
मुकेश शर्मा
मुकेश शर्मा दिल्ली यूनिर्विसिटी से जर्नलिज्म डिग्री होल्डर हैं और पिछले 8 साल से Health Journalism से जुड़े हुए ... Read More
Written By: Mukesh Sharma | Updated : November 19, 2025 9:00 PM IST
Chronic Obstructive Pulmonary Disease Treatment: आज के समय में यंग जनरेशन के बीच भी स्मोकिंग का क्रेज बढ़ता जा रहा है। इस कारण से फेफड़ों से जुड़ी कई गंभीर समस्याएं बढ़ रही हैं। सीओपीडी यानी क्रोनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज भी इनमें से एक है, जिसके बारे में बहुत ही कम लोगों को जानकारी है। डॉ. बोरनाली दत्ता, डायरेक्टर, रेस्पिरेटरी और स्लीप मेडिसिन, मेदांता गुरुग्राम के अनुसार सीओपीडी का इलाज का इलाज अभी तक मुख्य रूप से दो तरह की दवाओं से होता रहा है जिनमें ब्रोंकोडाईलेटर्स और स्टेरॉयड दवाएं शामिल हैं। ब्रोंकोडाईलेटर्स मेडिसिन सांस की नलियों को खोलने का काम करती हैं और स्टेरॉयड सूजन कम करने का काम करती हैं। इनसे राहत तो मिलती है, पर ये सिर्फ लक्षणों को ही कंट्रोल कर सकती हैं। इन दवाओं की मदद से बीमारियों को कंट्रोल नहीं किया जा सकता है और न ही फेफड़ों में हो रहे डैमेज को रोका जा सकता है।
भारत की बात में 3 करोड़ से अधिक मरीज इससे पीड़ित हैं और यह दुनिया भर में मृत्यु के प्रमुख कारणों में से एक है। इन ट्रीटमेंट ऑप्शन के बावजूद भी कई मरीजों को बार-बार इसके एपिसोड्स आते हैं। मेडिकल साइंस इस बीमारी पर अभी तक रिसर्च कर रही है और सही ट्रीटमेंट को पता करने की कोशिश कर रही है।
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सीओपीडी का सही और प्रभावी ट्रीटमेंट पता लगाने के लिए लगातार रिसर्च की जा रही हैं और सफल इलाज ढूंढने की कोशिश की जा रही है। ऐसे में 'प्रिसिजन मेडिसिन' एक बड़ी उम्मीद है। विशेषज्ञ मानते हैं कि सीओपीडी एक बीमारी नहीं ,बल्कि कई अलग-अलग प्रकारों का समूह है। भविष्य में, जेनेटिक टेस्ट, इमेजिंग टेस्ट और बायोमार्कर जैसे आधुनिक टेस्ट से इन प्रकारों की पहचान की जाएगी, ताकि हर मरीज के लिए सबसे प्रभावी और व सही इलाज चुना जा सके। ‘सबके लिए एक ही तरह के इलाज के बजाय अब व्यक्तिगत देखभाल पर जोर दिया जाएगा। खास सेल्स को निशाना बनाने वाली दवाओं का इस्तेमाल किया जाएगा, जिसे टारगेटेड बायोलॉजिक्स या टारगेटेड मेडिसिन कहा जाता है।
अस्थमा के लक्षण की तरह, सीओपीडी के कुछ लक्षण भी होते हैं और उसकी तरह ही सीओपीडी के कुछ खास मरीजों के लिए 'बायोलॉजिकल' नामक नई दवाएं बन रही हैं। ये शरीर में सूजन के खास तरीके से सेल्स को निशाना बनाती हैं। उदाहरण के लिए, ये इओसिनोफिल एक तरह की वाइट ब्लड सेल्स से होने वाली सूजन को कम करती हैं। रिसर्च के अनुसार पाया गया है कि ये दवाएं स्टेरॉयड से ज्यादा सटीक काम करती हैं, जिससे पूरे शरीर पर होने वाले साइड इफेक्ट कम होते हैं।
पहले के ट्रीटमेंट सिर्फ लक्षणों को कंट्रोल करने व मरीज को आराम प्रदान के रूप में काम करते थे। लेकिन नए ट्रीटमेंट की मदद से खराब हो चुके फेफड़ों के हिस्से को ठीक करना और उनकी कार्य क्षमता को फिर से बढ़ाने पर काम किया जा रहा है। वैज्ञानिक इस पर लगातार काम कर रहे हैं । वे स्टेम सेल से ट्रीटमेंट थेरेपी व नई दवाएं खोज रहे हैं , जिनका मकसद सेल्स को फिर से बनाना या फेफड़ों को हुए नुकसान को कम करना है।
अस्वीकरण: प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।