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Written By: Jitendra Gupta | Updated : August 6, 2021 6:22 PM IST
Image credits by: डिलवरी के तुरंत बाद इतने दिन मां का दूध बच्चे के लिए होता है अमृत समान, एक्सपर्ट से जानें कोरोना काल में स्तनपान से जुड़े सेफ टिप्स
world breastfeeding week 2021 : हम सभी जानते हैं कि मां का दूध केवल पोषण ही नहीं, जीवन की धारा है। मां और बच्चे का अटूट रिश्ता वहीं से बनना शुरू हो जाता है जब एक महिला बच्चे को जन्म देती है और फिर उसको अपनी गोद में लेकर पहली बार स्तनपान द्वारा अपनी नन्ही सी जान का पेट भराती है। बच्चे के लिए उसकी मां का दूध कितना महत्वपूर्ण है यह आमतौर पर सभी जानते हैं लेकिन मां के लिये स्तनपान कितना महत्वपूर्ण है यह शायद वह माताएं भी नहीं जानती जो स्तनपान करते हैं या स्तनपान करने से बचती हैं। श्री बालाजी एक्शन मेडिकल इंस्टीट्यूट की सीनियर कंसलटेंट गाईनेकॉलोजिस्ट एंड ऑब्स्ट्रिशन डॉ. रेनू गुप्ता कहती हैं कि मां का दूध अपने बच्चे के लिए सबसे अच्छा है, स्तनपान का महत्व समझते हुए यह जानना जरूरी है डिलीवरी के बाद पहले 2 दिन जो गाढ़ा दूध आता है जिसे कोलस्ट्रम कहा जाता है वह बच्चे के लिए अमृत के समान है। उसे कभी बरबाद न जाने दें। मां के दूध में न केवल पोषक तत्त्व हैं बल्कि इसमें बीमारी से लड़ने वाले पदार्थ भी शामिल होते हैं जो बच्चे की रक्षा करते हैं।
स्तनपान सामान्य डिलीवरी के आधे घंटे के भीतर और सीजेरियन सेक्शनके चार घंटे के बाद शुरू किया जाना चाहिए। कम से कम छह महीने तक शिशु को स्तनपान कराना चाहिए और उसके बाद दो साल या उसके बाद तक भी स्तनपान कराया जा सकता है।
बच्चे का शारीरिक और मानसिक विकास का आधार मां का दूध ही होता है। शिशु को 6 माह की उम्र तक सिर्फ और सिर्फ एक्सक्लूसिव ब्रैस्ट फीडिंग (केवल मां का दूध कोई भोजन या पानी न दें ) ही उसके लिए लाभदायक होता है।
स्तनपान बीमारियों की एक लंबी सूची से बच्चे की रक्षा करता है। जिन बच्चों को स्तनपान का लाभ मिलता है, उन्हें दस्त होने की संभावना 7 गुना एवं निमोनिया की संभावना 5 गुना तक कम हो जाती है।
दुनिया भर के कई अध्ययनों से पता चला है कि पेट से जुड़े वायरस, सांस की बीमारियों, कान में संक्रमण, और दिमागी बुखार आदि बीमारियां स्तनपान के कारण शिशुओं में कम होती हैं और अगर हो जाएं तो वह कम गंभीर होती हैं।
• मां का दूध प्राकृतिक रूप से शिशु के विकास के लिए आवश्यक सभी घटकों से परिपूर्ण होता है।
• इसमें विटामिन ऐ, बी एवं डी, सोडियम, पोटेशियम, कैल्शियम भी पर्याप्त मात्रा में मिलता है।
• यह प्रदूषण, मिलावट और उपसर्ग से रहित होता है। अतः उपसर्गजनित रोग होने की संभावना कम होती है।
• इसके माध्यम से एलर्जिक रिएक्शन होने की संभावना बहुत कम होती है।
• दूध में कैल्शियम होने की वजह से बच्चे की हड्डियां मज़बूत होने में मदद मिलती है।
