
आशु कुमार दास
आशु कुमार दास एक अनुभवी हेल्थ कंटेंट स्पेशलिस्ट हैं। इन्हें हेल्थ कंटेंट राइटर के तौर पर काम करते हुए 6 ... Read More
Medically Verified By: dr. vaishali zamre
भारतीय महिलाओं में कैंसर के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं।
आज की महिला घर और ऑफिस दोनों की जिम्मेदारियों को बखूबी निभा रही है। सुबह से लेकर देर रात तक परिवार, बच्चों और नौकरी के बीच संतुलन बनाते-बनाते वह अक्सर अपनी सेहत को सबसे आखिर में रख देती है। कई बार शर्म, झिझक, समय की कमी या फिर "सब ठीक हो जाएगा" जैसी सोच के कारण महिलाएं शरीर में दिखाई देने वाले शुरुआती संकेतों को भी नजरअंदाज कर देती हैं। लेकिन यही लापरवाही आगे चलकर गंभीर बीमारियों, खासकर कैंसर का कारण बन सकती है।
नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन की रिसर्च बताती है कि महिलाओं में होने वाले कई प्रकार के कैंसर की समय रहते पहचान हो जाए तो उनका इलाज पूरी तरह से किया जा सकता है। कैंसर की पहचान के लिए महिलाओं को शरीर में होने वाले छोटे- छोटे बदलावों पर ध्यान देना जरूरी है। हरियाणा के सोनीपत स्थित एंडोमेड्रा अस्पताल की सीनियर ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. वैशाली जामरे का कहना है बता रही हैं भारतीय महिलाओं में कौन- कौन से कैंसर तेजी से बढ़ रहे हैं।
डॉ. वैशाली जामरे बताती हैं कि ब्रेस्ट कैंसर महिलाओं में सबसे अधिक पाए जाने वाले कैंसरों में शामिल है। यह 25 से 65 वर्ष की महिलाओं में ज्यादा देखने को मिलता है। हालांकि यह किसी भी उम्र में हो सकता है, इसलिए हर महिला को अपने स्तनों में होने वाले बदलावों पर नजर रखनी चाहिए।
भारतीय महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं।
महिलाओं में दूसरा सबसे आम कैंसर सर्वाइकल कैंसर है। यह मुख्य रूप से ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (HPV) संक्रमण से जुड़ा होता है। अच्छी बात यह है कि नियमित जांच और HPV वैक्सीन की मदद से इस कैंसर के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
ओवेरियन कैंसर को शुरुआती चरण में पहचानना आसान नहीं होता क्योंकि इसके लक्षण सामान्य पाचन संबंधी समस्याओं जैसे लग सकते हैं। यही कारण है कि अक्सर इसका पता देर से चलता है।
यदि ये लक्षण लगातार कई सप्ताह तक बने रहें तो डॉक्टर से जांच जरूर करवाएं। डॉ. वैशाली कहती हैं कि महिलाओं को अपने शरीर में लगातार पीरियड्स या पेशाब से जुड़ी कोई समस्या नजर आती है तो इस बारे में डॉक्टर से बात करना जरूरी है।
यूटेराइन या एंडोमेट्रियल कैंसर गर्भाशय की अंदरूनी परत में विकसित होता है। यह विशेष रूप से रजोनिवृत्ति (मेनोपॉज) के बाद की महिलाओं में ज्यादा देखा जाता है।
डॉक्टर के अनुसार, महिलाओं को शरीर में होने वाले किसी भी असामान्य बदलाव को हल्के में नहीं लेना चाहिए। यदि लगातार दर्द, असामान्य ब्लीडिंग, अचानक वजन कम होना या लंबे समय तक कोई परेशानी बनी रहती है तो इस बारे में डॉक्टर से बात करना जरूरी है। महिलाओं के लिए आज के दौर में ऑफिस का काम बहुत जरूरी है। लेकिन इसके साथ ही जरूरी है कि वो कैंसर जैसी घातक बीमारी से बचाव करने के लिए समय-समय पर मैमोग्राफी, पैप स्मीयर टेस्ट और पेल्विक एग्जाम जैसी स्क्रीनिंग करवाएं। इस तरह की स्क्रीनिंग से कैंसर का शुरुआती चरण में पता लगाया जा सकता है, जिससे इलाज की सफलता की संभावना बेहतर होती है।
डॉ. वैशाली जामरे कहती हैं कि महिलाओं में कैंसर का खतरा कम करने के लिए कुछ खास उपायों को अपनाना जरूरी है। इसमें शामिल हैः
दिन या रात के समय संतुलित और पौष्टिक भोजन करें।
रोजाना कम से कम 30 मिनट किसी प्रकार की एक्सरसाइज करें।
पर्याप्त और गुणवत्तापूर्ण नींद लें।
तनाव कम करने के लिए योग और मेडिटेशन करें।
धूम्रपान और शराब से दूरी बनाए रखें।
नियमित हेल्थ चेकअप को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं।
Disclaimer: यह जानकारी सिर्फ आपकी सामान्य समझ बढ़ाने के लिए है। अगर आपको कोई स्वास्थ्य संबंधी परेशानी या लक्षण हैं, तो बिना देरी किए डॉक्टर से सलाह लें और खुद से इलाज न करें।