World Heart Day 2020: कोरोना काल में रखें दिल का ख्याल , एक्सपर्ट से जानें दिल को दुरुस्त रखने के ये आसान तरीके

आंकड़ों के अनुसार हृदय रोग भारत में सबसे अधिक मृयुदर का आंकड़ा देने वाली बीमारियों में से एक है, और वर्ल्ड हार्ट फेडरेशन के मुताबिक दुनिया में सबसे अधिक मृत्यु हृदय रोग के कारण होती है। यह स्थिति निश्चित रूप से चिंताजनक है।

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Written By: Jitendra Gupta | Updated : September 29, 2020 7:06 PM IST

कोरोना संक्रमण की चपेट में इस वक़्त पूरी दुनिया है। संक्रमित मरीजों के हर दिन बढ़ते आंकड़े बेहद चिंताजनक स्थिति की और इशारा करते हैं। सभी संबंधित सावधानियों, सोशल डिस्टेंसिंग आदि का पालन किया जा रहा है, यह बिलकुल सही है, लेकिन कोविड से भी पहले हमारा देश ऐसी अनेक गंभीर बीमारियों से जूझ रहा है। हृदय रोग उनमें से एक है। आंकड़ों के अनुसार हृदय रोग भारत में सबसे अधिक मृयुदर का आंकड़ा देने वाली बीमारियों में से एक है, और वर्ल्ड हार्ट फेडरेशन के मुताबिक दुनिया में सबसे अधिक मृत्यु हृदय रोग के कारण होती है। यह स्थिति निश्चित रूप से चिंताजनक है। यहाँ अब ध्यान देने वाली बात यह है कि हृदय रोग का कोई एक कारण नहीं होता, वहीँ हृदय रोग के कारण व्यक्ति के शरीर अन्य संबंधित समस्याएं और बीमारियां उत्पन्न होतीं हैं, और अनियमित जीवनशैली के चलते हृदय रोग का जोखिम हर उम्र के व्यक्ति को है। हमको हृदय रोग और इसके विभिन्न आयामों पर प्रकाश डालना होगा जिसके बारे में अवगत करवा रहे हैं श्री बालाजी एक्शन मेडिकल इंस्टिट्यूट के सीनियर कंसल्टेंट एंड इंचार्ज, सीटीवीएस, डॉक्टर राकेश चुग

क्या है हृदयरोग

सरल भाषा में कहें तो हृदय का मुख्य काम शुद्ध रक्त को साफ़ करके शरीर में पहुँचाना और अशुद्ध रक्त को बाहर निकालना है, और इसी प्रक्रिया बाधित होना हृदय रोग है। इस बाधित प्रक्रिया की गंभीरता पर रोग की गंभीरता निर्भर करती है। कई बार यह जन्मजात भी हो सकती है। व्यस्क जीवन में भी बहुत से रोग और खराब जीवनशैली नशे की लत आदि इसकी और ले जाते हैं। हमें इसलिए भी और सचेत होना होगा क्योंकि कोविड का संक्रमण हमको पूरी तरह से घेरे हुए है और हृदय रोग के आंकड़े पहले से ही बहुत हैं। इसलिए संक्रमण से बचाव के सभी नियमों का पालन करें, धूम्रपान जैसी आदतों से दूर रहें।

ध्यान रहे बहुत से कोरोना के संक्रमितों में भी हार्ट ब्लाक की समस्या सामने आ रही है। एक अध्ययन के मुताबिक़ गंभीर कोविड के मरीजों में हृदय रोग विकसित होने की 10 गुना अधिक संभावना है। इसलिए इस ओर विशेष ध्यान दें। संक्रमण से बचें साथ ही हृदय के स्वास्थ्य की ओर भी विशेष ध्यान दें ताकि इन चिंताजनक आंकड़ों को कम करने में मदद मिले। स्वस्थ जीवनशैली अपनाएँ कोरोना काल में अपने आप को हृदय रोग से भी दूर रखें।

वे गंभीर रोग कौन से हैं जिनके कारण हृदय का स्वास्थ्य जोखिम में रहता है और कोविड के इस काल में ख़ास ध्यान रखना है यदि इनसे जूझ रहे हैं तो गुरुग्राम स्थित नारायणा अस्पताल के डायरेक्टर, सीनियर कंसल्टेंट एंड रीजनल क्लिनिकल लीड नार्थ कार्डियोलॉजी एंड पीडियाट्रिक कार्डियोलॉजी डॉक्टर हेमंत मदान बता रहे हैं कुछ जरूरू टिप्स।

अत्यधिक वजन :- शरीर में अधिक वजन होने के कारण धमनियों पर दबाव पड़ता है जिसके कारण हृदय की और जाने वाली वाहिकाओं में रक्त की आवाजाही में बाधा आती है और यही स्थिति हृदय रोग का कारण बन सकती है।

अनियंत्रित रक्तचाप :- यदि व्यक्ति का रक्तचाप अनियांतिर्ट है तो रक्तवाहिकाओं द्वारा हृदय पर दबाव बनता है जिसका परिणाम हार्ट अटैक में भी हो सकता है।

डायबिटीज :- डायबिटीज जैसे रोग में रक्तचाप की अहम् भूमिका होती है, और अनियंत्रित गति से रक्त का संचालन निश्चित रूप से हृदय के लिए सही नहीं है।

यदि इनमें से किसी भी रोग से जूझ रहे हैं तो अभी के इस कोविड काल में खासतौर पर इनका ध्यान रखें। उपरोक्त के अलावा शारीरिक गतिविधियों की कमी, अनियमित खान पान आदि इसके ज़िम्मेदार हैं। खासतौर पर बच्चों का इस विषय में अतिरिक्त खास ख्याल रखें।

