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डायबिटीज और ह्रदय रोग का एक-दूसरे से गहरा रिश्ता है। अगर आपको डायबिटीज है तो आपको ह्रदय रोग एवं स्ट्रोक का खतरा दोगुना बन जाता है, उस व्यक्ति के मुकाबले जिसे डायबिटीज नहीं है। डायबिटीज के रोगी में सबसे आम ह्रदय रोग हमेशा कोरोनरी आर्टरी (Coronary Artery) का ही होता है। इसमें ह्रदय तक खून पहुंचाने वाली धमनियों में कोलेस्ट्रॉल जमा होने लगता है जिससे वे सख्त होने लगती हैं और उनमें ब्लॉकेज बनने लगते हैं। इसकी बदौलत एंजिना और सीने में दर्द होने लगता है जो कोरोनरी धमनियों के रोग का साफ लक्षण है। अगर इसमें से एक भी धमनी एकाएक ब्लॉक हुई तो वह हार्ट अटैक का कारण बनती है।
अध्ययन से पता चला है कि डायबिटीज के मरीजों में कोरोनरी धमनियों के रोग का प्रतिशत सर्वाधिक होता है। भले ही लक्षण ना दिखाई दें फिर भी डायबिटीज के 70% मरीजों को थोड़े या बड़े पैमाने पर ब्लॉकेज होते ही हैं। शेष 30% मरीजों में तो काफी ब्लॉकेज होते हैं।
मुंबई के एशियन हार्ट इंस्टीट्यूट के सीनियर कार्डियालॉजिस्ट डॉ. संतोष कुमार डोरा कहते हैं, "डायबिटीज की वजह से कोरोनरी धमनियों में कोलेस्ट्रॉल तो जमा होते ही हैं, साथ ही इसकी वजह से उच्च रक्तचाप (हाइपरटेंशन) और डिसलिपिडेमिया का पैमाना भी काफी बढ़ जाता है। इनका आंतरिक संबंध की वजह से कोरोनरी धमनियों के रोग में भी उसी स्तर से वृद्धि हो जाती है।"
1- डायबिटीज के मरीज को हमेशा संतुलित आहार, कसरत और अगर जरुरी हो तो दवा से हमेशा नियंत्रण में रखना चाहिए। डायबिटीज के मरीजों को हमेशा स्वस्थ आहार लेने चाहिए जिसमें कार्बोहाइड्रेट और चर्बी की मात्रा कम हो। सलाह तो यही होगी कि ऐसे रोगियों को अपने समुचित आहार की योजना किसी डायटीशियन की मदद से तैयार करनी चाहिए।
2- डायबिटीज के मरीजों को पैदल चलने/साइकिल चलाने/तैराकी जैसी एक्सरसाइज प्रतिदिन निरंतर रुप से कम से कम 30 से 45 मिनट तक जरुरी करनी चाहिए। ऐसे रोगियों को धूम्रपान से सख्त परहेज करना चाहिए लेकिन अगर उन्हें डायबिटीज के साथ ही साथ उच्च रक्तचाप भी है तो इस पर विशेष ध्यान देना बेहद जरूरी है।
3- अक्सर डायबिटीज के मरीजों को लिपिड को कम करने वाली दवाइयां दी जाती हैं जिससे उनके रक्त का लिपिड नियंत्रण में रखा जाए। ऐसे रोगियों की वार्षिक स्वास्थ चेकअप में कार्डियक स्क्रीनिंग को अवश्य शामिल करना चाहिए जिसमें इकोकार्डियोग्राफी और स्ट्रेस टेस्ट का समावेश होता है।
4- डायबिटीज के वे मरीज जिनमें ह्रदयरोग के लक्षण सबसे अधिक हों उन्हें सीटी कोरोनरी कैल्शियम के स्कोर और सीटी कोरोनरी एंजियोग्राम जरुर करवाने चाहिए जिससे किसी भी ब्लॉकेज का पहले ही पता लगाया जा सके। इन ब्लॉकेज का समय रहते पता चलने पर उनके बढ़ने और हार्ट अटैक दूर करने के समुचित कदम उठाए जा सकते हैं।
ये ऐसे आवश्यक और सही कदम हैं जिनके सहारे डायबिटीज के मरीजों में ह्रदय रोग को रोका जा सकता है।
नोट: यह लेख मुंबई के एशियन हार्ट इंस्टीट्यूट के सीनियर कार्डियालॉजिस्ट डॉ. संतोष कुमार डोरा से हुई बातचीत पर आधारित है।