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Symptoms of Skin Cancer: हर साल 4 फरवरी को पूरी दुनिया वर्ल्ड कैंसर डे मनाया जाता है। इसका उद्देश्य कैंसर की बीमारी को फैलने से रोकने और लोगों को इस गम्भीर बीमारी के प्रति जागरूक करना है। आंकड़ों के अनुसार हर साल भारत सहित दुनियाभर में लाखों लोगों की मृत्यु कैंसर की वजह से हो जाती है। कैंसर कई तरह का होता है और त्वचा से जुड़ा कैंसर भी एक आम प्रकार का कैंसर है। हालांकि, पश्चिमी देशों की तुलना में भारत में स्किन कैंसर के मरीजों की संख्या कम ही देखी जाती है। वहीं भारत के उत्तर-पूर्व के क्षेत्रों (हिमालय के आसपास के इलाकों) में ही अधिकांश स्किन कैंसर के मामले पाए जाते हैं। इस लेख में आप पढ़ेंगे स्किन कैंसर के कारण, लक्षण और इससे बचाव के उपायों के बारे में।
त्वचा की सेल्स जब पुरानी हो जाती हैं तो वे नष्ट हो जाती हैं और उनकी जगह नयी सेल्स उत्पन्न होने लगती हैं। लेकिन, त्वचा का कैंसर होने पर स्किन के टिश्यूज के भीतर सेल्स तो बनती हैं लेकिन ये असामान्य गति से बनती हैं और बढ़ने लगती हैं। स्किन कैंसर अक्सर शरीर के उन हिस्सों की त्वचा पर होता है जो धूप के सीधे सम्पर्क में आती हैं। इसीलिए, हाथों-पैरों, गर्दन और चेहरे की त्वचा पर कैंसर होने का रिस्क अधिक होता है क्यों इन अंगों की स्किन पर सीधी धूप पड़ती है। हालांकि, कुछ मामलों में स्किन कैंसर शरीर के उन हिस्से में भी देखा जाता है जो सूरज की किरणों के सम्पर्क में नहीं आतीं। स्किन कैंसर के अन्य कारण ये भी हो सकते हैं-
जी हां, कई स्टडीज में ऐसा पाया गया है कि गोरी स्किन वाले लोगों में मेलेनिन की मात्रा कम होती है जो पिगमेंटेशन की प्रक्रिया में सक्रिय भूमिका निभाता है। पिगमेंटेशन की कमी के चलते त्वचा रोग का खतरा बढ़ सकता है।
जिन लोगों की स्किन धूप से झुलस जाती है या जिन्हें सनबर्न जैसी समस्याएं होती रहती हैं उनमें स्किन कैंसर का रिस्क अधिक होता है।
रोग-प्रतिरोधक शक्ति कम होने से भी स्किन कैंसर का खतरा बढ़ सकता है।
जेनेटिक्स की वजह से भी लोगों में स्किन कैंसर का रिस्क बहुत अधिक देखा जाता है।
आमतौर पर त्वचा के कैंसर के ये 3 प्रकार होते हैं-
डॉ. राधेश्याम नाइक (Dr. Radheshyam Naik, Consultant, Sammprada Hospital, Bengaluru) का कहना है कि, नियमित हेल्थ चेकअप्स और स्क्रिनिंग की मदद से 70% से अधिक प्रकार के कैंसर रोके जा सकते हैं और इनसे बचा जा सकता है। जब कैंसर के लक्षणों को जल्दी पकड़ लिया जाता है तो इससे बीमारी का इलाज आसान, कम खर्चीला और कम-नुकसानदायक भी हो सकता है। लेकिन, भारत में अधिकांश मामलों में कैंसर का पता एडवांस स्टेज पर ही चल पाता है जिसकी वजह से कैंसर का इलाज भी जटिल हो सकता है। ऐसे में अधिकांश मामलों में कैंसर का इलाज करने से कुछ समय के लिए राहत मिल सकती है और व्यक्ति कुछ वर्ष अधिक जी लेता है लेकिन इस तरह की स्थिति में कैंसर को पूरी तरह खत्म नहीं किया जा सकता।
कैंसर के लक्षणों की पहचान के लिए रेग्यूलर हेल्थ चेकअप कराना चाहिए। कैंसर की गम्भीरता के आधार पर डॉक्टर इन तरीकों की मदद ले सकते हैं-