अब यदि कोविड के सन्दर्भ में बात करें तो देखा गया है कि कोविड के मरीजों में बहुत बड़ी संख्या हृदय रोगों से पीड़ित मरीजों की भी होती है। इसके हृदयरोग के कारण होने वाले करण है जैसे कि :-

  • रक्त में क्लाटिंग ज़्यादा होना,
  • अत्यधिक तनाव
  • सही समय पर डॉक्टर से ना मिल पाने की वजह से अनियमित फ़ॉलो अप
  • इसलिए सही समय पर डॉक्टर से उचित परामर्श लें।

कोविड काल में हृदय रोगियों के लिए कितना जोखिम भरा है और कोविड का संक्रमण का हृदय रोग से किस प्रकार संबंध है इस बारे में जानकारी दे रहे हैं डॉक्टर आनंद कुमार पाण्डेय, डायरेक्टर एंड सीनियर कंसल्टेंट- कार्डियोलॉजी, धर्मशिला नारायणा सुपरस्पेशेलिटी अस्पताल

कोविड के दौर में हृदय रोग से जूझ रहे लोग न केवल परेशान रहे बल्कि उनके इलाज की प्रक्रिया भी बाधित रही, मेरे अपने अनुभव की यदि बात करें तो एक मरीज़ की संक्रमण के डर से समय पर इलाज के लिए अस्पताल न आने के कारण मृत्यु भी गई। कोविड और हृदय रोग के इस आपसी संबंध को विस्तार से समझने की ज़रूरत है :-

हृदय रोगी और कोविड का संक्रमण

सबसे पहले ध्यान देने वाली बात यह है कि एक हृदय रोगी की इम्युनिटी कम हो सकती है जिसके चलते अभी के दौर में उन्हें कोविड के संक्रमण का बहुत खतरा हो सकता है। इसलिए इन्हें विशेष सावधानियां बरतने की आवश्यकता है।

कोविड के मरीजों को हृदय रोग

कोविड का संक्रमण फेफड़ों का संक्रमण है लेकिन फेफड़ों की किसी बीमारी के कारण गंभीर स्थिति हो जाने पर हृदय जोखिम में आजाता है क्योंकि दोनों अंगों का संचालन आपस में जुड़ा हुआ है। ऐसे में यदि किसी कोविड संक्रमित व्यक्ति की स्थिति गंभीर हो जाती है तो उसको निश्चित रूप से हृदय रोग का जोखिम है।

संक्रमण का डर और हृदय रोगी

एक अहम बात यह भी है कि कोविड महामारी के शुरुवात से लेकरअब तक संक्रमण के आंकड़े चिंताजनक रूप से बढ़ते गए, साथ ही बचाव के तौर पर संक्रमण के जोखिम वाली जगहों पर जाने से बचना आदि हिदायतों का पालन किया गया। ऐसे में लोगों में संक्रमण का डर भी बैठ गया जिसके चलते बहुत से मरीज़ समस्या बहुत गंभीर हो जाने पर अस्पताल आये। ऐसे में समझना होगा कि एक बीमारी के संक्रमण से बचने के लिए व्यक्ति दूसरी बिमारियों का जोखिम बढ़ा रहा है। संक्रमण से बचने के सभी नियमों का पालन करें और जरूरत पड़े तो अस्पताल जरूर जाएं।

कोविड का माहौल और नकारात्मकता

एक हृदय रोगी पर जीवन के भानात्मक पहलुओं का बहुत असर पड़ता है। कोविड महामारी का दौर ऐसा रहा जिसमें संक्रमण का डर, सोशल डिस्टेंसिंग के कारण दोस्तों आदि से न मिल पाना, हर दिन संक्रमित लोगों की बढ़ती तादात आदि ने सबके मानसिक स्वास्थ्य पर भी गहरा असर डाला। और एक हृदय रोगी के लिए तनाव किसी भी तरह से अच्छा नहीं। इस प्रकार हृदय रोग से जूझ रहे लोगों के दिल के स्वास्थ्य पर बहुत असर पड़ा।

  • इसलिए अभी के दौर को ध्यान में रखते हुए सभी लोग हृदय रोग के सम्बन्ध में इस प्रकार ध्यान रख सकते हैं :-
  • अपना ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर नियंत्रण में रखें, लगातार चेक करते रहें।
  • अपने संबंधित डॉक्टर के संपर्क में रहें, किसी भी प्रकार की समस्या होने पर सलाह लें।
  • यदि संबंधित डॉक्टर द्वारा अस्पताल जाने की सलाह दी गई है तो जाएं, संक्रमण के डर के कारण इसे हरगिज़ न टालें। संक्रमण से बचाव
  • की सभी सावधानियां अपनाएँ और किसी एक व्यस्क व्यक्ति के साथ अस्पताल जाएँ अधिक लोगों को साथ न ले जाएँ ताकि अस्पताल में भीड़ न हो और संक्रमण का खतरा न बढ़े।
  • नियमित व्यायाम करें, योग, प्राणायाम आदि में ऐसे बहुत से व्यायाम हैं जो हृदय रोग के जोखिम को करते हैं अपने डॉक्टर की सलाह पर अपना नियम बनायें।
  • खान पान का विशेष ध्यान दें, खासकर पोषण का, अपने संबंधित डॉक्टर की सलाह पर अपने खान पान का नियम बनायें।

    जीवन के प्रति सकारात्मक रूख अपनाएँ। स्थिति चाहे कैसी भी आये, धैर्य से काम लें। खुशनुमा महाल बनाये रखें।

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