ज़्यादा वजाइनल डिस्चार्ज क्या किसी बीमारी का संकेत है?

बहुत अधिक वजाइनल डिस्चार्ज कई बार किसी इंफेक्शन या किसी बीमारी का भी संकेत हो सकता है।

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Written By: Sadhna Tiwari | Updated : August 30, 2018 2:53 PM IST

महिलाओं को होनेवाला वजाइनल डिस्चार्ज एक शारीरिक प्रक्रिया है और शरीर के काम करने का तरीका भी। सर्विक्स और वजाइना में स्थित दीवारें एक सफ़ेद पदार्थ बनाकर उन अंगों को स्वस्थ और कीटाणु मुक्त रखती हैं। हालांकि डिस्चार्ज की मात्रा, रंग और स्थिरता हर महिला के लिए अलग है।

‘वजाइनल डिस्चार्ज एक आम और नार्मल बात है। जो दर्शाता है कि शरीर के अंदर मौज़ूद ग्लैंड अच्छी तरह काम कर रहे हैं और हार्मोन्स बनने की प्रक्रिया भी साधारण तरीके से चल रही है’। यह कहना है पारस हॉस्पिटल, गुड़गांव की कंसल्टेंट गाइनकलॉजिस्ट डॉ. पूजा खत्री मेहता का। हालांकि बहुत अधिक वजाइनल डिस्चार्ज कई बार किसी इंफेक्शन या किसी बीमारी का भी संकेत हो सकता है।

ऐसी बहुत सी स्थितियां हैं जब कुछ शारीरिक बदलावों के कारण व्हाइट डिस्चार्ज या अत्यधिक डिस्चार्ज हो सकता है। ऐसे ही कुछ कारण हैं-

  1. ओव्यलैशन- वजाइन की दीवारों और ग्लैंड्स के अलावा हार्मोन्स भी व्हाइट डिस्चार्ज में एक अहम भूमिका निभाते हैं। ओव्यलैशन के समय शरीर में प्रोजेस्टरोन का स्तर बढ़ जाता है जिसकी वजह से वजाइन से भारी और लगातार डिस्चार्ज होता रहता है। प्रजनन करने के लिहाज से यह एक स्वस्थ और साधारण प्रक्रिया है। इसी वजह से पीरियड्स से कुछ दिनों पहले महिलाओं को पारदर्शी डिस्चार्ज दिखायी पड़ता है जो कई दिनों तक होता रहता है।
  2. सेक्सुअल उत्तेजना- अच्छे इंटरकोर्स के लिए प्राकृतिक रुप से वजाइन डिस्चार्ज के रुप में एक लुब्रिकेंट का निर्माण किया जाता है। सेक्स के लिए उत्तेजित करनेवाले हार्मोन्स ही इस सफेद डिस्चार्ज का निर्माण करते हैं।  कई बार यह डिस्चार्ज बहुत अधिक हो सकता है।
  3. प्रेगनेंसी- प्रेगनेंसी के दौरान हल्की गंध के साथ सफेद दूधिया डिस्चार्ज एक आम बात है। प्रेगनेंसी के दौरान होनेवाले हार्मोनल बदलावों के कारण यह डिस्चार्ज काफी अधिक भी हो सकता है। भले ही आपको यह अच्छा न लगे लेकिन इसका एक अनजाना-सा फायदा भी है। जी हां, यही डिस्चार्ज आपको मूत्र विकारों से बचाता है जिनकी संभावना प्रेगनेंसी के दौरान काफी बढ़ जाती है। यह अच्छे बैक्टेरिया के लिए अनुकूल परिस्थितियां बनाता है। यही नहीं लेबर से पहले डिस्चार्ज की मात्रा बढ़ भी सकती है जो नॉर्मल डिलिवरी में मददगार होता है। बस प्रेगनेंसी के दौरान यह चिंता का कारण तब बनता है जब डिस्चार्ज के साथ आपको खून के धब्बे और धक्के दिखायी दें।
  4. तनाव- आधुनिक जीवनशैली में महिलाएं आसानी से तनाव का शिकार हो जाती हैं। जिसका उनकी सेहत पर असर पड़ता है। तनाव हमारे शरीर में हार्मोन्स के असंतुलन का एक बड़ा कारण बनता है जिसकी वजह से वजाइनल डिस्चार्ज हो सकता है। वैसे तो तनाव की वजह से होनेवाला डिस्चार्ज भी साधारण बात मानी जाती है लेकिन एक अच्छी जीवनशैली और अच्छी सेहत के लिए तनाव दूर करने के उपाय आपको करने चाहिए।
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