वर्ल्‍ड अर्थराइटिस डे : हो रहे हैं पचास के पार, तो इन बातों का जरूर रखें ख्‍याल

अगर जोड़ों में एक हफ्ते से ज्यादा समय तक सूजन और दर्द है तो तुरंत डॉक्‍टर से परामर्श लें।

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Written By: Yogita Yadav | Published : October 12, 2018 12:02 PM IST

जीवनशैली तो बदली ही है, खानपान भी अब वैसा नहीं है, जो शरीर के लिए जरूरी पोषण प्रदान करें। उस पर व्‍यस्‍तता इतनी बढ़ गई है कि चोट लगने पर भी आराम की फुर्सत नहीं। पर अगर आपको अपने शरीर से है प्‍यार तो, हाथ-पैरों के जोड़ों से जुड़ी इन बातों को कभी न करें नजरंदाज।

बढ़ते जा रहे हैं मरीज

अर्थराइटिस के मरीजों की संख्या दुनिया भर में बढ़त पर है। ऑस्टियो अर्थराइटिस एक आम प्रकार का घुटनों का अर्थराइटिस होता है और इसे जोड़ों का रोग भी कहा जाता है। अर्थराइटिस का दर्द इतना तेज होता है कि व्यक्ति को न केवल चलने–फिरने बल्कि घुटनों को मोड़ने में भी बहुत परेशानी होती है। घुटनों में दर्द होने के साथ–साथ दर्द के स्थान पर सूजन भी आ जाती है।

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बेहतर है बचाव

अर्थराइटिस के अनेक प्रकार होते हैं, जैसे ऑस्टियोर्यूमैटॉइड और गाउटी अर्थराइटिस आदि। कुछ सुझावों पर अमल कर आप अर्थराइटिस की समस्या से राहत पा सकते हैं।

  • बढ़ती उम्र के साथ जोड़ों के कार्टिलेज क्षीण हो जाते हैं। उम्र के बढ़ने की प्रक्रिया को कोई रोक नहीं सकता है। ऑस्टियो अर्थराइटिस बढ़ती उम्र यानी आमतौर पर लगभग 50 साल के बाद होने वाली समस्या है। इस समस्या से पार पाने के लिए वजन को नियंत्रित रखना आवश्यक है।

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  • नियमित रूप से व्यायाम करें। व्यायाम करने से मांसपेशियों के साथ जोड़ भी सशक्त होते हैं।
  • अपने शरीर के पोस्चर को ठीक रखें जैसे उकड़ू बैठने से बचें। सीढ़ियां न चढ़ें।
  • अत्यधिक चिकनाई युक्त या वसा युक्त भोजन से परहेज करें।

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  • साठ की उम्र के बाद अपने भोजन में कटौती करते जाएं। मान लीजिए आप साठ साल के हैं और तीन रोटियां खाते हैं तो साठ के बाद तीन के बजाय ढाई रोटी ही खाएं। ऐसा इसलिए, क्योंकि इस उम्र में शरीर का मेटॉबॉलिज्म कमजोर हो जाता है। इसलिए कार्बोहाइट्रेट युक्त आहार, जैसे रोटियां और चावल कम कर दें और प्रोटीनयुक्त खाद्य पदार्थ, जैसे दाल, चना और पनीर आदि की मात्रा बढ़ा दें।
  • फलों का पर्याप्त मात्रा में सेवन करें। दिन में दो बार फलों का सेवन करना लाभप्रद रहता है।
  • सब्जियों को बार-बार गरम न करें। इन्हें बार-बार गरम करने से इनके विटामिंस और मिनरल्स कम हो जाते हैं।
  • डायबिटीज जोड़ों पर खराब असर डालती है। इसलिए डायबिटीज के साथ जिंदगी जी रहे लोगों को अपने ब्लड शुगर को नियंत्रित रखना चाहिए। ब्लड शुगर के अनियंत्रित रहने से जोड़ों के कार्टिलेज खराब होने लगते हैं।
  • नियमित रूप से आधा घंटा सैर करें।
  • जब जोड़ों में चोट लग जाए तो आराम करें, क्योंकि आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग आराम भी नहीं करना चाहते। आराम न करने पर जोड़ों पर प्रतिकूल असर पड़ता है।
  • अगर यूरिक एसिड थोड़ा बढ़ा हो तो प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थ कम लें, लेकिन अगर ज्यादा बढ़ा है तो डॉक्टर के परामर्श से दवाएं लें।
  • अगर जोड़ों में एक हफ्ते से ज्यादा समय तक सूजन और दर्द बरकरार रहे तो शीघ्र ही अस्थि व जोड़ रोग विशेषज्ञ से परामर्श लें।
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