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Typhoid Explainer: मानसून में क्यों बढ़ जाते हैं टाइफाइड बुखार के मामले? जानें क्या हैं इसके लक्षण, कारण और बचाव के उपाय

मानसून में सिर्फ डेंगू या मलेरिया ही नहीं, टाइफाइड बुखार भी तेजी से फैल सकता है। वैसे तो यह सही इलाज से घर पर ही ठीक हो सकता है, लेकिन कुछ मामलों में अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत पड़ सकती है। जानें, इसके लक्षण, कारण और इलाज के बारे में-

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Written By: Anju Rawat | Published : July 2, 2026 9:16 PM IST

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Medically Verified By: Dr. Raman Kumar

Typhoid Fever: मानसून... सबसे सुहावना और ज्यादातर लोगों का पसंदीदा मौसम। लेकिन, यह मौसम अपने साथ कई तरह की स्वास्थ्य समस्याओं को लेकर आता है। बारिश के मौसम में डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया को सबसे आम माना जाता है। इसलिए सभी लोग इन बीमारियों से बचने के लिए तमाम तैयारियां करने लगते हैं। लेकिन, क्या आप जानते हैं बारिश के मौसम में टाइफाइड का खतरा भी काफी बढ़ जाता है। इस मौसम में दूषित पानी और भोजन की वजह से टाइफाइड के मामले तेजी से बढ़ सकते हैं। वहीं, अगर इस बीमारी का समय पर इलाज न मिले, तो स्थिति गंभीर रूप ले सकती है। तो आइए, इस लेख में विस्तार से जानते हैं टाइफाइड बुखार के बारे में सबकुछ-

टाइफाइड बुखार कैसे फैलता है?

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, टाइफाइड बुखार एक जानलेवा बैक्टीरियल संक्रमण हो सकता है। यह साल्मोनेला टाइफी नामक बैक्टीरिया के कारण होता है। यह आमतौर पर दूषित पानी पीने या भोजन खाने से फैलता है। दरअसल, दूषित पानी या भोजन में साल्मोनेला टाइफी बैक्टीरिया हो सकते हैं, जब इस तरह के खाने का सेवन किया जाता है तो ये बैक्टीरिया शरीर में पहुंचकर तेजी से बढ़ने लगते हैं। इसके बाद खून के जरिए पूरे शरीर में फैल जाते हैं। यह संक्रमण ज्यादातर उन लोगों में देखने को मिलता है, जो बेहतर स्वच्छता सुविधाओं के अभाव में अपना जीवन बिता रहे हैं।

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मानसून में क्यों बढ़ने लगते हैं टाइफाइड के मामले?

अकेडमी ऑफ फैमिली फिजिशियंस ऑफ इंडिया के चेयरमैन डॉ. रमन कुमार बताते हैं कि मानसून के मौसम में टाइफाइड के मामले ज्यादा आने के पीछे कई कारण जिम्मेदार हो सकते हैं-

  • मानसून में जलभराव की वजह से सीवर और पीने के पानी आपस में मिल जाता है, जिससे पानी में बैक्टीरिया आसानी से फैल जाते हैं। अगर कोई व्यक्ति बैक्टीरिया वाला पानी पी ले तो उसे टाइफाइड हो सकता है।
  • मानसून में ज्यादा नमी की वजह से साल्मोनेला टाइफी बैक्टीरिया आसानी से पनपने लगते हैं। ये बैक्टीरिया टाइफाइड का कारण बनते हैं।
  • इस मौसम में मक्खियों का प्रकोप बढ़ जाता है। बाहर के फास्ट फूड और खाने में ये मक्खियां बैठी हुई दिख जाती हैं। जब कोई इस दूषित खाने को खाता है, तो उसमें संक्रमण फैल सकता है।
  • मानसून में शरीर की इम्यूनिटी कमजोर हो सकती है। इसकी वजह से भी शरीर साल्मोनेला टाइफी बैक्टीरिया की चपेट में जल्दी आ सकता है। खासकर, दूषित पानी और भोजन का सेवन करने से टाइफाइड का खतरा बढ़ सकता है।

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टाइफाइड बुखार के लक्षण क्या हैं?

