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Winter Health Problems In Pregnancy: सर्दियों का मौसम जिस तरह से हर स्वस्थ व्यक्ति के लिए भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं पैदा कर देते हैं। ऐसे में गर्भवती महिलाओं को भी काफी समस्याएं होने लगती हैं। डॉ. मितुल गुप्ता, सीनियर कंसल्टेंट, ऑब्सटेट्रिक्स एंड गायनेकोलॉजी, कोकून हॉस्पिटल, जयपुर प्रेगनेंसी के दौरान महिलाओं के शरीर में कई तरह के बदलाव होते हैं, जिनका असर उनकी इम्यूनिटी, पाचन, खून के बहाव और हार्मोन पर पड़ता है। सर्दियों में ये बदलाव और ज्यादा महसूस होते हैं, क्योंकि ठंड, धूप की कमी और बढ़ते संक्रमण गर्भवती महिलाओं को जल्दी प्रभावित कर सकते हैं। लेकिन सही देखभाल, डॉक्टर की सलाह और समय पर जीवनशैली में छोटे-छोटे बदलाव करके सर्दियों में होने वाली ज्यादातर समस्याओं से आसानी से बचा जा सकता है। इस लेख में सर्दियों के मौसम के दौरान गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभाव के बारे में बताया जा रहा है।
सर्दियों में फ्लू, ब्रोंकाइटिस और निमोनिया जैसी सांस से जुड़ी बीमारियों के मामले तेजी से बढ़ जाते हैं। प्रेगनेंसी के दौरान महिला की इम्यूनिटी में बदलाव होता है, ताकि गर्भ में पल रहे शिशु की सुरक्षा हो सके, लेकिन इसी वजह से मां की संक्रमण से लड़ने की क्षमता कुछ कम हो जाती है। बढ़ता हुआ गर्भाशय फेफड़ों की जगह को कम कर देता है, जबकि शरीर को ऑक्सीजन की जरूरत बढ़ जाती है, जिससे सांस की समस्याएं ज्यादा गंभीर हो सकती हैं। ठंडी हवा सांस की नलियों को सूखा और संवेदनशील बना देती है, वहीं घर के अंदर हीटर के इस्तेमाल से नमी कम हो जाती है और सर्दियों में प्रदूषण का स्तर भी बढ़ जाता है। ये सभी कारण मिलकर गर्भवती महिलाओं में सांस की तकलीफ का खतरा बढ़ा देते हैं।
डॉ. मितुल गुप्ता ने बताया कि गर्भवती महिलाओं को सर्दियों में पर्याप्त मात्रा में पानी पीते रहना चाहिए, ज्यादा प्रदूषण वाले समय में बाहर निकलने से बचना चाहिए और घर के कमरों को हवादार रखना चाहिए। अगर लगातार खांसी, बुखार, सीने में दर्द या सांस लेने में तकलीफ महसूस हो, तो बिना देरी किए डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है। ऐसी स्थिति में समय पर जांच और इलाज कराने से मां और गर्भ में पल रहे बच्चे दोनों के लिए जटिलताओं का खतरा काफी हद तक कम किया जा सकता है।
गर्भवती महिलाओं में विटामिन D की कमी आम समस्या है और सर्दियों में धूप कम मिलने की वजह से यह कमी और बढ़ जाती है। विटामिन D की पर्याप्त मात्रा मां और बच्चे दोनों के लिए बेहद जरूरी होती है, क्योंकि यह हड्डियों के विकास, इम्यूनिटी को मजबूत रखने और शरीर के मेटाबॉलिज्म को संतुलित करने में अहम भूमिका निभाती है। विटामिन D का स्तर कम होने पर गर्भकालीन डायबिटीज, प्रीक्लेम्पसिया, ज्यादा थकान, भ्रूण की हड्डियों का सही विकास न होना और रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होने जैसी समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है।
