World Cancer Day 2023: नाक से खून निकलना खून के कैंसर (Leukemia) का है संकेत, जानिए ल्यूकेमिया के बारे में सबकुछ
World Cancer Day 2023: कुछ प्रकार के ब्लड कैंसर ऐसे होते हैं जिनके लक्षण बहुत देर से दिखाई देते हैं ऐसे में जरूरी है कि आप एक्सपर्ट की सलाह लें।
ब्लड कैंसर (खून का कैंसर) जिसे ल्यूकेमिया (Leukemia) भी कहा जाता है जो बेहद ही खतरनाक हो सकता है। ब्लड कैंसर मुख्य रूप से वाइट ब्लड सेल्स (सफेद रक्त कोशिकाएं) को प्रभावित करता है। इसमें शरीर सफेद रक्त कोशिकाओं का निर्माण ठीक तरह से नहीं कर पाता है। वाइट ब्लड सेल्स शरीर को बीमारियों से बचाने में बड़ी भूमिका होती है। यही वजह है कि ल्यूकेमिया को गंभीर माना गया है। 4 फरवरी, विश्व कैंसर दिवस (4 February, World Cancer Day 2023) के मौके पर कैंसर एक्सपर्ट के माध्यम से जानेंगे कि खून का कैंसर या ब्लड कैंसर (Blood Cancer) होता क्या है, ब्लड कैंसर के प्रकार, लक्षण और कारण क्या हैं?
खून का कैंसर या ब्लड कैंसर क्या है - (What is Blood Cancer Or Leukemia in Hindi)
शारदा अस्पताल में डायरेक्टर और सीनियर कंसल्टेंट (डिपार्टमेंट ऑफ ऑनकोलॉजी) डॉक्टर अनिल ठकवानी के अनुसार, शरीर के अलग-अलग हिस्सों में होने वाले कैंसर को विभिन्न नामों से जाना जाता है। जब कैंसर रक्त को प्रभावित करता है तो उसे खून का कैंसर या ल्यूकेमिया (Leukemia) के नाम से जाना जाता है। ल्यूकेमिया खून बनाने वाले ऊतकों का एक प्रकार का कैंसर होता है। जिसके कारण शरीर की रोगों से लड़ने की क्षमता में बाधा आने लगती है। ल्यूकेमिया ब्लड फॉर्मिंग टिश्यू में होने वाला एक प्रकार का कैंसर है जिसमें बोन मैरो भी शामिल है। ल्यूकेमिया के और भी कई प्रकार हैं जैसे- एक्यूट लिम्फोब्लास्टिक ल्यूकेमिया, एक्यूट मिलॉइड ल्यूकेमिया और क्रॉनिक लिंफोसाईटिक ल्यूकेमिया।
खून का कैंसर या ल्यूकेमिया के लक्षण - (Symptoms Of Blood Cancer Or Leukemia in Hindi)
खून का कैंसर (ल्यूकेमिया) के प्रकार के हिसाब से लक्षण हर व्यक्ति को अलग अलग देखने को मिल सकते हैं:
- बुखार होना या सर्दी लगना।
- बहुत समय तक रहने वाली थकान या कमजोरी।।
- ज्यादा बार बार और जल्दी जल्दी होने वाले इन्फेक्शन।
- वजन कम होना।
- लिम्फ नोड्स में सूजन आना, लिवर का बड़ा हो जाना।।
- आसानी से ब्लीडिंग शुरू होना या चोट लग जाना।
- बार-बार नाक से खून आना।
- स्किन में छोटे छोटे लाल दाने होना।
- बहुत ज्यादा पसीना आना और खास कर रात के समय।
- हड्डियों में दर्द होना।
खून का कैंसर (ल्यूकेमिया) का कारण - (Causes Of Blood Cancer Or Leukemia in Hindi)
डॉक्टर अनिल ठकवानी कहते हैं, "वैज्ञानिकों को ल्यूकेमिया का ठीक कारण तो अभी तक पता नहीं चल पाया है लेकिन यह माना जाता है कि यह कैंसर कई प्रकार के जेनेटिक या फिर वातावरणीय फैक्टर्स के कारण हो सकती है।"
खून का कैंसर या ल्यूकेमिया कैसे बनता है - (How is Blood Cancer Or Leukemia Formed)
