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Written By: Yogita Yadav | Published : September 21, 2018 8:39 AM IST
इसके लिए सावधानियां और व्यायाम ज़रूर हैं, जो इस बीमारी में काफ़ी हद तक नियंत्रण में रखते हैं। © Shutterstock
आधुनिक जीवनशैली में बढ़ते तनाव और अवसाद के कारण कई नए तरह के रोगों से लोगों का सामना हो रहा है। जिन्हें अभी तक बढ़ती उम्र के संकेत समझकर अब तक नजरंदाज किया जाता रहा था, वही लक्षण जब युवाओं और अधेड़ उम्र लोगों में नजर आने लगे तो इसने स्वास्थ्य जगत का ध्यान खींचा। इन्हीं रोगों में से एक है अल्जाइमर। जिसके कारण व्यक्ति का जीवन कठिनाइयों से भर जाता है।
'विश्व अल्जाइमर दिवस' पूरे विश्व में मनाया जाने वाला दिवस है। अल्जाइमर रोग का सबसे समान्य रूप डिमेंशिया है। यह निरंतर बढ़ता जने वाला मस्तिष्क का रोग है। अल्जाइमर रोग और डिमेंशिया के बारे में जागरूकता प्रसारित करने के लिए अब दुनिया भर में 21 सिंतबर को विश्व अल्जाइमर दिवस मनाया जाने लगा है।
जरूरी है जानना
1906 में जर्मन के न्यूरोलॉजिस्ट एलोइस अल्जाइमर ने इस बीमारी का पता लगाया था और इन्हीं के नाम पर इस बीमारी को ‘अल्जाइमर(Alzheimer) कहा जाता है। अल्जाइमर एक मस्तिष्क रोग है। यह मस्तिष्क की कोशिकाओं को नष्ट कर देता है, जिसके कारण याददाश्त में कमी और परिवर्तन, अनियमित व्यवहार तथा शरीर की प्रक्रियाओं को नुकसान पहुंचता है।
विश्व अल्जाइमर दिवस
विश्व अल्जाइमर दिवस (World Alzheimer's Day) हर साल 21 सितम्बर को मनाया जाने लगा है। यह दिवस अल्जाइमर रोग और डिमेंशिया के बारे में जागरूकता प्रसारित करने के लिए मनाया जाता है। वर्ष 2016 में विश्व अल्जाइमर दिवस अभियान का विषय था- "मुझे याद रखें"। इस दिन का उद्देश्य विश्व भर के लोगों को डिमेंशिया के लक्षणों का पता लगाने के लिए प्रोत्साहित करना ही नहीं है, अपितु इसका उद्देश्य डिमेंशिया से पीड़ित रोगियों अथवा इस बीमारी के कारण मृत्यु को प्राप्त होने वाले रोगियों को भी न भूलना है।
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सावधानी है जरूरी
स्मरण शक्ति कमज़ोर करने वाली यह बीमारी ज्यादातर बुजुर्गों को होती है, लेकिन कई बार इसके लक्षण युवाओं में भी पाये जाते हैं, इसलिए जागरूकता और इसका उचित इलाज बेहद आवश्यक है। हालाँकि, इस बीमारी के लिए कोई प्रॉपर इलाज अब तक विकसित नहीं किया जा सका है, लेकिन इसके लिए सावधानियां और व्यायाम ज़रूर हैं, जो इस बीमारी में काफ़ी हद तक सहायक साबित होते हैं।