सर्दियों में ज्यादातर समय घर के अंदर रहना और शरीर को पूरी तरह ढक कर रखना, त्वचा में विटामिन D बनने की प्रक्रिया को कम कर देता है। इसलिए गर्भवती महिलाओं को ऐसे संतुलित आहार पर ध्यान देना चाहिए, जिसमें विटामिन D से भरपूर खाद्य पदार्थ शामिल हों। इसके साथ ही, ब्लड टेस्ट के बाद डॉक्टर की सलाह से सही सप्लीमेंट लेना भी जरूरी होता है। देर सुबह की हल्की धूप में कुछ समय सुरक्षित तरीके से बैठना विटामिन D के स्तर को बेहतर बनाए रखने में काफी फायदेमंद हो सकता है।
प्रेगनेंसी के दौरान हाई ब्लड प्रेशर एक गंभीर समस्या हो सकती है और सर्दियों में ठंड के कारण नसें सिकुड़ने से ब्लड प्रेशर बढ़ने की आशंका और ज्यादा हो जाती है। जिन महिलाओं को पहले से हाई बीपी की समस्या नहीं रही होती, उनमें भी इस मौसम में ब्लड प्रेशर में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है, जबकि पहले से हाइपरटेंशन से जूझ रही महिलाओं को विशेष निगरानी की जरूरत होती है। सिरदर्द, हाथ-पैर या चेहरे पर सूजन, आंखों से धुंधला दिखना और अचानक वजन बढ़ना जैसे लक्षणों को कभी भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
सर्दियों में अक्सर नमकीन चीजें ज्यादा खाने, शारीरिक गतिविधि कम होने और तनाव बढ़ने से भी ब्लड प्रेशर असंतुलित हो सकता है। इसलिए नियमित एंटीनेटल चेकअप कराना, घर पर बीपी की निगरानी रखना, अचानक ज्यादा ठंड में जाने से बचना, पूरी नींद लेना और डॉक्टर द्वारा सुझाए गए डाइट प्लान का पालन करना बेहद जरूरी है, ताकि किसी भी तरह की जटिलता से बचा जा सके।
35 वर्ष से अधिक उम्र में होने वाली प्रेगनेंसी के दौरान पूरे साल विशेष निगरानी की जरूरत होती है, लेकिन सर्दियों में इससे जुड़ी चिंताएं और बढ़ जाती हैं। अधिक उम्र की गर्भवती महिलाओं में पहले से ही गर्भकालीन डायबिटीज, क्रोमोसोमल असामान्यताएं, हाई ब्लड प्रेशर और समय से पहले डिलीवरी का खतरा अधिक रहता है। ठंड के मौसम में सांस से जुड़ी संक्रमण, पोषण की कमी और शारीरिक गतिविधि कम होने से ये जोखिम और बढ़ सकते हैं। ऐसे में इन महिलाओं के लिए बार-बार एंटीनेटल चेकअप कराना, समय पर जरूरी जांचें करवाना और ऐसा पोषण प्लान अपनाना बेहद जरूरी हो जाता है, जिससे विटामिन D, आयरन और कैल्शियम की पर्याप्त मात्रा मिल सके। घर के अंदर नियमित हल्की एक्सरसाइज करना, संक्रमण से बचाव के उपाय अपनाना और ब्लड प्रेशर व शुगर लेवल की लगातार निगरानी सुरक्षित गर्भावस्था में मदद करती है।
सर्दियों का मौसम प्रेग्नेंट महिलाओं के लिए कई तरह की चुनौतियां लेकर आता है, लेकिन सही जानकारी, समय पर मेडिकल देखभाल और वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित प्रीनेटल केयर अपनाकर इन जोखिमों को काफी हद तक कम किया जा सकता है। सांस की साफ-सफाई पर ध्यान देना, पोषण की स्थिति की नियमित जांच करना और खासतौर पर अधिक उम्र की गर्भवती महिलाओं के लिए लगातार डॉक्टर की निगरानी सुनिश्चित करना जरूरी है। विशेषज्ञों की सही गाइडेंस से सर्दियों में भी गर्भावस्था को सुरक्षित और स्वस्थ रखा जा सकता है, जिससे मां और बच्चे दोनों का बेहतर स्वास्थ्य सुनिश्चित हो सके।
अस्वीकरण: प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।