World Diabetes Day 2021: कोरोना से ठीक होने के बाद डायबिटीज से ग्रसित हुए 25 फीसदी मरीज, इससे दूसरी बीमारियों का बढ़ा खतरा

World Diabetes Day 2021: डायबिटीज़ में हाई ब्लड शुगर का अगर इलाज न किया जाए तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं, इससे तंत्रिकाओं, किडनी, आंखों एवं अन्य अंगों को नुकसान पहुंच सकता है।

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Written By: Atul Modi | Published : November 13, 2021 12:21 PM IST

कोविड-19 एक वायरल इन्फेक्शन है, जो शरीर में कई तरह के इन्फ्लामेटरी रिएक्शन पैदा करता है। जिन लोगों में कोविड-19 के मध्यम से गंभीर लक्षणों का इतिहास रहा है, आज उनमें कई नई बीमारियां देखी जा रही हैं। जैसे हाइपाॅक्सिया, कमज़ोरी, वज़न में कमी, बाल गिरना, मायोकार्डिटिस, थाॅयराइड और डायबिटीज़ (सबसे आम बीमारियों में से एक)। दुनिया भर में किए गए अध्ययनों में पाया गया है कि कोविड-19 से ठीक हुए मरीज़ों में डायबिटीज़ के नए मामले देखे जा रहे हैं।

कोरोना संक्रमण के बाद 25 फीसदी मरीज़ों को हुआ डायबिटीज

इन्द्रप्रस्थ अपोलो हाॅस्पिटल्स द्वारा पिछले 2 वर्षों में कोरोना संक्रमण के दुष्प्रभावों पर किये गए अध्ययन में कई बातें सामने आई हैं। डाॅ सुभाष कुमार, वांगनू, सीनियर कन्सलटेन्ट, एंडोक्राइनोलोजिस्ट एवं डायबेटोलोजिस्ट ने कहा, ‘‘पिछले दो सालों के दौरान हमारी ओपीडी के आंकड़े दर्शाते हैं कि जिन मरीज़ों में कोविड-19 इन्फेक्शन की पुष्टि हुई थी, उनमें से 25 फीसदी मरीज़ों में डायबिटीज़ के नए मामले पाए गए हैं, इसी तरह कोविड-19 इन्फेक्शन से ठीक हो चुके 10 फीसदी मरीज़ों में हाइपरग्लाइसेमिया के मामले दर्ज किए गए हैं। कोविड के जिन मरीज़ों में पहले से डायबिटीज़ था, उनमें से 60 फीसदी से भी अधिक मामलों में मरीज़ों का ग्लाइसेमिक स्टेटस और खराब हो गया है, इन मरीज़ों में ऐसी स्थिति 3 महीनों से ज़्यादा समय के लिए रही है।’’

कोरोना से ठीक होने के बाद क्‍यों बढ़े डायबिटीज के मरीज

डायबिटीज अपने आप में प्रो-इनफलामेटरी अवस्था है, जिसमें कोविड-19 के साथ इन्फ्लामेटरी प्रतिक्रिया की संभावना बढ़ जाती है, जिससे ब्लड शुगर में उतार-चढ़ाव आ सकते हैं। कोविड-19 के जिन मरीज़ों को पहले से डायबिटीज़ था उनके ब्लड शुगर बहुत ज़्यादा असामान्य स्तर तक पहुंच गया। स्टेराॅयड के उपयोग, कोविड-19 के गंभीर लक्षणों के चलते इन मरीज़ों के ब्लड शुगर पर और भी ज़्यादा असर हुआ। इसके अलावा कई मामलों में कोविड के चलते तनाव के कारण HbA1c सामान्य से बहुत अधिक हो गया। तो कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि कोविड-19 के कारण डायबिटीज़ की नई शुरूआत हुई है।

डायबिटीज़ में हाई ब्लड शुगर का अगर इलाज न किया जाए तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं, इससे तंत्रिकाओं, किडनी, आंखों एवं अन्य अंगों को नुकसान पहुंच सकता है।

डायबिटीज से कैसे करें बचाव

अध्ययनों से यह भी पता चला है कि पश्चिमी आबादी की तुलना में भारतीयों में डायबिटीज़ 15 साल पहले हो जाता है। इसके कई कारण हैं जैसे ज़्यादा कैलोरी से युक्त आहार, खाने पीने की गलत आदतें और गतिहीन जीवनशैली। इसलिए जिन लोगों में कोविड-19 के गंभीर लक्षण थे, और उन्हें स्टेराॅयड दवाएं भी दी गईं, उन्हें अपने ब्लड शुगर पर नियमित रूप से निगरानी रखनी चाहिए। इसके अलावा डायबिटीज़ के बढ़ते मामलों को देखते हुए सलाह दी जाती है कि व्यायाम करें, खाने पीने की अच्छी आदतें अपनाएं और नियमित रूप से प्रीवेन्टिव हेल्थ चैकअप कराते रहें।

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