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अल्जाइमर्स (Alzheimer's) का एक बड़ा कारण उम्र से जुड़े बदलाव है। आंकड़ों पर गौर करें तो अब भी इस बीमारी से गस्त होने वाले लोगों की उम्र 70 वर्ष से ज्यादा है। इसके लिए डॉक्टर तनाव, अवसाद और निराशाजनक माहौल को जिम्मेदार ठहराते हैं। पर इससे बचने के लिए जरूरी है कि आप अपने रिटायरमेंट के बाद इन कुछ खास चीजों से दोस्ती कर लें। ये चीजें आपके ब्रेन को एक्टिव रखेंगी और तमाम मानसिक बीमारियों से बचे रहेंगे।
संगीत से निकलने वाली तरंगे हमारे मस्तिष्क की कोशिकाओं को सक्रिय रखती हैं। जिससे हमारी याद्दाश्त बनी रहती है। फिर चाहे वह किसी भी वाद्य का संगीत हो। बांसुरी, हारमोनियम, गिटार, माउथ ऑर्गन आप कुछ भी बजाना शुरू कर सकते हैं। सीखने के लिए इससे बेहतर उम्र कोई नहीं होगी।
हमारे मन में बहुत सारी ऐसी चीजें होती हैं, जो हम किसी के भी साथ शेयर नहीं करना चाहते। अगर ये यादें बुरी हैं तो ये तनाव का कारण बनती हैं। अध्ययन बताते हैं कि जो महिलाएं अधेड़ उम्र में तनावपूर्ण जीवन बिताती हैं, उनमें बुढ़ापे में डिमेंशिया, अल्जाइमर जैसी बीमारियां होने का जोखिम दोगुना होता है। इसलिए बात मन में न रखें, उन्हें लिखते रहें।
जो सामग्री आपको पसंद है, उसे पढ़ने की आदत डालें। हर रोज कम से कम आधा घंटा किताबें पढ़ने से आपको अकेलेपन के अहसास से निजात मिलेगी। यह अनुभव अवसाद का एक बड़ा कारण होता है। इसलिए हर रोज अपने पसंद की किताबें पढ़ते रहें।
योग एवं प्राणायाम केवल शारीरिक व्यायाम ही नहीं है, बल्कि यह मानसिक व्यायाम भी है। इससे तन और मन का संतुलन कायम करने में मदद मिलती है। अगर किसी भी वजह से तनाव में रहते हैं तो हर रोज सुबह कम से कम 15 मिनट प्राणायाम करें। यह आपको तनाव मुक्त करने में मदद करेगा।
सैर करना, खेलना, तैरना या लाफ्टर क्लब में ठहाके लगाना ये ऐसी शारीरिक क्रियाएं हैं जो आपको तन-मन से तरोताजा कर देती हैं। इससे आपके मस्तिष्क से हैप्पी हॉर्मोन का स्राव होता है जो आपको अल्जाइमर्स जैसी मानसिक बीमारियों से दूर रखता है।
दोस्ती की कोई उम्र नहीं होती। आप इस उम्र में ये न समझें कि संबंधों से भी रिटायरमेंट का समय आ गया है। दोस्त बनाएं, फिर चाहें वे किसी भी उम्र के हों। हर उम्र का दोस्त आपके जीवन से जुड़े अनुभवों में इजाफा करता है। खासतौर से बच्चे आपको एनर्जी और आइडियाज से खाली नहीं होने देते।