं। हीमोफीलिया खून से जुड़ा एक रोग है। हर साल 17 अप्रैल को ''वर्ल्ड हीमोफीलिया डे 2021'' यानी विश्व हीमोफीलिया दिवस (World Haemophilia Day 2021 in Hindi) मनाया जाता है ताकि इस खतरनाक रोग के बारे में लोगों को जागरूक किया जा सके। कई बार बहुत मात्रा में खून बह जाने पर यह जानलेवा भी होता है।

क्या है खून का गुण

हमारा खून (Blood) कई तरह के सेल्स से मिलकर बना होता है। सामान्य स्थिति में किसी तरह की चोट लगने पर या कट जाने पर ये खून शरीर से बाहर निकलने लगता है। चूंकि, खून तरल होता है इसलिए गुणों के अनुसार शरीर में किसी एक जगह भी कट जाने या चोट लग जाने पर शरीर का पूरा खून निकल जाना चाहिए। मगर ऐसा नहीं होता है, क्योंकि प्रकृति ने खून को इस तरह बनाया है कि शरीर से बाहर आने पर ये गाढ़ा होकर जमने लगता है और एक थक्के के रूप में एक सुरक्षा कवच बना लेता है ताकि शरीर के अंदर मौजूद बाकी खून को सुरक्षित किया जा सके। इससे शरीर का बाकी खून संक्रमण के प्रभाव से भी बच जाता है।

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क्यों खतरनाक है हीमोफीलिया रोग

हीमोफीलिया रोग में शरीर में ऐसे प्रोटीन्स की कमी हो जाती है जो खून को गाढ़ा बनाने में सहायक होते हैं। ऐसे में हीमोफीलिया के रोगी के शरीर पर एक बार चोट लगने या कटने पर उसका खून रुकना मुश्किल हो जाता है क्योंकि ब्लड को क्लॉट होने में ज्यादा समय लगता है। जरूरी नहीं है कि हीमोफीलिया के रोगी को चोट या कटने से ही खतरा हो। कई बार हीमोफीलिया के कारण रोगी को आंतरिक स्राव या इंटरनल ब्लीडिंग भी होने लगती है। अंदर जमने वाले रक्त का कई बार पता नहीं चलता है और ये जमकर धीरे-धीरे ट्यूमर बन जाता है।

क्या है हीमोफीलिया (What is Haemophilia in Hindi)

हीमोफीलिया एक अनुवांशिक बीमारी है जो माता पिता से बच्चों में फैलती है। इसका पूरी तरह इलाज अभी संभव नहीं हुआ है मगर कुछ खास ट्रीटमेंट्स के द्वारा इस रोग के लक्षणों और इससे होने वाले नुकसान को बहुत हद तक कम किया जा सकता है। किसी बड़ी चोट या एक्सीडेंट की स्थिति में हीमोफीलिया के रोगी को खून बह जाने के कारण जान जाने का खतरा होता है इसीलिए इस रोग में बहुत सावधानी की जरूरत होती है। हीमोफीलिया 3 तरह का होता है- हीमोफीलिया ए, हीमोफीलिया बी और हीमोफीलिया सी। हीमोफीलिया ए के रोगी सबसे ज्यादा पाए जाते हैं। हीमोफीलिया के हर 10 में से 8 रोगी हीमोफीलिया ए का शिकार होता है।

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world hemophilia day its causes treatment 1 हीमोफीलिया खून से जुड़ा एक रोग है जो अनुवांशिक होता है। © Shutterstock.

हीमोफीलिया रोग के लक्षण (Symptoms of Haemophilia)

पेशाब में खून आना।

गुदा द्वार से खून आना।

छोटी सी चोट लगने पर गहरा घाव होना।

बिना किसी वजह से शरीर में घाव होना।

चोट लगने पर अधिक खून निकलना और खून बंद ना होना।

नाक से खून निकलना।

जोड़ों में दर्द।

चिड़्चिड़ापन।

आंखों से धुंधला दिखाई देना।

भारत में इलाज की संभावनाएं (Treatment of Haemophilia)

भारत में तकरीबन 1.5 लाख लोग इस खतरनाक बीमारी (World Haemophilia Day 2021 in Hindi) से प्रभावित हैं। हीमोफीलिया का इलाज बहुत मंहगा है। सरकारी अस्पतालों में इस रोग के लिए कुछ दवाइयां और इंजेक्शन उपलब्ध हैं। चूंकि इस रोग में रोगी को हफ्ते में दो-तीन इंजेक्शन लगवाने पड़ते हैं इसलिए लोगों को इसके इलाज के लिए कठिनाई भी उठानी पड़ती है। अब तक हीमोफीलिया ए के मरीज को सप्ताह में तीन और हीमोफीलिया बी के मरीज को सप्ताह में दो इंजेक्शन लेने पड़ते थे, मगर अब ऐसे इंजेक्शन ईजाद कर लिया गया है जिसे सप्ताह में एक बार लगाने से भी हीमोफीलिया के रोग से बचाव संभव हो सकेगा। इसके साथ ही अब मरीज को नसों में इंजेक्शन लगाने की पीड़ादायक स्थिति से नहीं गुजरना पड़ेगा क्योंकि नए शोध में ऐसे इंजेक्शन को भी ईजाद कर लिया गया है जिसे इंसुलिन की तरह सीधे त्वचा पर लगाया जा सकेगा और खास बात ये है कि इस इंजेक्शन को महीने में सिर्फ एक बार लेना पड़ेगा।

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