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विश्व पर्यावरण दिवस 2021: बिगड़ते पर्यावरण संतुलन का सेहत पर क्या होता है असर, जानें

Environment Side Effects: बिगड़ते पर्यावरण संतुलन, जलवायु परिवर्तन और बढ़ते औद्योगिककरण (Industrialization) की वजह से शुद्ध हवा में कमी आना, जिससे अस्थमा, सांस और फेफड़ों से संबंधित बीमारी के होने का खतरा बढ़ जाता है।

विश्व पर्यावरण दिवस 2021: बिगड़ते पर्यावरण संतुलन का सेहत पर क्या होता है असर, जानें
5 जून को हर साल दुनिया में ‘विश्व पर्यावरण दिवस’ मनाया जाता है। © Shutterstock

Written by Anshumala |Updated : June 4, 2021 6:11 PM IST

Environment Side Effects on Health in Hindi: 5 जून को हर साल दुनिया में ‘विश्व पर्यावरण दिवस 2021’ (World Environment Day 2021) मनाया जाता है। इस दिन सभी स्कूल-कॉलेज, सरकारी और गैर सरकारी संस्थाएं बहुत बड़े स्तर पर लोगों को पर्यावरण को बचाने, पेड़-पौधे लगाने और पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाले तत्वों और स्वास्थ्य पर पड़ने वाले असर के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए रैली, रोड शो, सेमिनारों का आयोजन करते हैं। 'विश्व पर्यावरण दिवस' पर जानें कि कैसे बिगड़ते पर्यावरण संतुलन का हमारे सेहत और विश्व पर नकारात्मक असर पड़ता है।

प्रत्येक वर्ष विश्व पर्यावरण दिवस का एक थीम होता है, जो विशेष रूप से पर्यावरणीय चिंता की ओर ध्यान आकर्षित करता है। इस वर्ष इस दिवस की थीम रखी गई है 'रीइमैजिन, रीक्रिएट, रीस्टोर' (Reimagine, Recreate, Restore)। इस दिन किस तरह पर्यावरण से संबंधित चुनौतियों का सामना किया जाए, उसे कम करने के सफल और सार्थक प्रयास किए जाएं जैसे विषयों पर कई जागरूकता अभियान चलाए जाते हैं।

बिगड़ते पर्यावरण संतुलन का सेहत पर असर

1 बिगड़ते पर्यावरण संतुलन, जलवायु परिवर्तन और बढ़ते औद्योगिककरण (Industrialization) की वजह से शुद्ध हवा में कमी आना, जिससे अस्थमा, सांस की बीमारी होना और फेफड़ों संबंधी बीमारी का खतरा बढ़ जाता है।

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2 पेड़ों की कटाई और नदियों, तालाब और जलाशयों के तेजी से सूखने पर शुद्ध पीने के पानी में भारी गिरावट आना। इसके साथ भूमिगत जल स्तर में भी बड़े स्तर पर गिरावट आना। लोगों के दूषित पानी पीने से गंभीर बीमारियों का खतरा (Environment Side Effects on Health in Hindi) बढ़ रहा है।

3 बिगड़ते पर्यावरण संतुलन, जलवायु परिवर्तन की वजह से बारिश कम हो गई है, जिससे खाने-पीने की चीजों को उगाने के लिए बढ़े स्तर पर केमिकल्स का उपयोग होने लगा है, जो कि गंभीर बीमारियों का खतरा बनती हैं।

4 बढ़ते औद्योगिकीकरण और जनसंख्या वृद्धि की वजह से संसाधनों की कमी होने से भुखमरी और कुपोषण की समस्या (Environment Side Effects in Hindi) का महामारी का रूप लेना।

5 बिगड़ते पर्यावरण संतुलन और जलवायु परिवर्तन की वजह से नई-नई बीमारियों (जीका वायरस, डेंगू, चिकनगुनिया) का आदि का उत्पन्न होना।

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