World Blood Donor Day : क्या आप भी करते हैं रक्तदान से जुड़े इन मिथकों पर यकीन ?

आज (14 जून) वर्ल्ड ब्लड डोनर डे है। आज भी अधिकतर लोग रक्तदान करने में संकोच करते हैं। उन्हें लगता है कि वो खुद बीमार पड़ जाएंगे, उनके शरीर में खून की कमी हो जाएगी आदि। दरअसल, ये सभी भ्रांतियां या मिथक हैं, लोगों में व्याप्त हैं। आप भी रक्तदान से संबंधित इन मिथकों पर करते हैं यकीन, तो इन्हें दूर करने में ही आपकी भलाई है।

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Written By: Anshumala | Updated : June 14, 2019 12:24 PM IST

आज यानी 14 जून को पूरी दुनिया में ''विश्व रक्तदान दिवस'' (World Blood Donor Day) मनाया जा रहा है। इस बार ''विश्व रक्तदान दिवस'' 2019 के लिए मेजबान देश रवांडा है। किगाली (रवांडा) में आज ग्लोबल ईवेंट आयोजित किए जा रहे हैं। हर साल एक खास थीम के तहत इस दिवस के प्रति लोगों में जागरूकता लाने की कोशिश की जाती है। इस बार का थीम ''ब्लड डोनेशन एंड यूनिवर्सल एक्सेस टू सेफ ब्लड ट्रांसफ्यूजन'' है। इसके थीम का मुख्य उद्देश्य यूनिवर्सल हेल्थ कवरेज को प्राप्त करना है।

कैंपेन का स्लोगन 'सेफ ब्लड फॉर ऑल' है, जिसका उद्देश्य है हेल्थ केयर में सुरक्षित रक्त वितरन करने की वैश्विक आवश्यकताओं के प्रति जागरूकता लाना। हालांकि, आज भी अधिकतर लोग रक्तदान करने में संकोच करते हैं। उन्हें लगता है कि वो खुद बीमार पड़ जाएंगे, उनके शरीर में खून की कमी हो जाएगी आदि। दरअसल, ऐसे ही कई मिथक या भ्रम लोगों में व्याप्त हैं, जिनके कारण रक्तदान करने से लोग कतराते हैं।

रक्तदान को महादान इसलिए कहा जाता है, क्योंकि रक्तदान से आप किसी की जिंदगी बचा सकते हैं। इससे बड़ी बात क्या हो सकती है कि आपकी वजह से इस दुनिया में कोई सांस ले पा रहा है। जीवित है। अगर आप भी रक्तदान से संबंधित इन मिथकों पर करते हैं यकीन, तो इन्हें दूर करने में ही आपकी भलाई है। एक बात जान लें, ब्लड डोनेट करने से आप बीमार नहीं, बल्कि स्वस्थ रहते हैं।

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रक्तदान से जुड़े मिथक

कमजोरी होगी

रक्तदान करने के बाद आप शरीर में पानी की कमी या थकान महसूस नहीं करेंगे। बस तरल पदार्थ लेते रहें और अच्छा खाना खाएं।

शेड्यूल बिगड़ जाएगा

रक्तदान के बाद आप अपने रोज के काम पर आसानी से लौट सकते हैं। हां, अगले 12 घंटे तक एक्सरसाइज करने या अधिक वजन उठाने से बचें।

शरीर में हो जाएगी खून की कमी

ऐसा नहीं है। रक्तदान करने से खून की कमी नहीं होती है। इंसान के शरीर में खून देने के बाद भी प्रचुर मात्रा में खून बचा होता है और दोबारा से खून बहुत जल्दी बनने लगता है।

दर्द होगा

खून देने में कोई दर्द नहीं होता। सूई चुभने का दर्द भी बेहद कम होता है और इसके अलावा किसी तरह का दर्द नहीं होता।

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बेहोश हो सकते हैं

कई लोगों में यह धारणा होती है कि खून देने के बाद बेहोशी या बेचैनी हो सकती है, लेकिन ऐसा कुछ नहीं होता। आप बेफ्रिक होकर खून दीजिए। हां, यदि आप शारीरिक रूप से खुद ही कमजोर हैं या एनेमिक हैं, तो रक्तदान ना करें।

इंफेक्शन हो सकता है

रक्तदान के लिए बेहद स्पष्ट प्रक्रिया का पालन किया जाता है। सभी स्तर पर स्वच्छता रखी जाती है। हर रक्तदान के लिए एक रोगाणुरहित, नई सूई का इस्तेमाल किया जाता है। इससे इंफेक्सन का खतरा ना के बराबर होता है।

मेरा ब्लड टाइप कॉमन है

दुनिया में कुछ ब्लड ग्रुप कॉमन हैं और कुछ दुर्लभ, लेकिन अगर कोई ब्लड ग्रुप कॉमन है तो उसके मरीज भी ज्यादा ही होंगे। इसलिए कॉमन ब्लड टाइप की जरूरत ज्यादा होती है।

मेरी उम्र ज्यादा है

रक्तदान करने की कोई ऊपरी आयुसीमा नहीं होती। जब तक आपका वजन 50 किलो से ज्यादा हो और आपका शरीर स्वस्थ हो, आप खून दे सकते हैं।

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समय का बहाना

रक्तदान की पूरी प्रक्रिया सिर्फ 20-25 मिनट की होती है। इसमें से सिर्फ 5-10 मिनट ही आपके शरीर से खून लेने की प्रक्रिया चलती है। तो आप अपने बिजी शेड्यूल से सिर्फ आधा घंटा निकालकर किसी की जान बचाने का नेक काम तो कर ही सकते हैं।

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