
साधना तिवारी
साधना तिवारी 15 वर्षों से मीडिया क्षेत्र में हैं। लगभग 9 वर्षों से अधिक समय से ZEE ग्रुप के साथ जुड़ी हुई ... Read More
Written By: Sadhna Tiwari | Updated : April 7, 2020 2:48 AM IST
There are many potential causes of tight hips, but often it results from sitting for several hours a day. When you sit for long hours, your hip muscles remain in a shortened position for a very long time, which eventually make them very tight. Not just tight hips can make you feel uncomfortable, they can also limit your range of motion during workout. Tightness in the hips can make it harder to squat or lunge deeper or take a larger stride while running. When you have tight hip flexors, your glutes may become less active. In order to compensate this weakness, other muscles (like those in the low back), will work harder than they can handle, which can increase your risk of injury. Yoga is considered to be a great option to get rid of hip tightness. Below are a few yoga poses that can stretch your hips as well as strengthen your hamstrings and gluteal muscles.
World Health Day 2020: हेल्दी हार्ट (healthy heart) और हेल्दी बॉडी (Healthy Body) के लिए एक एक्टिव लाइफस्टाइल (Active Lifestyle benefits) मददगार साबित होती है। इसीलिए, एक्सरसाइज़ करने से दिल को बीमारियों से बचाया जा सकता है। लेकिन, नियमित एक्सरसाइज़ करने वाले लोग भी अगर बहुत अधिक देर तक बैठकर काम करते हैं, तो उनके दिल की सेहत पर इसका बुरा प्रभाव पड़ता है। (World Health Day 2020), जी हां, बहुत देर तक बैठे रहने से दिल की सेहत पर बुरा असर पड़ सकता है और इससे कार्डियोवैस्कुलर डिज़िज़ेज़ का ख़तरा बढ़ सकता है। (Side Effects of Sitting too long)
दरअसल, कुछ समय पहले प्रकाशित एक स्टडी में यह कहा गया कि जो लोग लगातार बैठकर काम करते रहते हैं। उन्हें, दिल की बीमारियों का ख़तरा अधिक होता है। (Side Effects of Sitting too long in hindi)
हर वर्ष 7 अप्रैल को विश्व स्वास्थ्य दिवस यानि वर्ल्ड हेल्थ डे ( World Health Day 2020) मनाया जाता है। इस वर्ष विश्व स्वास्थ्य दिवस कोरोना वायरस और कोविड-19 इंफेक्शन के मरीज़ों की सेवा में प्रयासरत मेडिकल स्टाफ को समर्पित किया गया है। जैसा कि, इन दिनों कोरोना वायरस महामारी (coronavirus pandemic) के कारण, लॉकडाउन और होम क्वारंटाइन जैसे उपाय अपनाए जा रहे हैं। ऐसे में लोग घरों में रह कर ही अपने दफ्तर का काम भी कर रहे हैं। ऐसे में जिम जानें, सीढ़ियां उतरने-चढ़ने और यहां तक कि लोगों का मॉर्निंग या इवनिंग वॉक पर जाना भी बंद सा हो गया है। ऐसे में लोग फिजिकल एक्टिव नहीं रह रहे हैं। इससे, इसका सेहत पर बुरा असर पड़ सकता है। जो किदिल की बीमारियों का ख़तरा भी बढ़ा सकता है।
कॉरपोरेट जॉब्स में जहां लोग दिनभर बैठे रहते हैं और काम में खुद को इतना बिजी रखते हैं कि अक्सर वह लंच, चाय या पानी पीने के लिए भी डेस्क से उठने से बचना चाहते हैं। ऐसे में शारीरिक गतिविधियां लगभग ठप्प-सी हो जाती हैं। नतीजतन दिल से जुड़ी कोरोनरी रक्त वाहिकाओं में ब्लॉकेज़ की स्थिति बनने लगती है। कैल्शियम जैसे तत्व इन वाहिकाओं में जमा होने लगते हैं। लोगों को लगता है कि ऑफिस के बाद या सुबह एक्सरसाइज़ करने से फिट और हेल्दी बना जा सकता है। लेकिन, इस ब्लॉकेज़ को केवल जिम जाकर एक्सरसाइज करने से तोड़ना आसान नहीं हो पाता। (Side Effects of Sitting too long)
दि जर्नल ऑफ अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन (Journal of the American Heart Association) में 2017 में छपी इस स्टडी के लेखकों का कहना है कि, निश्चित ही एक्सरसाइज करने से कार्डियोवैस्कुलर बीमारियों का खतरा कम हो सकता है। साथ ही वर्कआउट ओवरऑल फिटनेस भी बढ़ाता है। लेकिन, अगर एक्सरसाइज करने वाले लोग भी दिन में कई-कई घंटे बैठे रहते हैं। तो, उनके दिल का सुरक्षित रह पाना संभव नहीं होता।
इस स्टडी में 518 महिलाओ की दिनचर्या पर ध्यान दिया गया। जिसमें, इस बात पर गौर किया गाया कि वे रोज़ाना कितने घंटे बैठकर काम करती हैं। इनमें ऐसी महिलाएं भी शामिल थीं, जिनका मेनोपॉज़ खत्म हो चुका था और ऐसी भी जिनका वजन अधिक था।
जैसा कि पोस्ट-मेनोपॉज़ल फेज में महिलाएं अधिक सुस्त हो जाती हैं। माना जाता है कि मेनोपॉज़ के बाद महिलाओं में हार्ट अटैक की संभावना अधिक बढ़ जाती है। इसीलिए, उनकी दिनचर्या पर भी खास नज़र रखी गयी।
इस स्टडी के निष्कर्ष बताते हैं कि, बड़ी उम्र में हार्मोनल चेंजेस की वजह से महिलाओं में दिल की बीमारियों का ख़तरा अधिक बढ़ जाता है। इस स्टडी के अनुसार ऐसी महिलाएं जो, ज़्यादा समय बैठकर बितायी हैं। उन्हें, कार्डियोवैस्कुलर डिज़िज़ेज़ का ख़तरा सबसे अधिक होता है। इसमें, बीएमआई, मोटाबा, इंसुलिन रेज़िस्टेंस जैसी हेल्थ कंडीशन्स भी प्रभावित होती हैं।
इसीलिए, इस स्टडी के आधार पर यह कहा गया कि जो महिलाएं बहुत देर तक बैठकर काम करती हैं। उनके दिल पर इसका बुरा प्रभाव पड़ता है। जिससे, उन्हें दिल की बीमारियों का खतरा भी अधिक होता है।