
रश्मि उपाध्याय
रश्मि उपाध्याय साल 2014 से मीडिया क्षेत्र से जुड़ी हैं और TheHealthSite.Com में बतौर एडिटर काम कर रही हैं। इन्हें ... Read More
Written By: Rashmi Upadhyay | Updated : September 28, 2020 12:51 PM IST
World Heart Day : कुछ इस तरह दिखते हैं दिल में छेद होने के शुरुआती लक्षण, समय रहते ध्यान दिया जाए तो बच सकती है जान
दिल यानि कि ह्रदय मानव शरीर का एक महत्वपूर्ण अंग है। भले ही हृदय का आकार छोटा होता है और यह वजन में मात्र 300 ग्राम के लगभग होता है। लेकिन इसका काम बहुत बड़ा होता है। ह्रदय हमारे शरीर में रक्तवाह तंत्र की मदद से खून पंप करने का काम करता है। यानि कि दिल पूरे शरीर में खून की सप्लाई करता है और ऊतकों तक ऑक्सीजन व पोषक तत्त्व पहुंचता है। इससे आप समझ गए होंगे कि ह्रदय का स्वस्थ रहना कितना जरूरी है। 29 सितंबर को विश्व हार्ट दिवस (World Heart Day) मनाया जाता है। इस खास अवसर को मनाने का मकसद लोगों में ह्रदय के प्रति गंभीरता और ह्रदय रोगों के प्रति जागरुकता लाना होता है। आंकड़े बताते हैं कि भारत में कम उम्र में ही हार्ट-अटैक और ह्रदय से जुड़े अन्य रोग लगातार बढ़ रहे हैं। ह्रदय से जुड़ी एक गंभीर समस्या है दिल में छेद होना। डॉक्टर्स कहते हैं कि दिल में छेद होना अधिकतर बच्चों में जन्म जात होता है। लेकिन जब अभिभावक इस रोग के लक्षणों पर ध्यान नहीं दे पाते हैं तो ये जानलेवा साबित हो जाता है। इसलिए जरूरी है कि दिल में छेद होने के लक्षणों को समझा जाए और यदि बच्चे में इसके लक्षण दिखते हैं तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क कर इलाज किया जाए।
बच्चे के दिल में छेद होना एक गंभीर मेडिकल एमेरजेंसी मानी जाती है। यह आमतौर पे बच्चे में जन्मजात ही होता है लेकिन इसके लक्षण दिखने में कई बार समय लग जाता है या दिखते ही नहीं हैं। दिल में छेद होने का मतलब है कि हृदय के ऊपरी दो कक्षों के बीच की दीवार में छेद होना। इसी छेद के कारण रक्त एक चैम्बर से दूसरे में अनावश्यक रूप से लीक होने लगता है। जिसमे चलते हृदय के कार्य प्रभावित होने लगते हैं। यूं तो जन्म से पहले ही अल्ट्रासाउंड के द्वारा जांच में इस चीज की पुष्टि हो जाती है, लेकिन कई बार छेद इतना छोटा होता है कि उसका पता नहीं चल पाता। डॉक्टर्स कहते हैं कि जन्म के दौरान या पहले ये छेद इतना छोटा है कि कई बार जांच में भी नहीं आ पाता और डॉक्टर्स भी इस बारे में बताने में असमर्थ होते हैं। लेकिन अगर डॉक्टर्स इस बारे में पेरेंट्स को सतर्क करते हैं तो यह उनकी जिम्मेदारी बनती है कि वह बच्चों में इसके शुरुआती लक्षणों के दिखने पर उन्हें गंभीरता से लें और तुरंत डॉक्टर्स से मिलकर जांच शुरू करें।
1. जब दिल में छेद होता है तो बच्चों को अक्सर ठंड लगती है। ऐसा गर्मियों के मौसम में भी हो सकता है।
2. स्तनपान के दौरान शिशु का रोना, थकावट महसूस करना या दूध पीने में दिक्कत महसूस होना
3. अचानक से तेज पसीना आना
4. बार बार फेफड़ों के संक्रमण या बीमारियों का शिकार होना
5. बच्चों का वजन धीमी गति से बढ़ते जाना
यदि आपको उपरोक्त बताए गए लक्षण अपने बच्चे में दिखते हैं तो आपको बिना देरी किए डॉक्टर से मिलना चाहिए। कई बच्चों में जन्मजात हृदय दोष होते हैं और जागरूकता की कमी के कारण सही समय पर उपचार लेने में विफल रहते हैं। इसलिए, माता-पिता को लक्षणों पर नजर रखनी चाहिए और डॉक्टर द्वारा अनुशंसित परीक्षणों का चयन करना चाहिए। डॉक्टर ऐसी स्थिति में बच्चे की सर्जरी कर सकते हैं। जिसमें कुछ हफ्तों से लेकर महीनों तक का समय लग सकता है।