WHO के अनुसार, साल्मोनेला टाइफी बैक्टीरिया सिर्फ इंसानों में पाया जाता है। यह बैक्टीरिया टाइफाइड से संक्रमित व्यक्ति के खून और आंतों में मौजूद रहता है और स्वस्थ व्यक्ति तक पहुंच सकता है। जब कोई व्यक्ति इस बैक्टीरिया की चपेट में आता है, तो उसे कुछ लक्षणों का अनुभव हो सकता है। इनमें शामिल हैं-

  • अगर आपको लगातार तेज बुखार बना हुआ है, तो एक बार टाइफाइड की जांच जरूर कराएं।
  • अगर बुखार के साथ थकान और कमजोरी महसूस हो रही है तो ये टाइफाइड बुखार के संकेत हो सकते हैं।
  • टाइफाइड मरीजों को मतली, उल्टी और पेट दर्द जैसी समस्याओं का अनुभव हो सकता है।
  • बुखार और दर्द के साथ शरीर पर लाल चकत्ते नजर आए तो इन संकेतों की अनदेखी बिल्कुल न करें।

वैसे तो टाइफाइड बुखार कुछ दवाइयों की मदद से घर पर ही ठीक हो जाता है। लेकिन, कुछ गंभीर मामलों में रोगी को अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत पड़ सकती है। अगर समय पर इलाज न मिले, तो व्यक्ति की जान तक जा सकती है।

टाइफाइड बुखार का रिस्क किसे ज्यादा रहता है?

विश्व स्वास्थ्य संगठन के 2019 के आंकड़ों के अनुसार, दुनिया भर में हर साल लगभग 90 लाख लोग टाइफाइड बुखार से संक्रमित होते हैं। इनमें से करीब 1 लाख 10 हजार लोगों ने अपनी जान गंवाई थी।

वैसे तो टाइफाइड किसी भी व्यक्ति को हो सकता है। लेकिन, बच्चों में इस बीमारी का खतरा सबसे ज्यादा बना रहता है। वहीं, जिन लोगों को स्वच्छता सुविधाएं उपलब्ध नहीं होती हैं, उनमें टाइफाइड के मामले ज्यादा देखने को मिल सकते हैं।

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टाइफाइड की जांच कैसे की जाती है?

Centres for Disease Control and Prevention (CDC)  के अनुसार, ब्लड कल्चर टेस्ट को टाइफाइड की पहचान करने का एक सबसे प्रमुख तरीका माना जाता है। हालांकि, संक्रमण पैदा करने वाले बैक्टीरिया की सही पहचान के लिए एक से ज्यादा बार ब्लड कल्चर टेस्ट किया जा सकता है। टाइफाइड के लिए मल या पेशाब टेस्ट की मदद से बेहद कम मामलों में ही संक्रमण की पुष्टि होती है। इसलिए ज्यादातर डॉक्टर ब्लड कल्चर टेस्ट कराने की सलाह देते हैं।

टाइफाइड बुखार का इलाज क्या है?

डॉ. रमन कुमार बताते हैं कि टाइफाइड बुखार का इलाज एंटीबायोटिक्स से किया जा सकता है। इसके अलावा, डॉक्टर बुखार और शरीर का दर्द कम करने वाली दवाइयां भी लिख सकते हैं। समय पर जांच और इलाज से टाइफाइड का इलाज पूरी तरह से संभव है। लेकिन, कुछ गंभीर मामलों में टाइफाइड रोगियों को अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत पड़ सकती है। WHO के अनुसार, अगर आपका टाइफाइड का इलाज चल रहा है, तो इन बातों पर ध्यान देना बहुत जरूरी है-

  • अगर डॉक्टर ने आपको एंटीबायोटिक दवाइयां दी हैं, तो कोर्स पूरा करें। इन दवाइयों को बीच में छोड़ने की भूल बिल्कुल न करें।
  • शौच के बाद साबुन और पानी से हाथों को अच्छी तरह से साफ करें। इससे संक्रमण फैलने का खतरा कम हो सकता है।
  • खाना खाने से पहले और बाद में हाथों को अच्छी तरह से धोना चाहिए।
  • इलाज पूरा होने के बाद टाइफाइड की जांच दोबारा कराएं, इससे पता चलेगा कि शरीर में Salmonella Typhi बैक्टीरिया पूरी तरह खत्म हो गया है या नहीं।

CDC के अनुसार,  अगर टाइफाइड बुखार का सही और पूरा इलाज न कराया जाए, तो यह बीमारी लगभग एक महीने तक रह सकती है। टाइफाइड के सही इलाज से मृत्यु दर में भी कमी देखने को मिली है।

क्या टाइफाइड बुखार दोबारा हो सकता है?

