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Medically Verified By: Dr. Shrey Srivastava
Thyroid Disease in Hindi: थायराइड गले के सामने स्थित एक ग्रंथि होती है। यह बेहद छोटी और तितली के आकार की होती है। यह शरीर के कई जरूरी कार्यों को नियंत्रित करती है। इसका मुख्य काम शरीर में थायराइड हार्मोन (T3 और T4) का निर्माण करना होता है। ये दोनों हार्मोन शरीर के मेटाबॉलिज्म को नियंत्रित करते हैं। ये दिल की धड़कन को नियमित रखते हैं और दिमागी विकास के लिए जरूरी होते हैं। इनके अलावा, थायराइड हार्मोन पाचन-तंत्र, मसल्स और हड्डियों के लिए भी बेहद जरूरी होते हैं। इसलिए थायराइड हार्मोन का सही तरीके से कार्य करना बहुत जरूरी होता है। जब थायराइड ग्रंथि सही तरीके से काम नहीं कर पाती है, तो इससे थायराइड हार्मोन का उत्पादन नहीं हो पाता है। इसका असर संपूर्ण स्वास्थ्य पर पड़ता है। खासकर, थायराइड हार्मोन की गड़बड़ी वजन को सीधे तौर पर प्रभावित करती है। हाइपोथायराइडिज्म की स्थिति में रोगी का वजन तेजी से बढ़ने लगता है। तो आइए, आज शारदा हॉस्पिटल के सीनियर कंसल्टेंट-इंटरनल मेडिसिन के डॉ. श्रेय श्रीवास्तव से जानते हैं कि थायराइड बढ़ने पर वजन क्यों बढ़ने लगता है (Thyroid me Vajan Kyu Badhta Hai)?
आपको बता दें कि जब जब थायराइड ग्रंथि हार्मोन का उत्पादन कम मात्रा में करती है, तो इस स्थिति को हाइपोथायराइडिज्म कहा जाता है। हाइपोथायराइडिज्म की स्थिति में व्यक्ति का वजन तेजी से बढ़ने लगता है। थायराइड ग्रंथि शरीर के मेटाबॉलिज्म को सीधे तौर पर नियंत्रित करती है। जब थायराइड ग्रंथि ठीक से काम नहीं करती है, तो इसका सीधा असर वजन पर पड़ता है। वजन बढ़ना, हाइपोथायराइडिज्म का एक सबसे आम लक्षण होता है। हाइपोथायराइडिज्म के रोगियों का वजन तेजी से बढ़ता है और वे मोटापे के शिकार हो सकते हैं। दरअसल, ऐसा कई कारणों से होता है। इसमें शामिल हैं-
जब थायराइड हार्मोन का उत्पादन कम होता है, तो मेटाबॉलिज्म धीमा हो जाता है। इस स्थिति में शरीर की कैलोरी बर्न करने की प्रक्रिया धीमी हो जाती है। इससे जो भी आप खाते हैं, वो शरीर में जमा होने लगता है और फैट बढ़ने लगता है। मेटाबॉलिज्म धीमा होने से शरीर खाने को ऊर्जा में बदलने के बजाय फैट के रूप में जमा करने लगता है। यही वजह है कि हाइपोथायराइडिज्म में वजन बढ़ने लगता है।
शरीर में थायराइड हार्मोन की कमी से शरीर में नमक और पानी की प्रक्रिया प्रभावित होने लगती है। इससे शरीर में सूजन होने लगती है। साथ ही, वजन भी तेजी से बढ़ने लगता है। हाइपोथायराइडिज्म की वजह से शरीर फैट को बर्न करने के बजाय, फैट को स्टोर करने लगता है। इससे वजन बढ़ जाता है।
थायराइड रोगियों को थकान और कमजोरी का अनुभव ज्यादा होने लगता है। इसकी वजह से वे शारीरिक रूप से सक्रिय नहीं रहते हैं। एक्सरसाइज और योग पर ध्यान नहीं दे पाते हैं। इससे तेजी से वजन बढ़ने लगता है और व्यक्ति मोटापे का शिकार होता है।
आपको बता दें कि देश में थायराइड के मामलों में लगातार वृद्धि देखने को मिल रही है। पीआईबी की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत आयोडीन की कमी से उबर चुका है। लेकिन, आयोडीन की खुराक को ऑटोइम्यून थायरॉइड डिसफंक्शन और हाइपोथायरायडिज्म में वृद्धि से जुड़ा माना जाता है।
अगर थायराइड है और तेजी से वजन बढ़ रहा है, तो इसे नियंत्रण में रखने के लिए आपको कुछ चीजों का ध्यान रखना बहुत जरूरी होता है।
अगर आपको थायराइड है और तेजी से वजन बढ़ रहा है, तो नियमित रूप से दवा का सेवन जरूर करें। थायराइड रोगियों को डॉक्टर कुछ दवा लिख सकते हैं, जिससे थायराइड हार्मोन की कमी हो सके और वजन नियंत्रण में रहे। इस दवा को नियमित रूप से खाली पेट लेना जरूरी होता है। नियमित रूप से डॉक्टर द्वारा दी गई दवा का सेवन जरूर करें।

वैसे तो थायराइड रोग महिलाओं और पुरुषों, दोनों को हो सकता है। लेकिन, महिलाओं में पुरुषों की तुलना में थायराइड के मामले ज्यादा देखने को मिलते हैं। इसके पीछे कई कारण जिम्मेदार हैं-
हाइपोथायरायडिज्म में थायराइड हार्मोन का उत्पादन कम होने लगता है। इसका असर मेटाबॉलिज्म पर पड़ता है। मेटाबॉलिज्म धीमा हो जाता है। इस स्थिति में डॉक्टर आमतौर पर लेवोथायरॉक्सिन (Levothyroxine) नामक दवा लिखते हैं। यह एक सिंथेटिक थायराइड हार्मोन होता है, जो शरीर में थायराइड हार्मोन की पूर्ति करता है। इस दवा का सेवन रोज सुबह खाली पेट करने की सलाह दी जाती है। इसके साथ ही, आपको नियमित रूप से TSH, T3, T4 टेस्ट से हार्मोन के स्तर को मॉनिटर करना चाहिए। थायराइड हार्मोन के स्तर के अनुसार ही दवा की डोज निर्धारित की जाती है।
Disclaimer: प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।
थायराइड रोग की दवाइयां जीवनभर लेनी पड़ सकती है। कुछ ही मामलों में थायराइड पूरी तरह ठीक होता है।
हाइपोथायरायडिज्म में लेवोथायरॉक्सिन और हाइपरथायरायडिज्म में एंटी-थायरॉइड दवाएं दी जाती हैं। कुछ मामलों में थेरेपी और सर्जरी की जरूरत पड़ सकती है।
थायराइड में खून की जांच से थायराइड फंक्श को देखा जाता है। इसमें , TSH, T3 और T4 के स्तर की जांच की जाती है। थायराइड की जांच के लिए कुछ मामलों में अल्ट्रासाउंड की जरूरत पड़ सकती है।
थायराइड दो प्रकार का होता है। इसमें हाइपोथायरायडिज्म और हाइपरथायरायडिज्म शामिल हैं।