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बच्चों को जन्म से ही हो सकती हैं ये हार्ट प्रॉब्लम, अगर दिखें ये लक्षण तो जल्द से जल्द ले जाएं डॉक्टर के पास

Congenital heart disease in children: बड़ों की तरह छोटे बच्चों को भी हृदय से संबंधित समस्याएं हो सकती हैं। इस लेख में हम जानेंगे बच्चों में कंजेनिटल हार्ट डिजीज के लक्षण और उसके इलाज के बारे में।

बच्चों को जन्म से ही हो सकती हैं ये हार्ट प्रॉब्लम, अगर दिखें ये लक्षण तो जल्द से जल्द ले जाएं डॉक्टर के पास

Written by Mukesh Sharma |Published : September 29, 2022 1:20 PM IST

Congenital heart disease in hindi: दिल हमारे शरीर के सबसे महत्वपूर्ण अंगों में से एक होता है और इसलिए इसकी देखभाल रखना बहुत जरूरी है। लेकिन खराब लाइफस्टाइल, बुरी आदतों और सही डाइट न होने के कारण हृदय का स्वास्थ्य खराब होने लगता है और कई अलग-अलग समस्याएं होने लगती हैं। हालांकि, ऐसा जरूरी नहीं है कि हार्ट प्रॉब्लम्स सिर्फ बड़ों को ही होता है, बच्चों में भी जन्म से ही दिल संबंधी कई समस्याएं हो सकती हैं। जन्म से ही मौजूद होने वाली समस्याओं को जन्मजात हृदय रोग (Congenital heart disease) कहा जाता है। कंजेनिटल हार्ट डिजीज कोई एक नहीं बल्कि दिल संबंधी कई अलग-अलग बीमारियां होती हैं। कंजेनिटल हार्ट डिजीज के साथ जन्म लेने वाले बच्चों का दिल संरचनात्मक रूप से ठीक से नहीं बना होता है और उदाहरण के लिए दिल में छेद होना, कोई वाल्व पूरी तरह से खुली न होना या फिर दिल का कोई हिस्सा ठीक से बना हुआ न होना। हालांकि, कई बार तो कंजेनिटल हार्ट डिजीज के कारण शुरुआत में कोई प्रमुख लक्षण भी नहीं होता है और जब स्थिति गंभीर हो जाती है तब ही इसका पता चल पाता है। यही कारण है कि कई बार बच्चों में दिल संबंधी बीमारियों का देरी से पता चल पाता है। चलिए जानते हैं बच्चों में कंजेनिटल हार्ट डिजीज के लक्षण

छोटे बच्चों में दिल की बीमारियों के लक्षण

कंजेनिटल हार्ट डिजीज से ग्रसित कुछ बच्चों को शुरुआत में किसी प्रकार के लक्षण ही महसूस नहीं होते हैं। ऐसे में इस बीमारी पर ध्यान नहीं दिया जाता है और धीरे-धीरे स्थिति गंभीर हो जाने के बाद ही लक्षण दिखने लगते हैं। जब स्थिति गंभीर हो जाती है, तो उसे क्रिटिकल कंजेनिटल हार्ट डिजीज कहा जाता है, जिसमें बच्चों को निम्न लक्षण महसूस हो सकते हैं -

बच्चे की त्वचा के रंग में बदलाव होना

  • होंठ व नाखून का रंग नीला पड़ना
  • दिल की धड़कन तेज होना
  • सीने में दर्द या जकड़न रहना
  • बच्चा बार-बार बेहोश होना
  • ब्लड प्रेशर कम रहना
  • सांस फूलना
  • जल्दी थक जाना

बच्चों कंजेनिटल हार्ट डिजीज का कैसे पता चलता है

वैसे तो आजकल टेक्नोलॉजी इतनी तेज हो गई है कि गर्भ में ही बच्चे के स्वास्थ्य का पता चल जाता है। ज्यादातर मामलों में अगर बच्चे को खासतौर पर दिल की संरचना संबंधी कोई समस्या है, जैसे छेद या विकृति आदि तो गर्भावस्था के दौरान किए जाने वाले टेस्ट आदि में इनका पता लग जाता है। साथ ही बच्चे के जन्म के बाद भी उसकी स्क्रीनिंग की जाती है, जिसके उसकी स्वास्थ्य समस्याओं का पता चल जाता है। वहीं कुछ समस्याओं जन्म से ही होती हैं, लेकिन उनका उस समय पता नहीं चल पाता है। ऐसे में उन्हें बाद में लक्षण महसूस होने लगते है और इन लक्षणों का पता लगते ही तुरंत बच्चे की डॉक्टर के पास ले जाना चाहिए ताकि स्थिति की जांच की जा सके।

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बच्चों में कंजेनिटल हार्ट डिजीज का इलाज

कुछ कंजेनिटल हार्ट डिजीज का इलाज पूरी तरह से संभव है, जबकि अन्य को दवाओं व अन्य ट्रीटमेंट की मदद से नियंत्रित करके रखा जा सकता है। यह पूरी तरह से निर्भर करता है कि बच्चा किस बीमारी से ग्रसित है। अगर बच्चे को जन्म से ही हृदय की संरचना से संबंधित कोई समस्या है, तो ऐसे में सर्जरी आदि भी करनी पड़ सकती है, जिसमें ओपन हार्ट सर्जरी भी शामिल हैं।