काम का बढ़ता प्रेशर, क्या 30-40 की उम्र में बढ़ रहा हार्ट अटैक का खतरा?

बढ़ते कंपटीशन की वजह से लोगों में काम का प्रेशर भी काफी ज्यादा बढ़ रहा है, जिसकी वजह से हार्ट डिजीज का भी खतरा बढ़ने लगता है। आइए डॉक्टर से समझते हैं इस विषय के बारे में-

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Written By: Kishori Mishra | Published : April 21, 2026 8:39 PM IST

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Medically Verified By: Dr. Anshu Kabra

आज की तेज रफ्तार जिंदगी में काम का दबाव लगातार बढ़ता जाता है। मुख्य रूप से 30 से 40 साल की उम्र के लोग करियर, परिवार और सामाजिक जिम्मेदारियों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश करते हैं। इस दौरान शरीर पर पड़ने वाला मानसिक और शारीरिक तनाव अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है। लेकिन यही तनाव दिल की सेहत पर गहरा असर डालता है और हार्ट अटैक के खतरे को बढ़ावा दे सकता है। जपयुर स्थित नारायणा हॉस्पिटल के एडिशनल डायरेक्टर कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. अंशु काबरा का कहना है कि आज के दौर में लोगों को काम का प्रेशर काफी ज्यादा हो रहा है, इसका कारण बढ़ता कंपटीशन है। लेकिन इसका असर लोगों के स्वास्थ्य पर भी पड़ता नजर आ रहा है। मुख्य रूप से काम की वजह से बढ़ता प्रेशर हार्ट अटैक का कारण बन रहा है। आइए विस्तार से जानते हैं इस बारे में-

क्यों कम उम्र में बढ़ रहा है हार्ट अटैक का खतरा?

पहले हार्ट अटैक को बढ़ती उम्र की समस्या माना जाता है, लेकिन अब यह धारणा लोगों में बदलती दिख रही है। क्योंकि हमारे सामने कई ऐसे केस आए हैं, जिसमें महज  30-40 की उम्र में लोगों की हार्ट अटैक से जान गई हो। डॉक्टर इसका मुख्य कारण बदलती लाइफस्टाइल  बताते हैं।

इस उम्र के लोग अक्सर लंबे समय तक बैठकर काम करते हैं, फिजिकल एक्टिविटी कम हो जाती है और खानपान में जंक फूड की मात्रा बढ़ जाती है। इसके साथ ही नींद की कमी और लगातार तनाव दिल पर अतिरिक्त दबाव डालता है। शरीर में कोलेस्ट्रॉल और ब्लड प्रेशर का स्तर धीरे-धीरे बढ़ता है, जो आगे चलकर हार्ट अटैक का कारण बनता है।

दिल पर क्या असर डालता है तनाव?

काम का बढ़ता प्रेशर शरीर में स्ट्रेस हार्मोन को बढ़ाता है। यह हार्मोन ब्लड प्रेशर को बढ़ाता है और हार्ट की धड़कन को तेज करता है। लंबे समय तक ऐसा होने पर दिल की मांसपेशियों पर असर पड़ता है। स्ट्रेस के कारण लोग अक्सर गलत आदतों की तरफ भी बढ़ते हैं जैसे स्मोकिंग, ज्यादा कैफीन लेना या ओवरईटिंग करना। ये सभी आदतें दिल की सेहत को और खराब करती हैं।

खराब लाइफस्टाइल भी है जिम्मेदार

आज की व्यस्त जिंदगी में हेल्दी रूटीन को बनाए रखना चुनौती बन जाता है। कई लोग सुबह का नाश्ता छोड़ देते हैं, देर रात तक काम करते हैं और फास्ट फूड पर निर्भर रहते हैं। शरीर को जरूरी पोषण नहीं मिलता और वजन बढ़ने लगता है। मोटापा, डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर जैसे जोखिम कारक इसी उम्र में विकसित होने लगते हैं। ये सभी मिलकर हार्ट अटैक का खतरा कई गुना बढ़ा देते हैं।

कम उम्र में हार्ट अटैक के लक्षण कभी-कभी हल्के रूप में सामने आते हैं, इसलिए लोग इन्हें नजरअंदाज कर देते हैं। सीने में हल्का दर्द, सांस फूलना, असामान्य थकान, कंधे या जबड़े में दर्द जैसे संकेत शरीर पहले ही देता है। इन लक्षणों को समय पर पहचानना बेहद जरूरी होता है। अगर इन्हें नजरअंदाज किया जाता है तो स्थिति गंभीर हो सकती है।

बचाव के लिए जरूरी कदम

दिल की सेहत को बनाए रखने के लिए लाइफस्टाइल में छोटे लेकिन जरूरी बदलाव किए जाने चाहिए।

  1. कोशिश करें कि रोजाना कम से कम 30 मिनट की फिजिकल एक्टिविटी को शामिल करें।
  2. संतुलित आहार लेना और प्रोसेस्ड फूड से दूरी बनाना फायदेमंद होता है।
  3. स्ट्रेस को मैनेज करना भी उतना ही जरूरी होता है।
  4. योग, मेडिटेशन और पर्याप्त नींद से मानसिक संतुलन बनाए रखा जाता है।
  5. इसके अलावा नियमित हेल्थ चेकअप से शरीर की स्थिति पर नजर रखी जाती है।

जागरूकता ही है सबसे बड़ा बचाव

30-40 की उम्र में हार्ट अटैक का खतरा बढ़ता दिखता है, लेकिन सही समय पर जागरूकता और सावधानी से इसे रोका जा सकता है। शरीर के संकेतों को समझना और समय रहते कदम उठाना दिल की सेहत को लंबे समय तक सुरक्षित रखता है।

Disclaimer : काम जरूरी होता है, लेकिन सेहत उससे भी ज्यादा जरूरी होती है। संतुलित जीवनशैली अपनाकर दिल को मजबूत और सुरक्षित रखा जाता है।

FAQs

हार्ट पेशेंट को क्या-क्या सावधानी बरतनी चाहिए?

हार्ट पेशेंट को हेल्दी लाइफस्टाइल को फॉलो करना चाहिए। हेल्दी डाइट लें और रेगुलर एक्सरसाइज जरूर करें। हार्ट की रेगुलर चेकअप जरूर कराएं।

हेल्दी हार्ट के लिए क्या खाएं?

हार्ट हेल्थ में सुधार करने के लिए आपको एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर फूड्स खाना चाहिए। आप फलों, सब्जियों और साबुत अनाज का सेवन कर सकते हैं।

क्या बच्चों में हार्ट अटैक हो सकता है

हां बच्चों में भी हार्ट अटैक आना संभव है, हालांकि, इसके मामले वयस्कों की तुलना में दुर्लभ होते हैं।

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