
रश्मि उपाध्याय
रश्मि उपाध्याय साल 2014 से मीडिया क्षेत्र से जुड़ी हैं और TheHealthSite.Com में बतौर एडिटर काम कर रही हैं। इन्हें ... Read More
Written By: Rashmi Upadhyay | Published : February 3, 2021 1:26 PM IST
बच्चों में कैंसर (Cancer in Children) के इलाज में हुई देरी के कारण उनके कैंसर की स्टेज 2 और स्टेज 3 में आने की संभावना काफी बढ़ गई है।
कैंसर भले ही एक गंभीर बीमारी है लेकिन यह लाइलाज नहीं है। हालांकि यह तभी संभव है जब कैंसर के लक्षणों को शुरुआती स्टेज में ही पहचानकर डॉक्टर से संपर्क किया जाए। हर साल 4 फरवरी को विश्व कैंसर दिवस (World Cancer Day) मनाया जाता है। ताकि लोगों को कैंसर के कारण, कैंसर के लक्षण, कैंसर के इलाज और कैंसर से बचाव के बारे में जागरुक किया जा सके। अक्सर कैंसर के मरीजों की मौत इसलिए होती है क्योंकि उन्हें इस बारे में तब पता चलता है जब वह कैंसर की गंभीर स्टेज में पहुंच जाते हैं। यदि कैंसर के लक्षणों को शुरुआती स्टेज में ही पहचानकर जांच शुरू की जाए तो कैंसर को मात दे पाना संभव है। एडल्ट और व्यस्क लोग तो फिर भी अपने शरीर में हो रही हलचल को पहचानकर डॉक्टर से संपर्क कर सकते हैं, लेकिन बच्चों के मामलों में ऐसा हो पाना थोड़ा मुश्किल होता है। हाल ही में इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल के डॉक्टर के अनुसार बच्चों में कैंसर (Cancer in Children) की स्टेज 2 और स्टेज 3 के मामलों में स्पाइक आ सकता है। साथ ही आने वाले समय में 15 साल से छोटे बच्चे भी कैंसर का शिकार हो सकते हैं। सिर्फ यही नहीं अपोलो अस्पताल के डॉक्टर का यह भी कहना है कि पिछले 6 महीनों में कैंसर से जूझ रहे बच्चों में कैंसर की पहचाने करने और उसके इलाज में देरी हुई है। हालांकि इसके पीछे कोरोना वायरस भी एक कारण हो सकता है।
अगर आप ये समझते हैं कि कैंसर सिर्फ बड़ों को होता है तो शायद आप गलत हैं। बच्चे भी बड़ी संख्या में कैंसर से पीड़ित होते हैं। इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल के डॉक्टर्स का कहना है कि पिछले कुछ समय में बच्चों में कैंसर के शुरुआती लक्षणों की पहचान करने और इलाज करने में देरी हुई है। ऐसे में बच्चों का कैंसर (Cancer in Children) की स्टेज 2 और स्टेज 3 में आने की संभावना बढ़ सकती है।
एक्सपर्ट्स का कहना है कि बच्चों में कैंसर के शुरुआती लक्षणों की पहचान न हो पाने और कैंसर से जूझ रहे बच्चों के इलाज में देरी होने के पीछे कोरोना वायरस एक कारण हो सकता है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कैंसर और ब्लड डिस्ऑर्डर (Blood Disorders) जैसी गंभीर बीमारियों से जूझ रहे बच्चे पिछले 10 महीनों से इलाज से दूर हैं। साथ ही बच्चों के माता-पिता भी अपने बच्चों को अस्पतालों में कैंसर की देखभाल और प्रबंधन की आवश्यकता के लिए अतिरिक्त आशंकित हो गए हैं। कोरोना के प्रकोप के कारण पिछले कुछ महीनों में पेरेंट्स ने भी बच्चों में न चाहते हुए कैंसर के लक्षणों की अनदेखी की है। हालांकि अस्पतालों में कोरोना के मरीजों की भारी संख्या भी बच्चों में कैंसर का इलाज समय पर न हो पाने के लिए जिम्मेदार है।
बच्चों में कैंसर (Cancer in Children) के इलाज में हुई देरी के कारण उनके कैंसर की स्टेज 2 और स्टेज 3 में आने की संभावना काफी बढ़ गई है। हर साल 18 वर्ष की उम्र से कम के करीब 60,000 बच्चे कैंसर के शिकार होते हैं। जिसमें से मृत्यु दर काफी अधिक है। लेकिन पिछले वर्ष में COVID-19 के कारण बच्चों में कैंसर की पहचान, इलाज और थेरेपी देने में देरी हुई है।
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