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वर्तमान में भले ही कैंसर का पूरा इलाज उपलब्ध है लेकिन आज भी अगर कोई कैंसर शब्द सुनता है तो उन्हें इसका इलाज नामुमकिन ही लगता है। इसके मुख्य कारणों में अनभिज्ञ होना, जागरुकता की कमी और अच्छे डॉक्टरों का अभाव शामिल हो सकता है। वैसे तो भारत में ब्रेस्ट कैंसर, ओरल कैंसर और सर्वाकिल कैंसर बहुत कॉमन है लेकिन हार्ट कैंसर भी ऐसा कैंसर है जिसकी चपेट में लोग आते हैं। हो सकता है इस कैंसर के बारे में पढ़कर आप लोग हैरान हो रहे हो; वैसे होना जायज भी है क्योंकि यह एक रेयर कैंसर का प्रकार है। 4 फरवरी को विश्व कैंसर दिवस (World Cancer Day) मनाया जाता है और आज इस मौके पर हम इस आर्टिकल के माध्यम से जानेंगे कि हार्ट कैंसर क्या होता है, यह कितना कॉमन है और इसके लक्षण कैसे दिखते हैं।
मुंबई के एशियन हार्ट इंस्टीट्यूट में सीनियर इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. अभिजीत बोरसे कहते हैं कि, ''हार्ट का कैंसर होना बहुत रेयर है। ऐसा इसलिए है क्योंकि आपके हृदय की मांसपेशियों की कोशिकाओं (कार्डियोमायोसाइट्स) में गुणा करने और पुनर्जीवित होने की सीमित क्षमता होती है। शरीर की अन्य कोशिकाओं के विपरीत, वे आमतौर पर क्षतिग्रस्त या खोई हुई कोशिकाओं को बदलने के लिए कोशिका विभाजन से नहीं गुजरते हैं।''
ज्यादातर हृदय ट्यूमर गैर-घातक (सौम्य) होते हैं, जो आमतौर पर बाई धमनी में पाए जाते हैं। इन्हें मायक्सोमा कहा जाता है और इन्हें सांस लेने में तकलीफ, घबराहट और सीने में दर्द जैसे लक्षणों से पहचाना जाता है। भले ही यह ज्यादा खतरनाक नहीं होते हैं लेकिन इनका पता चलते ही तुरंत डॉक्टर से मिलना चाहिए और तुरंत इलाज कराना चाहिए। क्योंकि मायक्सोमा रक्त प्रवाह में बाधा डाल सकता है, जिससे स्ट्रोक या दिल की विफलता जैसी जटिलताएं हो सकती हैं, इसलिए सर्जरी इसके इलाज का सबसे पहला कदम होता है।
1: एंजियोसारकोमा (Angiosarcoma) : यह दुर्लभ घातक बीमारी रक्त वाहिकाओं में उत्पन्न होती है, जिससे हृदय की कार्यक्षमता खराब होती है। इस हार्ट कैंसर की वजह से मरीज की जान भी जा सकती है।
2: लिंफोमा (lymphoma) : कुछ प्रकार के लिंफोमा, विशेष रूप से गैर-हॉजकिन लिंफोमा, हृदय और आसपास की संरचनाओं में बदलाव कर सकते हैं। जिसके चलते हार्ट में सूजन, अनियमित दिल की धड़कन और हृदय विफलता हो सकती है।
3: मेटास्टैटिक कैंसर (Metastatic Cancer) : इस प्रकार का कैंसर हार्ट से शरीर के अन्य अंगों तक पहुंच सकता है। फेफड़े, ब्रेस्ट और एसोफेगस इनसे प्रभावित हो सकते हैं। जिसके चलते हार्ट के फंक्शन और इसके पूर्वानुमान में दिक्कतें आ सकती हैं।
कैंसर और हृदय रोग दोनों से जुड़े चेतावनी संकेतों और लक्षणों के बारे में जागरूक होना महत्वपूर्ण है। तेजी से वजन घटना, लगातार खांसी, सीने में दर्द, सांस की तकलीफ और घबराहट आदि ऐसे लक्षण हैं जो बताते हैं कि आपको बिना देर किए डॉक्टर से मिलना चाहिए। इस स्थिति में यदि आप तुरंत डॉक्टर से मिलते हैं तो आपका सफल इलाज होने में काफी हद तक मदद मिल सकती है। कैंसर की दुर्लभता के बावजूद, एंजियोसारकोमा को वयस्कों में हृदय का सबसे आम प्राथमिक घातक ट्यूमर माना जाता है। दुर्भाग्य से, हृदय के कैंसर का निदान अक्सर उन्नत चरण में किया जाता है जब ट्यूमर पहले से ही हृदय से काफी दूर मेटास्टेसिस कर चुका होता है, जिससे उपचार चुनौतीपूर्ण हो जाता है और रोग का निदान सही तरह से नहीं हो पाता है। इकोकार्डियोग्राफी, एमआरआई और सीटी स्कैन जैसी इमेजिंग स्टडी आमतौर पर बीमारी को जल्दी पकड़ने और सफल इलाज में मदद करती हैं।
• हृदय और कैंसर दोनों ही नॉन कम्युनिकेबल डिजीज हैं।
• हृदय के ट्यूमर अत्यंत दुर्लभ हैं।
• अधिकांश हृदय ट्यूमर गैर-कैंसरयुक्त (माइक्सोमा) होते हैं।
• कैंसरग्रस्त कोशिकाएं डिफेक्टिव कोशिकाएं होती हैं।
• हृदय की मांसपेशियों की कोशिकाएं बढ़ती नहीं हैं, यही कारण है कि हृदय कैंसर दुर्लभ (एंजियोसार्कोमा) होता है।
• प्रदूषण और तनाव - दोनों हृदय रोगों और कैंसर का कारण बन सकते हैं।
डॉक्टर अभिजीत बोरसे कहते हैं एक साल में मैनें हार्ट कैंसर के 3-4 से ज्यादा मामले नहीं देखे। हालांकि, यह कैंसर का रेयर प्रकार है लेकिन अस्पष्ट लक्षणों के कारण, हृदय के एंजियोसार्कोमा का शीघ्र पता लगाने का पूरा प्रयास किया जाना चाहिए।