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World dengue day: देश के कई शहरों में तेजी से बढ़ रहा डेंगू समेत कई बीमारियों का खतरा, एक्सपर्ट्स ने किया सावधान

विश्व डेंगू दिवस: इस मौसम में भी डेंगू समेत कई बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है, जिससे समय रहते बचाव करने और बीमारियों की पहचान करने के लिए ब्लड टेस्ट (CBC) टेस्ट कराना जरूरी है।

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Written By: Mukesh Sharma | Published : May 16, 2025 7:58 AM IST

Dengue day 2025: मानसून के मौसम में वायरल बुखार के मामले तेजी से बढ़ते हैं। इसका कारण है मौसम में बदलाव, चारों ओर पानी का जमा होना और साफ-सफाई की कमी। पिछले कुछ दिनों से अचानक बारिश होने के कारण वायरल बुखार के मामले बढ़ते जा रहे हैं। बच्चे, बुजुर्गों लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होने के कारण यह लोग इसके शिकार हो रहे हैं। पिछले कुछ दिनो से अचानक होने वाली बारिश के कारण वायरल बुखार के मामले बढ़ते दिखाई दे रहे हैं। मानसून में नमी और पानी जमा होने से मच्छर भी बढ़ जाते हैं, जिससे बीमारियां फैलने लगती हैं। १० से ६५ साल की उम्र के लोग इससे पीड़ित हो रहे हैं। अगर बुखार की जल्दी जांच और इलाज किया जाए, तो डिहाइड्रेशन, कमजोरी, और लंबे समय तक बीमारी से बचा जा सकता है।

वायरस से होने वाली बीमारियों का ज्यादा खतरा

वायरल फीवर वायरस जनित संक्रमणों के कारण होता है। यह वायरस हवा (खांसी, छींक), दूषित पानी, भोजन या मच्छरों के काटने से फैल सकते हैं। आम वायरस में फ्लू वायरस, डेंगू, चिकनगुनिया और एडिनोवायरस शामिल हैं। इसके लक्षणों में तेज बुखार (अक्सर 100°F से ऊपर), सिरदर्द और बदन दर्द, ठंड लगना और पसीना आना, थकान और कमजोरी, गले में खराश या खांसी, और भूख में कमी शामिल हैं। सही इलाज न होने पर यह डिहाइड्रेशन, अंगों पर दबाव या डेंगू हेमरेजिक फीवर और निमोनिया जैसी जटिलताओं का कारण बन सकता है।

समय पर जांच कराना क्यों जरूरी

कोलकाता स्थित अपोलो डायग्नोस्टिक ईस्ट झोन के झोनल टेक्निकल चीफ डॉ. अभिक बनर्जी ने कहा कि, “हम इस मानसून में वायरल फीवर के मामलों में भारी वृद्धि देख रहे हैं। समय पर जांच करने से आगे की जटिलताओं को रोका जा सकता हैं। अधिकतर मामलों में शारीरिक जांच और कुछ रक्त परीक्षण से संक्रमण की प्रकृति का पता लगाया जा सकता है। बुखार, बदन दर्द और थकान जैसे लक्षणों की समीक्षा कर डॉक्टर परीक्षण सुझाते हैं। कम्प्लीट ब्लड काउंट (CBC), डेंगू NS1, IgM और PCR द्वारा रेस्पिरेटरी वायरल पैनल जैसे परीक्षण की सिफारिश की जा सकती है। इससे वायरल संक्रमण की पुष्टि होती है और अनावश्यक एंटीबायोटिक के प्रयोग से बचा जा सकता है। समय पर निदान से ही उचित इलाज तय किया जा सकता है।”

दवाओं के गलत इस्तेमाल से बचना जरूरी

डॉ. बनर्जी ने आगे कहा कि, “वायरस की पहचान जल्दी हो जाने से लक्षणों को बेहतर तरीके से नियंत्रित किया जा सकता है और एंटीबायोटिक्स के गलत इस्तेमाल से बचा जा सकता है। अधिकांश वायरल फीवर के मामलों में एंटीबायोटिक्स की जरूरत नहीं होती। इलाज में भरपूर आराम, पानी पीना और बुखार कम करने की दवाएं शामिल होती हैं। गंभीर मामलों में अस्पताल में भर्ती की जरूरत पड़ सकती है। सड़क किनारे का खाना खाने से बचें, दूषित पानी न पिएं, अपने आसपास की जगह को साफ और सूखा रखें, मच्छर भगाने वाली क्रीम और मच्छरदानी का उपयोग करें, नियमित रूप से हाथ धोएं और अगर बुखार एक दिन से अधिक बना रहे तो डॉक्टर से परामर्श लें। वायरल फीवर मानसून में आम है, लेकिन साफ-सफाई और समय पर इलाज से इसे सुरक्षित और प्रभावी ढंग से नियंत्रित किया जा सकता है।”

अस्वीकरण: प्रिय पाठकों यह आर्ट‍िकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।