CDC के अनुसार,  अगर टाइफाइड बुखार का इलाज सही तरीके से नहीं किया जाता है, तो लगभग 10 फीसदी लोगों में यह बीमारी दोबारा हो सकती है। हालांकि, दोबारा होने वाला टाइफाइड, पहले की तुलना में कम गंभीर माना जाता है। CDC  बताता है कि पहला टाइफाइड बुखार ठीक होने के 1 से 3 सप्ताह के अंदर दोबारा हो सकता है। हैरान करने वाली बात यह है कि  टाइफाइड संक्रमित 1 से 4 फीसदी लोग ऐसे होते हैं, जिनके शरीर में बीमारी ठीक होने के बाद भी एक साल से अधिक समय तक टाइफाइड बैक्टीरिया साल्मोनेला टाइफी रहता है। इन लोगों को टाइफाइड का क्रॉनिक कैरियर कहा जाता है। हालांकि, इन लोगों में टाइफाइड के लक्षण नहीं होते हैं और ये इस बात से भी अंजान होते हैं। लेकिन, ये लोग दूसरे लोगों को टाइफाइड संक्रमण फैला सकते हैं।

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टाइफाइड की वैक्सीन उपलब्ध है?

WHO ने साल 2018 में पहले प्रीक्वालिफाइड टाइफाइड कंजुगेट वैक्सीन (TCV) को लगवाने की सलाह दी थी। इस वैक्सीन को 6 महीने या उससे अधिक उम्र के बच्चों के लिए और 45 वर्ष तक के वयस्क 0.5 एमएल की सिंगल डोज ले सकते हैं। वहीं,  ViPS वैक्सीन को 2 वर्ष या उससे अधिक उम्र के लोगों के लिए मंजूरी मिली थी। आप डॉक्टर की सलाह से अपनी आयु के अनुसार, टाइफाइड वैक्सीन लगवा सकते हैं।

क्या टाइफाइड यौन संपर्क से फैल सकता है?

Centres for Disease Control and Prevention (CDC)   के अनुसार, जी हां, टाइफाइड बुखार यौन संपर्क के जरिए फैल सकता है। हालांकि, इसके मामले बेहद कम होते हैं। खासकर, यह पुरुषों के बीच यौन संबंध के दौरान फैलता है। यानी जब एक पुरुष, दूसरे पुरुष के साथ यौन संबंध बनाता है तो टाइफाइड फैल सकता है।

टाइफाइड बुखार से बचने के लिए क्या करें?

डॉ. रमन कुमार के अनुसार, अगर कुछ बातों का ध्यान रखा जाए तो टाइफाइड बुखार से बचाव किया जा सकता है। जैसे-

  • टाइफाइड से बचाव के लिए सबसे जरूरी है वैक्सीन लगवाना। 6 महीने या उससे ज्यादा उम्र के लोग वैक्सीन लगवाकर टाइफाइड से बचाव कर सकते हैं।
  • टाइफाइड बुखार से बचने के लिए अच्छी तरह से पका हुआ और गर्म खाना खाएं। अधपका और कच्चा खाना खाने से पूरी तरह परहेज करें।
  • अगर पानी साफ नहीं आता है, तो पानी को उबालकर ही पिएं। पानी उबालने से टाइफाइड पैदा करने वाले बैक्टीरिया नष्ट हो सकते हैं।
  • खाना खाने से पहले और बाद में अच्छी तरह से हाथ धोएं।
  • शौच से आने के बाद हाथों को साबुन और पानी से अच्छी तरह धोएं।
  • फल को अच्छी तरह से साफ करके ही खाएं। आप इन्हें छीलकर खा सकते हैं।

Disclaimer: टाइफाइड एक आम बीमारी है, मानसून में इसके मामलों में तेजी देखने को मिल सकती है। दूषित पानी और भोजन के सेवन से टाइफाइड बुखार हो सकता है। इसलिए टाइफाइड से बचाव के लिए हाथों को अच्छी तरह से धोने की सलाह दी जाती है। तेज बुखार, थकान, शरीर में दर्द और त्वचा पर लाल चकत्ते टाइफाइड के लक्षण हो सकते हैं। इसलिए अगर इनमें से कोई भी लक्षण महसूस हो तो नजरअंदाज बिल्कुल न करें। सही समय पर जांच और इलाज से टाइफाइड को पूरी तरह से ठीक किया जा सकता है।