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Written By: Anshumala | Updated : February 4, 2021 10:39 AM IST
फेफड़ों के कैंसर के कारण, लक्षण और जांच।
कैंसर के कई प्रकारों में से सबसे सामान्य फेफड़ों का कैंसर (Lung cancer) है। यह दुनिया भर में कैंसर से होने वाली मौतों के लिए सबसे प्रमुख कारण भी है। यह ब्रेस्ट (Breast cancer), प्रोस्टेट और कोलन कैंसर से संयुक्त रूप से होने वाली मौतों से भी अधिक मौतों के लिए अकेले जिम्मेदार है। कैंसर से होने वाली मौतों के लगभग 70 प्रतिशत मामले निम्न तथा मध्यम अर्थव्यवस्था वाले देशों से आते हैं। इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) की एक रिपोर्ट के अनुसार, 2020 में कैंसर लगभग 8 लाख लोगों के लिए अकाल मृत्यु की वजह बन सकता है। विश्व कैंसर दिवस 2020 (World Cancer Day 2020) पर आर्टेमिस हॉस्पिटल, गुरुग्राम (Artemis Hospital) के एसोसिएट चीफ एंड सीनियर कंसलटेंट एंड थोरेसिस सर्जरी एंड सर्जिकल ऑन्कोलॉजी डॉ. परवीन यादव बता रहे हैं फेफड़ों के कैंसर के लक्षण, कारण, निदान, जांच और इलाज के बारे में सबकुछ...
1 हालांकि, धूम्रपान फेफड़ों के कैंसर के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार है, लेकिन पिछले दो दशकों में धूम्रपान ना करने वाली एक बड़ी जनसंख्या में भी इस बीमारी की पुष्टि हुई है। आंकड़ों के अनुसार, धूम्रपान ना करने वाले लोगों के बीच इस बीमारी की तीन से चार गुना की वृद्धि हुई है। यह 10 प्रतिशत से बढ़कर 40 प्रतिशत हो गया है और बहुत तेजी से बढ़ रहा है। यह धूम्रपान से होने वाले कैंसर के मामलों के बहुत नजदीक पहुंच गया है। रिपोर्ट के अनुसार 55 प्रतिशत मामलों की मुख्य वजह धूम्रपान है।
2 फेफड़ों के कैंसर के मामलों में इस अप्रत्याशित वृद्धि की एक मुख्य वजह वातावरण में बदलाव है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की एक रिपोर्ट के अनुसार, बाहरी हवा में श्रेणी-1 कार्सिनोजेन प्रचुर मात्रा में मौजूद हैं, जो कैंसर पैदा करने वाले प्रमुख कारकों में शामिल है।
3 कुछ रिपोर्ट में प्रदूषित वायु में सांस लेने की तुलना धूम्रपान से करने के बाद यह अनुमान लगाया गया कि कुछ शहरों में प्रदूषित वायु में सांस लेना प्रतिदिन 10 से 20 सिगरेट के सेवन के बराबर है। इस स्थिति की सबसे बड़ी विडम्बना ये है कि इन शहरों के निवासी प्रदूषण की इस भयावह अवस्था से बच नहीं सकते।
समान्यतया फेफड़ों के कैंसर दो प्रकार के होते हैं- स्मॉल सेल कार्सिनोमा और नॉन-स्मॉल सेल कार्सिनोमा। लगभग 85 प्रतिशत फेफड़ों के कैंसर नॉन-स्मॉल सेल टाइप के होते हैं, जिन्हें अन्य प्रकारों एडेनोकार्सिनोमा, स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा और लार्ज सेल कार्सिनोमा में वर्गीकृत किया जा सकता है। एडेनोकार्सिनोमा आमतौर पर महिलाओं और धूम्रपान ना करने वाले लोगों में पाया जाता है।
• दो सप्ताह से अधिक सूखी खांसी।
• बुखार।