स्पष्ट भाषा में ल्यूकेमिया तब बनता है जब कुछ ब्लड सेल्स में बदलाव आने लगते हैं या फिर उनके जेनेटिक मैटेरियल या डीएनए में बदलाव आ जाता है। एक सेल (कोशिका) के डीएनए में यह जानकारी होती है कि सेल को क्या करना है। सेल का डीएनए सेल को एक रेट पर बढ़ने को बताता है और उन्हें एक समय पर खत्म होने के लिए बताता है। ल्यूकेमिया में म्यूटेशन सेल को बढ़ने और विभाजित होने के लिए कहती रहती है।
ऐसा होने के बाद ब्लड सेल्स का विभाजन नियंत्रण से बाहर हो जाता है और कुछ समय बाद बोन मैरो में यह सेल्स ज्यादा होने के कारण हेल्दी सेल्स को खत्म करना शुरू कर देती हैं। इसके कारण हेल्दी व्हाइट ब्लड सेल्स, रेड ब्लड सेल्स और प्लेटलेट्स की मात्रा काफी कम होने लगती है। इसी स्टेज पर ल्यूकेमिया के लक्षण दिखना शुरू हो जाते हैं।
ल्यूकेमिया का क्लासिफिकेशन - (Classification of Leukemia In Hindi)
डॉक्टर अनिल ठकवानी इसे स्पीड और किस प्रकार की सेल्स इसमें शामिल हैं, के आधार पर विभाजित करते हैं। डॉक्टर ठकवानी के अनुसार, ल्यूकेमिया का प्रकार इस बात पर निर्भर करता है कि सेल्स (कोशिकाएं) कितनी जल्दी प्रोग्रेस कर रही हैं।
एक्यूट ल्यूकेमिया - (Acute Leukemia in Hindi)
इस ल्यूकेमिया (Leukemia) में ब्लड सेल्स इमेच्योर ब्लड सेल्स होती हैं। सेल्स अपना नॉर्मल काम नहीं कर पाती हैं। जैसे-जैसे इनका विभाजन तेजी से होता है वैसे-वैसे बीमारी की स्थिति और भी गंभीर हो जाती है। इस स्थिति में समय से उपचार होने की काफी आवश्यकता होती है।
क्रोनिक ल्यूकेमिया - (Chronic Leukemia in Hindi)
इस प्रकार के ल्यूकेमिया (Leukemia) के कई सारे प्रकार होते हैं। कई प्रकार में बहुत ज्यादा सेल्स प्रोड्यूस होती हैं और कई प्रकार में बहुत कम। इसमें मैच्योर ब्लड सेल्स शामिल होती हैं। यह काफी धीमी गति से डबल होती हैं और अपना काम भी काफी समय तक नॉर्मल तरीके से कर पाती हैं। इस प्रकार के ल्यूकेमिया में लक्षण शुरुआत में दिखते ही नहीं हैं इसलिए उपचार के बिना मरीज कई कई सालों तक रह लेता है।
ल्यूकेमिया के रिस्क फैक्टर - Blood Cancer Or Leukemia Risk Factor in Hindi
कैंसर उपचार : जिन लोगों ने पहले किसी तरह की कीमोथेरेपी या रेडिएशन थेरेपी करवाई है उन्हे इस तरह की ल्यूकेमिया का रिस्क (Leukemia Risk) ज्यादा होता है।
जेनेटिक डिसऑर्डर : डाउन सिंड्रोम जैसे जेनेटिक्स डिसऑर्डर भी इस प्रकार के कैंसर के रिस्क को थोड़ा बढ़ा देते हैं।।
कुछ केमिकल्स का एक्सपोजर : बेंजीन जैसे कुछ तरह के केमिकल्स के संपर्क में आने से भी इस प्रकार के कैंसर का रिस्क बढ़ सकता है।
धूम्रपान : धूम्रपान (Smoking) करने से भी ल्यूकेमिया का खतरा बढ़ सकता है।
पारिवारिक इतिहास : अगर परिवार के किसी व्यक्ति को ल्यूकेमिया हो जाता है तो उनके आगे की जेनरेशन को भी इस बीमारी का खतरा रहता है।
(Inputs By: Dr. Anil Thakwani, Director and Senior Consultant, Department of Oncology, Sharda Hospital, Greater Noida, UP.)