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World Bipolar Day 2022: ऐसी बीमारी जिसमें खुदकुशी करने का करता है मन, अगर बार-बार होता है Mood Swing तो जान लें इस रोग के बारे में

बाइपोलर डिसऑर्डर एक गंभीर मानसिक विकार है, जिसमें व्यक्ति का मूड बार-बार बदलने लगता है। इस दौरान व्यक्ति को असाधारण रूप से खुशी या दुख महसूस होता है और इस कारण से कई बार व्यक्ति गलत कदम उठा लेता है।

World Bipolar Day 2022: ऐसी बीमारी जिसमें खुदकुशी करने का करता है मन, अगर बार-बार होता है Mood Swing तो जान लें इस रोग के बारे में

Written by Mukesh Sharma |Updated : March 30, 2022 1:14 PM IST

30 मार्च को वर्ल्ड बाइपोलर डे (World Bipolar Day) के रूप में जाना जाता है। बाइपोलर डे को पेंटर विन्सेंट वैन गो (Vincent Van Gogh) के जन्मदिन पर उसकी याद के रूप में भी मनाया जाता है। बाइपोलर एक गंभीर मानसिक रोग है, लेकिन फिर भी डिप्रेशन, एंग्जाइटी और अन्य मानसिक विकारों की तरह इस पर इतनी बात नहीं होती है। यही कारण है कि बहुत ही कम लोग बाइपोलर डिसऑर्डर के बारे में जानते है और इसलिए यह दिन अपने आप में एक महत्वपूर्ण रखता है। यह दिन हमें बाइपोलर डिसऑर्डर के प्रति लोगों को जागरूक करता है, ताकि उससे होने वाली जटिलताओं को जितना हो सके कम किया जा सके। बाइपोलर डिसऑर्डर कोई आम मानसिक विकार नहीं है, इससे ग्रस्त व्यक्ति का बार-बार मूड तो बदलता ही है साथ ही उसे खुदकुशी के विचार भी आने लगते हैं। आज का हमारा लेख बाइपोलर डिसऑर्डर पर ही है, जिसमें हम इस मानसिक रोग के बारे में जानकारी देने की कोशिश करेंगे ताकि आत्महत्या जैसी स्थितियों से बचा जा सके। चलिए जानते हैं बाइपोलर डिसऑर्डर की पहचान क्या है और इससे बचाव कैसे करें।

दूसरी मानसिक बीमारियों से अलग है बाइपोलर डिसऑर्डर

बाइपोलर एक कॉम्प्लेक्स मेंटल कंडीशन है, जो लंबे समय तक रहती है और इस दौरान व्यक्ति का मूड बार-बार बदलता रहता है। यदि सरल भाषा में कहें तो इसमें एक व्यक्ति के दो व्यक्तित्व हो जाते हैं, जिसमें कभी वह खुश तो कभी वह परेशान दिखाई देता है। इसमें पीड़ित व्यक्ति को महसूस होने वाली खुशी व दुख कई बार इतना ज्यादा होता है, कि कई बार वह उसे कंट्रोल नहीं कर पाता है और कोई गलत कदम उठा लेता है।

लक्षणों की पहचान करना है बहुत जरूरी

बार-बार मूड स्विंग होना बाइपोलर डिसऑर्डर के प्रमुख लक्षणों में से एक हो सकता है। इसमें व्यक्ति को मैनिक व डिप्रेसिव दौरे आते हैं, जिनके दौरान होने वाले लक्षण कुछ इस प्रकार हो सकते हैं। मैनिक एपिसोड में व्यक्ति बहुत ज्यादा खुश और ऑवरकॉन्फइडेंट हो जाता है। ऐसे में उसकी नींद कम हो जाती है और वह वास्तविकता को समझ नहीं पाता है। वहीं डिप्रेसिव एपिसोड के दौरान व्यक्ति गंभीर रूप से डिप्रेशन में चला जाता है, खुद को कमजोर समझने लगता है और सबसे अलग रहने की कोशिश करता है।

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आत्महत्या करने के बारे में सोच सकता है व्यक्ति

बाइपोलर डिसऑर्डर के दौरान व्यक्ति के मूड बार-बार मूड बदलते हैं, जिसे कभी वह बेहद खुश तो कभी बहुत दुखी रहने लगता है। बाइपोलर डिसऑर्डर के दौरान व्यक्ति कई बार गहन अवसाद में पहुंच जाता है और उसे लगता है कि अब उसके जीवन का कोई महत्व नहीं है। ऐसी स्थिति में व्यक्ति को खुदकुशी के विचार आने लगते हैं।

मरीज का ध्यान रखना है जरूरी

बाइपोलर डिसऑर्डर के मरीज का ध्यान रखना बहुत जरूरी है, ताकि उसे मानसिक रूपसे सहारा प्रदान किया जा सके। ऐसा इसलिए क्योंकि मानसिक रूप से सहारा देकर ही पीड़ित व्यक्ति के मन में खुदकुशी के ख्याल आने से रोका जा सकता है। यदि आपके परिवार का कोई सदस्य या दोस्त बाइपोलर डिसऑर्डर से ग्रस्त है, तो आपको इन बातों का ध्यान रखना चाहिए -

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  • मरीज को ज्यादा से ज्यादा समय दें और जितना हो सके उसे सामान्य रूप से खुश रखने की कोशिश करें
  • जिस चीज या बात से उसे बुरा लगता है या फिर मैनिक एपिसोड्स आते हैं,
  • यदि उसे अत्यंत खुशी या दुख के एपिसोड आ रहे हैं, तो उसका ध्यान बंटाने की कोशिश करें और उसे अपनी नजरों के सामने ही रखें।
  • जितना हो सके उसे अकेला न रहने दें और साथ ही ध्यान रखें कि वह सामान्य रूप खा-पी और नींद ले रहा है या नहीं। यदि आपको लगता है कि उसके लक्षण लगातार बढ़ रहे हैं, तो डॉक्टर से संपर्क करें।

बाइपोलर डिसऑर्डर का नहीं है कोई इलाज

ऐसी कोई दवा या थेरेपी नहीं बनी है जो बाइपोलर डिसऑर्डर का जड़ से इलाज कर सके। हालांकि दवाओं और बिहेवियरल थेरेपी आदि की मदद से लक्षणों को नियंत्रित किया जा सकता है और स्थिति को बदतर होने से भी रोका जा सकता है। इस विकार से ग्रस्त कुछ लोगों को कभी-कभी दवाओं की आवश्यकता पड़ती है, जब उनके लक्षण बढ़ने लगते हैं जबकि कुछ लोगों का इलाज जीवनभर ही चलता है।