• मां के दूध में एंटीबाडीज से परिपूर्ण होने के कारण यह शिशु को अनेक रोगों से सुरक्षा प्रदान करता है।
• मां के दूध में लैक्टाल्बुमिन नामक प्रोटिन एवं लो ऑस्मोटिक लोड होने से यह शिशु के पाचन में मदद करता है एवं उससे शिशु के पाचनतंत्र या गुर्दे पर कोई दुष्प्रभाव नहीं पड़ता।
• स्तनपान से शिशु के फेफड़े, जबड़े, मसूड़े व दांत विकसित होने में सहायता होती है।
• स्तन्यपोषित शिशुओं को जीवन में कुपोषण, मोटापा, दमा, निमोनिया, उच्च रक्तचाप, मधुमेह इत्यादि रोगों से ग्रसित होने की संभावना कम होती है।
• एक महीने से एक साल की उम्र तक शिशु में ‘अचानक शिशु मृत्यु संलक्षण’ का खतरा रहता है । मां का दूध शिशु को इससे बचाता है ।
• जो महिलाएं स्तनपान कराती हैं उनमे 28% ब्रैस्ट कैंसर और 21% ओवेरियन कैंसर होने का खतरा कम हो जाता है।
• स्तनपान न कराने वाली महिलाओं को 'आस्टियोपोरोसिस' नाम की बीमारी (हड्डियों का कमजोर होना) की संभावना 4 गुना तक बढ़ जाती है।
• स्तनपान माताओं को मोटापे से बचाता है और शरीर को सुडौल बनाता है।
• स्तनपान कराते समय मां के शरीर में ऑक्सीटोसिन हार्मोन स्रावित होते है, यह हार्मोन तनावमुक्ति तथा सुख प्रदान करता है ।
• जो महिलाएं स्तनपान नहीं कराती या जल्दी बंद कर देती है, उनमें डिप्रेशन से ग्रस्त होने की सम्भावना होती है।
नवजात बच्चे को स्तनपान कराने के लिए किसी रूटीन का पालन करने की जरूरत नहीं होती है। जब बच्चे को भूख लगे तब उसे दूध पिलाया जा सकता है। लेकिन आमतौर पर नए बच्चे की पाचनशक्ति कमजोर होती है इसलिये एक बार में बहुत सारा दूध न पिलाया जाए बल्कि कुछ समय के अंतराल में थोड़ा-थोड़ा दूध पिलाते रहना बेहतर होता है। ऐसे में कम से कम 8 बार तो दूध जरूर पिलाया जाना चाहिए। नवजात शिशु रात में 2-3 बार दूध के लिए नींद से जाग सकता है, लेकिन 6 सप्ताह के बाद वह एकसाथ 5 घंटे से ज्यादा नहीं सोता। 3 महीने के बाद कुछ बच्चों को बोतल का दूध भी देना पड़ता है. तब उन की भूख जरा कम हो जाती है। इस की वजह यह है कि बोतल का दूध फौर्मूला दूध होता है। मां के दूध की तुलना में इसे हजम करने में ज्यादा वक्त लगता है। इस दौरान 4 घंटे के अंतर में दूध पिलाया जा सकता है। यानी, दिन में 5 बार और रात में 2 बार पर्याप्त होता है।
स्तन दूध काफी सुविधाजनक भी है। यह दुनिया का एकमात्र ऐसा खाद्य पदार्थ है, जो सही समय, सही जगह, सही मात्रा और सही तापमान पर उपलब्ध रहता है। स्तनपान से मां और बच्चे के स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। अतः सभी डाक्टरों का परम कर्तव्य है कि गर्भवती महिलाओं तथा नयी माताओं को स्तनपान के महत्व को समझाकर तथा उनकी अनेकों प्रकार की धारणाओं एवं शंकाओं को दूर कर उन्हें स्तनपान कराने के लिए प्रेरित करें।
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