World Autism Awareness Day 2020: ऑटिज़्म में बच्चे रहते हैं दूसरों से कटे-कटे, इस तरह सिखाएं उन्हें लोगों से घुलना-मिलना, ऑटिस्टिक बच्चों का ख्याल रखें इन टिप्स के साथ
ऑटिज़्म (Autism) नर्वस सिस्टम यानि तंत्रिका से जुड़ी हुई समस्या है। इसका असर बच्चों पर पूरी ज़िंदगी होता है। जिसके, इन बच्चों के लिए ज़िंदगी बहुत अधिक चुनौतिपूर्ण हो सकती है। इसीलिए, ऐसे बच्चों की मदद करने की कोशिश करेँ। ऑटिस्टिक बच्चों को साधारण बच्चों के साथ मिलने-जुलने और खेलने या साथ रहने में दिक्कतें हो सकती हैं। यही वजह है कि ऑटिस्टिक बच्चों के साथ बहुत ही सावधानी के साथ व्यवहार करना चाहिए और इनका खास ख्याल रखना चाहिए।
Taking Care of Autistic Kids: 2 अप्रैल वर्ल्ड ऑटिज़्म अवेयरनेस डे (World Autism Awareness Day 2020) मनाया जाता है। साल 2020 की थीम है- दि ट्रांजिशन टू एडल्टहूड (The Transition To Adulthood), इस दिन का मकसद माता-पिता को इस बीमारी के लक्षणों के प्रति जागरूक करना है। ऑटिज़्म (Autism) नर्वस सिस्टम यानि तंत्रिका से जुड़ी हुई समस्या है। इसका असर बच्चों पर पूरी ज़िंदगी होता है। जिसके, इन बच्चों के लिए ज़िंदगी बहुत अधिक चुनौतिपूर्ण हो सकती है। इसीलिए, ऐसे बच्चों की मदद करने की कोशिश करेँ। ऑटिस्टिक बच्चों को साधारण बच्चों के साथ मिलने-जुलने और खेलने या साथ रहने में दिक्कतें हो सकती हैं। यही वजह है कि ऑटिस्टिक बच्चों के साथ बहुत ही सावधानी के साथ व्यवहार करना चाहिए और इनका खास ख्याल रखना चाहिए।(Tips for Taking Care of Autistic Kids in hindi)
World Autism Awareness Day 2020 : क्या है वर्ल्ड ऑटिज्म अवेयरनेस डे, ऑटिज्म रोग और लक्षण
ऑटिज़्म के लक्षणों पर ध्यान दें
एक्सपर्ट्स के अनुसार यह एक व्यवहार संबधी समस्या है। इसीलिए, जितनी जल्दी इसके लक्षणों की पहचान की जाएगी उसी आधार पर बच्चे के व्यवहार में बदलाव लाना भी संभव होता है। जैसे, ऑटिज़्म के लक्षणों (Symptoms of Autism) के तौर पर बच्चे का गुमसुम रहना, किसी बात को कई बार दोहराना या रटते रहना और इमोशनल बॉंन्डिंग की कमी आदि होती है। इसी तरह शिशुओं के विकास में माइलस्टोन मानी जाने वाली एक्टिविटीज़ के आधार पर भी बच्चे में ऑटिज़्म की पहचान की जा सकती है। इसीलिए, बच्चे के व्यवहार पर नज़र रखें और ऑटिज़्म के लक्षण दिखने पर डॉक्टर से बात करें।
डिजिटल एक्सपोज़र रखें कम
अगर आपके बच्चे में ऑटिज़्म के लक्षण दिखायी दे रहे हैं या आपका बच्चा ऑटिस्टिक है तो, उसे डिवाइसेस के इस्तेमाल से बचाएं। बच्चे का डिज़िटल एक्सपोरज़र कम से कम रखें। टीवी के अलावा कम्प्यूटर या वीडियो गेम्स, मोबाइल फोन और ऐसे ही अन्य इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स का इस्तेमाल ना करने दें। यह उनकी मेंटल ग्रोथ में एक अड़चन बन सकता है। इसके बदले बच्चे को ऐसे खिलौने दें, जिनमें वह बटन दबाकर म्यूज़िक बंद-चालू कर सके। इससे वह कुछ नयी चीज़ें सीख सकेगा। (Toys for Autistic Children)
हेल्दी डायट (Diet in Autism)
यह एक बहुत महत्वपूर्ण बात है जिसका ख्याल ऑटिस्टिक बच्चों के आसपास रहने वाले लोगों को रखना चाहिए। ऑटिज़्म पीड़ित बच्चों को पैकेटबंद ड्रिंक्स, चिप्स या किसी भी तरह के प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थ देने से बचें। दरअसल, जंक फूड और पैकेटबंद चीज़ों में प्रोसेसिंग के दौरान मिलाए जाने वाले केमिकल्स बच्चे के नर्वस सिस्टम को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
सोशल बनने में करें मदद
जैसा कि ऑटिस्टिक बच्चे लोगों से बहुत कम बातचीत करना पसंद करते हैं। इसीलिए, उन्हें सोशली एक्टिव बनाने के लिए प्रयास करें। इस तरह वे ज़्यादा लोगों से मिल सकेगा और उनके साथ सामाजिक व्यवहार करना सीखेगा। ऐसे बच्चों को उनके लिए बनाए गए स्पेशल स्कूल्स में भेजें। वहां, वह कुछ नये दोस्त बनाएगा। इसी तरह बच्चे को दूसरों बच्चों के साथ खेलने के लिए उत्साहित करें। इस तरह वह घरवालों के अलावा भी लोगों के साथ घुलने-मिलने और एडजस्ट करने जैसी चीज़ें सीख सकेगा।