
Also Read
World Brain Day 2020: शरीर में दिखें ये बदलाव तो हो जाएं सावधान, हो सकते हैं ये पार्किंसंस डिज़िज़ के शुरुआती लक्षण
World Brain Day 2020: पार्किंसंस डिजीज आमतौर पर 60 वर्ष से अधिक उम्र वाले लोगों में होने वाली एक बीमारी मानी जाती है। यह, नर्वस सिस्टम से जुड़ा एक डिसॉर्डर कहा जाता है, जो धीरे-धीरे बढ़ता है। इसके गम्भीर होने के साथ-साथ शरीर की सभी गतिविधियों पर असर पड़ता है और उनमें बदलाव भी देखे जाते हैं। आमतौर पर पार्किंसंस बीमारी (Parkinson's disease) में सुस्ती या काम में धीमापन, शरीर में कंपकंपी उठने, मांसपेशियां का कठोर हो जाना, बॉडी पॉश्चर और संतुलन में गड़बड़ी, छोटी-छोटी बातें भूल जाना, स्वभाव में बदलाव आदि समस्याएं होती हैं। जिससे, बुज़र्गों के लिए रोज़मर्रा की ज़िंदगी में भी कई परेशानियां आती हैं। लेकिन, अब यह बीमारी कम उम्र के लोगों को भी होने लगी है। (Early Onset of Parkinson's disease)
एक्सपर्ट्स और विभिन्न रिसर्च में कहा गया है कि 21 वर्ष की उम्र में भी पार्किंसंस बीमारी हो सकती है। इसका अर्थ है कि कम उम्र के युवा और मिडिल एज लोगों को भी इस बीमारी की चपेट में आने की पूरी संभावना है। (Parkinson's Disease Risk Groups) इस बीमारी के प्रति लोगों में जागरूकता लाने के लिए इस वर्ष वर्ल्ड ब्रेन डे (World Brain Day 2020) की थीम पार्किंसंस डिज़िज़ (Parkinson’s) रखी गयी है। आइए जानते हैं विस्तार से इस बीमारी के लक्षणों के बारे में-
यह एक बहुत ही कॉमन लक्षण है जिसे, पार्किंसंस बीमारी के मरीज़ अक्सर महसूस करते हैं। इसमें, कभी-कभी लोगों को चलते समय अचानक से झटके लगने लगते हैं। पैरों में करंट लगने जैसा अहसास होता है। जिससे, लोग गिर जाते हैं या उनका बैलेंस बिगड़ जाता है। दरअसल, यग नर्व्स में होने वाली किसी दिक्कत के चलते हो सकता है। जो, पार्किंसंस डिज़िज़ का एक लक्षण भी बन सकता है। लेकिन, एक्सपर्ट्स की राय है कि, झटके लगने की समस्या कभी-कभार ही होती है। जिसके चलते लोग इसे गंभीरता से नहीं लेते और साधारण-सी बात समझकर इसे भूल जाते हैं। लेकिन, अगर सप्ताह भर के गैप्स में एक बार ऐसा ज़रूर हो रहा है, तो अपने डॉक्टर को इस बारे में सूचित करें।
लिखने की शैली में बदलाव भी पार्किंसन्स डिज़िज़ का महत्वपूर्ण लक्षण हो सकता है। दरअसल, इस बीमारी में दिमाग से जुड़ी गतिविधियों में अलग-अलग प्रकार के सिग्नल मिलते हैं। जिससे, अक्षरों की बनावट सही तरीके से नहीं हो पाती और पी़ड़ित व्यक्ति की राइटिंग अचानक से बदलने लगती है। आड़े-तिरछे अक्षर बनाना, पेंसिल या कलम पकड़ने में परेशानी, हाथों का कांपना और एक कतार में ना लिख पाने जैसी कई परेशानियां पार्किंसंस डिज़िज़ में हो सकती हैं। अगर, बार-बार ऐसा हो रहा हो तो, आपको इस बारे में प्रोफेशनल हेल्प लेनी चाहिए।
इन दिनों फैली कोरोना महामारी का एक महत्वपूर्ण लक्षण है गंध ना समझ आना। लेकिन, क्या आप जानते हैं कि, किसी चीज़ की महक समझने में असमर्थता पार्किंसंस डिज़िज़ का भी एक अहम संकेत है। आमतौर पर सर्दी-खांसी होने पर भी लोगों को गंध समझ नहीं आती। पर सर्दी-ज़ुकाम में यह परेशानी 2-3 दिन तक ही रहती है। वहीं, पार्किंसंस में लगातार कई दिनों तक महक का भान नहीं हो पाता।
अक्सर, वर्क फ्रॉम होम करने , टीवी देखने और एक जगह बैठे रहने से पीठ, कमर और हाथों-पैरों के मसल्स अकड़ जाते हैं। लॉकडाउन के दौरान लोगों को यह परेशानी काफी अधिक महसूस भी हो रही है। लेकिन, अगर आपके साथ ये कारण नहीं हैं या इन वजहों के अलावा भी आपकी मांसपेशियां हमेशा अकड़ीं हुई होती हैं। तो, आपको इस ओर ध्यान देना चाहिए। दरअसल, मसल्स में स्टिफनेस या मसल्स क्रैम्प जैसी समस्याएं पार्किंसंस डिज़िज़ का एक प्रारंभिक लक्षण होता है। इसीलिए, आपको इस समस्या का सही कारण पता कर समय पर ़एक्सपर्ट की मदद लेनी चाहिए।
हर काम धीमे-धीमे करना भी पार्किसंस का लक्षण हो सकता है। क्योंकि, इस बीमारी में सुस्त गति से काम करना, धीमे चलना, बहुत धीरे-धीरे पलकें झपकाना, रूक-रूक या धीमी गति से बात करने जैसे बदलाव स्वभाव में आ जाते हैं। अगर आपका हर काम अचानक से स्लो गति से होने लगा है, तो इस बारे में डॉक्टर से बात करें।