• छाती में दर्द और हेमोटाइसिस (खांसी के दौरान श्वशन तंत्र से रक्त-स्त्राव)।
• बारबार सांस संबन्धित संक्रमण, सांस की तकलीफ या घरघराहट।
• थकान या भूख ना लगना।
• घबराहट, गला बैठना या वजन घटना।
49 प्रतिशत मामलों के शुरुआती दौर (स्तर-IA) में पता लग जाने पर रोगी की जीवन प्रत्याशा में 5 साल तक की वृद्धि देखी गई है। वहीं देर (स्तर-IIIB) से पता लगने पर इसकी संभावना 5 प्रतिशत तक सीमित हो जाती है।
• पेट स्कैन
• ब्रेन एमआरआई
• ईबीयूएस (ब्रोन्कोस्कोप से एंडोस्कोपिक अल्ट्रासाउंड)
• मेडियस्टिनोस्कोपी (लिम्फ नोड का नमूना लेने के लिए स्कोप को गर्दन के माध्यम से सीने में लाया जाता है) स्टेजिंग का एक तरीका है।
• सीने के एक्स-रे द्वारा रोग की जांच या पहचान एक बेहतर तरीका नहीं है क्योंकि यह शुरुआती स्तर के फेफड़ों के कैंसर का पता नहीं लगा पाता।
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धूम्रपान से दूर रहना और स्वस्थ जीवनशैली अपनाना फेफड़ों के कैंसर से बचने का सबसे बेहतर तरीका है। परीक्षण प्रोग्राम (कैंसर की पहचान एसिम्प्टमैटिक लेकिन उच्च जोखिम वाली जनसंख्या में) के बड़े शोधों (एनएलएसटी और नेल्सन परिक्षण) ने साबित किया है जांच के द्वारा फेफड़ों के कैंसर का पता शुरूआती दौर में लगाया जा सकता है। इससे जल्दी इलाज शुरू करने में मदद मिलेगी और मृत्यु दर को कम करेगा।
55 से 74 आयु वर्ग के लोग इस बीमारी को लेकर काफी संवेदनशील होते हैं। धूम्रपान के आदी व्यक्ति जैसे 30 पैक-इयर (30 साल तक एक सिगरेट पैक प्रतिदिन) से अधिक का सेवन करने वाले को सलाह दी जाती है कि वे लगातार तीन वर्षों तक लो डोज सीटी स्कैन प्रक्रिया अपनाये। इसमें वे लोग भी शामिल हैं जिन्हें धूम्रपान छोड़े 15 वर्ष से अधिक ना हुआ हो।
फेफड़ों के कैंसर से बचना चाहते हैं, तो विश्व कैंसर दिवस 2021 (World Cancer Day 2021 in Hindi) पर आपको इसके इलाज की कई विधियां जैसे सर्जरी, रेडियोथेरेपी, केमोथेरेपी, टार्गेटेड थेरेपी और इम्यूनोथेरेपी के बारे में जानना जरूरी है। उपचार विकल्प बीमारी की गंभीरता और पीड़ित के स्वास्थ्य पर निर्भर करता है-
• शुरुआती स्तर (I और II) में फेफड़ों के कैंसर के लिए सर्जरी एक निदान है। सर्जरी का विकल्प सिस्टेमिक लिम्फ नोड डिसेक्शन पर निर्भर करता है, जिनमें शामिल है- सिगमेंटेक्टॉमी, लोबेक्टॉमी या न्यूमोनेक्टॉमी।
• स्तर-III के कैंसर का इलाज समान्यतया रेडियोथेरेपी और केमोथेरेपी से किया जाता है।
• स्तर-IV के कैंसर के लिए पैलीएटिव केमोथेरेपी या टार्गेटेड थेरेपी की आवश्यकता पड़ती है। कुछ खास वर्ग के रोगियों के लिए ईजीएफआर और एएलके4 म्यूटेशन पॉजिटिव के साथ टार्गेटेड थेरेपी एक बेहतर और आसान विकल्प है, लेकिन यह थोड़ा महंगा है। स्तर-IV के उपचार का लक्ष्य निदानात्मक नहीं होता है, क्योंकि यह पहले ही काफी गंभीर अवस्था में पहुंच चुका होता है। अतः यह सलाह दी जाती है कि चिकित्सकीय संसाधनों का बहुत सावधानी पूर्वक उपयोग किया जाए।