विश्वभर में 5-19 साल के बच्चों में बहरेपन की समस्या क्यों बढ़ रही है? WHO ने आंकड़ों सहित दी जानकारी

आंकड़े बताते हैं कि विश्वभर में 5-19साल के बच्चों में हियरिंग लॉस की संख्या ज्यादा है। लेकिन ऐसा क्यों होता है आइए वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन से जानते हैं। साथ ही यह भी जानेंगे कि हियरिंग लॉस के चांस को कैसे कम किया जा सकता है।

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Written By: Vidya Sharma | Published : June 3, 2026 4:15 PM IST

सुनने की क्षमता कम होने के कई कारण हैं, जिनके बारे में हम आपको इस लेख में बताएंगे, लेकिन आइए उससे पहले आंकड़ों पर नजर डालते हैं। वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन की रिपोर्ट के अनुसार विश्व की 5% से अधिक आबादी,  यानी 43 करोड़ लोगों को अपने हेयर लॉस के उपचार के लिए ट्रीटमेंट चाहिए, जिनमें 34 करोड़ बच्चे शामिल हैं। अनुमान है कि 2050 तक 7 करोड़ से अधिक लोग, यानी कि प्रत्येक 10 में से 1 व्यक्ति हेयरिंग लॉस से ग्रस्त होंगे।

जिस तरह भविष्य में ये आंकड़े बढ़ते हुए दिख रहे हैं, ये काफी चिंताजनक है। हेयरिंग लॉस का मतलब है कि सही से सुनने वालों के कान में 35 डेसिबल से ज्यादा हियरिंग एबीलिटी में कमी देखी गई है। यह एक तरह का एज फैक्टर है, जिससे 60 वर्ष से अधिक आयु के लोगों में 25% से अधिक लोग श्रवण हानि से प्रभावित होते हैं।

हियरिंग लॉस और बहरापन कैसे पता करें?

डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट के अनुसार जिस व्यक्ति की सुनने की क्षमता सामान्य व्यक्ति के बराबर नहीं होती उसे श्रवण हानि कहा जाता है। हियरिंग लॉस हल्का, मध्यम, मध्यम गंभीर, गंभीर या अत्यधिक गंभीर हो सकता है। यह एक कान या दोनों कानों को प्रभावित कर सकता है और बातचीत या तेज आवाज सुनने में कठिनाई पैदा कर सकती है।

इससे निपटने के लिए आज कई हियरिंग एड, कॉक्लियर इम्प्लांट और अन्य सहायक उपकरण उबल्बध हैं, जिनका लाभ उठाया जा सकता है और किया भी दा रहा है। बधिर लोगों में अक्सर सुनने की क्षमता बहुत कम या बिल्कुल नहीं होती है। उन्हें कॉक्लियर इम्प्लांट से फायदा हो सकता है। उनमें से कुछ लोग संवाद के लिए सांकेतिक भाषा का उपयोग करते हैं।

सुनने की क्षमता में कमी या बहरापन आने के क्या कारण हैं?

कोई भी समस्या उम्र देखकर नहीं आती है, लेकिन सुनने की क्षमता में कमी आमतौर पर बढ़ती उम्र के साथ देखी जाती है। लेकिन इसके अलावा और भी कई कारण है जो छोटों से लेकर बढ़ों तक हियरिंग लॉस का कारण बन रहे हैं जैसे- 

  • जेनेटिक्स फैक्टर, जिसमें आनुवंशिक और गैर-आनुवंशिक हियरिंग लॉस शामिल हैं।
  • गर्भाशय के भीतर होने वाले संक्रमण जैसे रूबेला और साइटोमेगालोवायरस
  • जन्म के समय ऑक्सीजन की कमी होना और वजन कम होना
  • लंबे समय से कान में इंफेक्शन रहना जैसे क्रोनिक सपुरेटिव ओटिटिस मीडिया
  • कान में पानी भर जाना या मेनिन्जाइटिस और अन्य संक्रमण होना

इसके अलावा उम्र के साथ-साथ पुराने लोग, धूम्रपान, ऑटोस्कलैरोसिस, एज रिलेटिड सेंसरीन्यूरल हियरिंग लॉस, कान में मैल जमना, काम या सिर पर चोट, तेज सिर दर्द, ऑटोटॉक्सिक दवाएं, पोषक तत्वों की कमी आदि भी हियरिंग लॉस के कारण हैं।

सुनने की क्षमता कम होने से कैसे रोकें?

श्रवण हानि के कई कारणों को पब्लिक हेल्थ स्टैटर्जी और जीवन भर लागू किए जाने वाले क्लीनिकल इंटरवेंशन के माध्यम से टाला जा सकता है। पैदा होने से लेकर बूढ़ापे तक, लाइफ की हर स्टेज में हियरिंग लॉस की रोकथाम जरूरी है। बच्चों में, लगभग 60% सुनने की क्षणता हानि उन कारणों से होती है जिन्हें सार्वजनिक स्वास्थ्य उपायों को लागू करके रोका जा सकता है। इसी प्रकार, वयस्कों में श्रवण हानि के अधिकांश सामान्य कारण, जैसे तेज आवाज के संपर्क में आना और कान को नुकसान पहुंचाने वाली दवाएं, भी रोके जा सकते हैं।

डिस्क्लेमर: कई बार बच्चा पैदाइश के साथ ही हियरिंग लॉस से ग्रस्त होता है, लेकिन माता-पिता को पता नहीं चलता है। लेकिन अगर आपको किसी बच्चे या बड़े में ऐसे संकेत दिखें तो उन्हें अनदेखा न करें और डॉक्टर के पास जाएं। कम सुनाई देने पर खुद से कान साफ करने या कान में तेल डालने का नुस्खा न अपनाएं।

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