Advertisement

20 की उम्र में ही कमजोर हो रही है महिलाओं की ओवरी, जानें क्यों बढ़ रहे हैं मामले

आजकल कई महिलाओं में मां बनने की क्षमता प्रभावित हो रही है, जिसका एक बड़ा कारण ओवरी का कमजोर होना भी है। लेकिन ऐसा क्यों हो रहा है? आइए डॉक्टर से जानते हैं।

Written By Vidya Sharma
Published : July 17, 2026 3:51 PM IST

Premature Ovarian Failure

25 से 30 सील की महिलाओं में समय से पहले ओवरी की काम करने की क्षमता कम होने की समस्या तेजी से बढ़ रही है। इसे प्रीमैच्योर ओवेरियन फेल्योर या प्राइमरी ओवेरियन इंसफिशिएंसी कहा जाता है। अगर इसकी समय पर पहचान न हो, तो यह फर्टिलिटी, हार्मोनल हेल्थ और पूरी हेल्थ को प्रभावित कर सकती है।

नोवा आईवीएफ फर्टिलिटी सेंटर, पुणे की फर्टिलिटी एक्सपर्ट डॉक्टर रश्मि निफाडकर कहती हैं “पहले यह समस्या 30 वर्ष से कम उम्र की महिलाओं में बहुत कम देखी जाती थी। लेकिन अब 25-26 साल की महिलाओं में भी इसके मामले सामने आ रहे हैं। इस स्थिति में 40 साल की उम्र से पहले ही ओवरी की कार्यक्षमता काफी कम हो जाती है।” लेकिन ऐसा क्यों हो रहा है? आइए विस्तार से जानते हैं।

Advertisement

क्या है प्रीमैच्योर ओवेरियन फेल्योर?

प्रीमैच्योर ओवेरियन फेल्योर तब होता है, जब ओवरी अंडाणु और एस्ट्रोजन जैसे जरूरी हार्मोन पर्याप्त मात्रा में बनाना बंद कर देती है। इससे महिलाओं की प्रजनन क्षमता प्रभावित हो सकती है और शरीर में कई तरह के बदलाव दिखाई दे सकते हैं। लक्षणों की बात करें तो डॉक्टर ने कुछ संकेत बताए हैं जिनकी मदद से इस समस्या की पहचान की जा सकती है।

  • पीरियड्स का अनियमित होना 
  • कई महीनों तक पीरियड्स न आना 
  • गर्भधारण में कठिनाई 
  • शरीर में अचानक गर्मी महसूस होना (हॉट फ्लैशेज) 
  • मूड में बदलाव 
  • नींद से जुड़ी समस्याएं 
  • योनि में सूखापन 
  • हड्डियों की कमजोरी 

कुछ महिलाओं में कभी-कभी ओव्यूलेशन हो सकता है, लेकिन गर्भधारण करने की क्षमता काफी प्रभावित हो सकती है।

Advertisement

किन कारणों से बढ़ रही है समस्या?

डॉक्टर रश्मि निफाडकर के अनुसार, इस समस्या के पीछे कई कारण हो सकते हैं, जैसे

  • आनुवंशिक कारण 
  • ऑटोइम्यून बीमारियां 
  • बदलती जीवनशैली 
  • लगातार तनाव 
  • पर्यावरण से जुड़े कारक 
  • धूम्रपान 
  • कुछ प्रकार के चिकित्सा उपचार 
  • हार्मोनल असंतुलन

समय पर जांच क्यों है जरूरी?

डॉक्टर रश्मि कहती हैं, "कई युवा महिलाएं यह मानती हैं कि फर्टिलिटी से जुड़ी समस्याएं सिर्फ अधिक उम्र में होती हैं, इसलिए वे शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज कर देती हैं। लेकिन समय पर जांच और पहचान न होने से भविष्य में कंसीव करने की संभावनाओं को सुरक्षित रखने के अवसर कम हो सकते हैं और उपचार में भी देरी हो सकती है।"

हर महीने आ रहे हैं नए मामले

डॉक्टर ने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि "हम 24 से 30 साल की उम्र की महिलाओं में इस समस्या का निदान पहले की तुलना में अधिक कर रहे हैं। वर्तमान में हमारे पास हर महीने लगभग तीन से चार ऐसे मामले आते हैं। कई महिलाएं तो तब डॉक्टर के पास पहुंचती हैं, जब उन्हें गर्भधारण करने में परेशानी होती है या लंबे समय तक उनके पीरियड्स अनियमित रहते हैं।"

फर्टिलिटी के साथ हेल्थ पर भी पड़ता है असर

डॉक्टर रश्मि ने कहा कि यह समस्या सिर्फ फर्टिलिटी को ही प्रभावित नहीं करती, बल्कि मेंटल हेल्थ, हड्डियों के स्वास्थ्य और लंबे समय तक हार्मोनल संतुलन पर भी असर डाल सकती है। इसलिए मासिक धर्म में होने वाले किसी भी बदलाव को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए, खासकर युवा महिलाओं को। 

आज की महिलाएं करियर, काम का दबाव, तनाव, बदलती जीवनशैली और देर से परिवार शुरू करने जैसी कई चुनौतियों का सामना कर रही हैं। हालांकि ये कारण सीधे तौर पर प्रीमैच्योर ओवेरियन फेल्योर का कारण नहीं बनते, लेकिन प्रजनन स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकते हैं।

डिस्क्लेमर: कम उम्र की महिलाओं में इस समस्या के बढ़ते मामलों को देखते हुए डॉक्टरों ने महिलाओं से अपील की है कि वे इस गलत धारणा को छोड़ें कि गर्भधारण से जुड़ी समस्याएं केवल अधिक उम्र की महिलाओं को ही प्रभावित करती हैं। जागरूकता, समय पर जांच और सही उपचार से महिलाओं की प्रजनन क्षमता को सुरक्षित रखने के साथ-साथ उनके दीर्घकालिक स्वास्थ्य को भी बेहतर बनाया जा सकता है।