
मुकेश शर्मा
मुकेश शर्मा दिल्ली यूनिर्विसिटी से जर्नलिज्म डिग्री होल्डर हैं और पिछले 8 साल से Health Journalism से जुड़े हुए ... Read More
Written By: Mukesh Sharma | Published : March 30, 2023 5:45 PM IST
बाइपोलर एक ऐसी मानसिक बीमारी है, जिसका पता लगाना सिर्फ उन लोगों के लिए आसान है, जिन्हें इस बीमारी के बारे में जानकारी है। बाइपोलर डिसऑर्डर को हिंदी द्विध्रुवी विकार कहा जाता है। यह एक ऐसी मानसिक बीमारी से जिसमें व्यक्ति मूड में तेजी से बदलाव होते हैं और ये बदलाव सामान्य मूड स्विंग से ज्यादा गंभीर और लंबे समय तक रहते हैं। किशोरावस्था में बाइपोलर डिसऑर्डर के मामलों में तेजी से वृद्धि देखी गई है और कई बार शुरुआती लक्षण गंभीर न होने के कारण इस समस्या की पहचान नहीं हो पाती है। इस बारे में अधिक जानकारी के लिए हमने वैशाली के मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल के मेंटल हेल्थ डिपार्टमेंट में क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट डॉक्टर तान्या जावा से बात की। डॉक्टर तान्या ने किशोरावस्था में बाइपोलर डिसऑर्डर से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण बातों के बारें मे बताया।
डॉक्टर तान्या के अनुसार डिप्रेशन के बाद बाइपोलर डिसऑर्डर किशोरावस्था में देखी जाने वाली बहुत ही कॉमन मेंटल कंडीशन बन चुकी है। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ के अनुसार 2.9 फीसद किशोरों में बाइपोलर की समस्या देखी गई है, जिसमें लड़कों से ज्यादा लड़कियों के मामले अधिक है।
डॉक्टर तान्या के अनुसार किशोरावस्था में भी बाइपोलर के कारण होने वाले कुछ सामान्य लक्षण मूड, एनर्जी और व्यवहार में तेजी से बदलाव होना आदि ही है। जैसा कि इसके नाम से पता चलता है, इस मेंटल डिसऑर्डर में मरीज की भावनाओं में गंभीर रूप से बदलाव या उतार-चढ़ाव होते हैं। बाइपोलर के दौरान मूड में होने वाले बदलाव में लो मूड और हाई मूड शामिल हैं, जिसके दौरान होने वाले लक्षण निम्न हैं -
लो मूड - इस दौरान व्यक्ति को गंभीर रूप से उदासी, अकेलापन, रुचि की कमी और चिड़चिड़ापन महसूस हो सकता है। इस दौरान मरीज किसी से बात नहीं करता है या बहुत ही कम बात करता है।
हाई मूड - इस दौरान व्यक्ति का आत्मविश्वास बढ़ जाता है और उसे बहुत ज्यादा उत्साह व आक्रामकता बढ़ जाती है। इस दौरान मरीज बहुत ज्यादा बातें करने लगता है।
बाइपोलर के दौरान मूड में बदलाव होने का समय व्यक्ति के मेंटल हेल्थ स्थिति और डिसऑर्डर की गंभीरता के अनुसार अलग-अलग हो सकता है। बाइपोलर डिसऑर्डर में व्यक्ति का मूड बदलने में कुछ घंटे से लेकर कई दिनों तक का समय लग सकता है। हालांकि, कई बार किशोरावस्था में मूड में बदलाव होना आम हो सकता है और इसलिए इसे बिना एक्सपर्ट की जांच के इसे बाइपोलर नहीं समझ लेना चाहिए।
डॉक्टर तान्या के अनुसार बाइपोलर डिसऑर्डर होने का खतरा सबसे ज्यादा उन किशोरों में हैं, जिनके परिवार मे पहले किसी व्यक्ति को बाइपोलर डिसऑर्डर हो चुका है। इसके अलावा बचपन या किशोरावस्था में किसी प्रकार की घटना जिसका मेंटल हेल्थ पर गहरा असर पड़ा हो वह भी बाइपोलर डिसऑर्डर के लक्षणों को गंभीर बना सकता है।