Heart Disease in Youth: कम उम्र के लोगों में क्यों बढ़ रहा है हार्ट अटैक का खतरा, हार्ट स्पेशलिस्ट से जानिए दिल का दौरा पड़ने की 5 प्रमुख वजह

युवाओं में ह्रदय रोगों के मामलों में वृद्धि देखी जा रही है विश्व स्वास्थ संगठन भी मानता है कि पहले की तुलना में आजकल का युवा वर्ग हृदय रोगों से ज्यादा ग्रसित हो रहा है जिसके कई कारण हो सकते हैं। 

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Written By: Atul Modi | Updated : September 2, 2021 9:03 PM IST

आजकल हार्ट अटैक (Heart Attack) की समस्या कम उम्र के लोगों में भी देखा जा सकता है। आप अपने आसपास देख सकते हैं कि किस प्रकार से युवा हृदय रोग के शिकार हो रहे हैं। एक दौर था जब हार्ट अटैक (Heart Attack) या अन्य दूसरे हृदय रोग सिर्फ बुजुर्गों या अधिक उम्र में देखे जाते थे। मगर पहले के मुकाबले अब करीब 8 से 10 साल पहले ही हार्ट अटैक जैसे खतरे देखने को मिल रहे हैं। ऐसा अनुमान है कि हमारे देश में दिल का दौरा पड़ने वाले 40% लोगों की उम्र 55 साल से कम है।

ऐसे में यह सवाल उठता है कि कम उम्र में युवा हार्ट अटैक का शिकार क्यों हो रहा है। युवाओं में हृदय रोगों की वजह क्या है। इस बात को समझने के लिए हमने जाने-माने कार्डियोलॉजिस्ट डॉक्टर तिलक सुवर्णा से बातचीत की, जिसमें उन्होंने हमें कम उम्र में हार्ट अटैक या हृदय रोगों के होने के पांच प्रमुख कारणों के बारे में बताया है। आइए विस्तार से समझते हैं।

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युवाओं में हृदय रोगों के बढ़ने का कारण - What Are The Major Causes of Heart Disease in Hindi

एशियन हार्ट इंस्टीट्यूट, मुंबई के सीनियर कार्डियोलॉजिस्ट डॉक्टर तिलक सुवर्णा का कहना है कि कुछ जोखिम कारक है जो विशिष्ट रूप से युवा भारतीयों में हृदय रोगों के होने का कारण बनते हैं, जो निम्नलिखित हैं।

1. ह्रदय रोगों का पारिवारिक इतिहास

हार्ट अटैक का या हृदय रोग का सबसे प्रमुख कारण वंशानुगत या पारिवारिक इतिहास है जिन के दादा परदादा या पिता में हृदय रोगों का इतिहास रहा है उनके बच्चों में भी हृदय रोगों की संभावना होती।

2. उच्च कोलेस्ट्रॉल का पारिवारिक इतिहास

उच्च कोलेस्ट्रॉल के पारिवारिक इतिहास को हाइपरलिपिडेमिया के नाम से भी जाना जाता है। जिनकी फैमिली में उच्च कोलेस्ट्रॉल का इतिहास रहता है उन्हें कम उम्र में हृदय रोग होने की संभावना अधिक होती है।

3. धूम्रपान या तंबाकू का अत्यधिक सेवन

जो लोग अत्यधिक धूम्रपान या तंबाकू का सेवन करते हैं उनमें हृदय रोगों की संभावना ज्यादा होती है, क्योंकि धूम्रपान का अत्यधिक सेवन करने से हृदय की धमनियों में सूजन आ जाती है। जिसके परिणाम स्वरूप दिल का दौरा पड़ता है।

4. निष्क्रिय जीवनशैली

जो लोग एक ही जहां पर बैठे रहते हैं एक्सरसाइज नहीं करते हैं तनाव अधिक लेते हैं उनमें हृदय रोग की संभावना अधिक होती है दरअसल बढ़ते शहरीकरण ने लंबे समय तक काम करने के कारण युवाओं को व्यायाम करने से वंचित कर दिया है।

5. तनाव व अवसाद

आधुनिकता के दौर में सबसे ज्यादा यदि कोई प्रभावित है तो वह है तनाव और अवसाद जब व्यक्ति की इच्छाएं पूरी नहीं होती तो वह तनाव और अवसाद से ग्रसित हो जाता है जिसका असर हमारे शरीर और हमारे सबसे जरूरी अंगों पर पड़ता है।

इन सबके अलावा हृदय रोगों के कई और भी जोखिम कारक हैं जो पारंपरिक हैं और भारतीयों में पहले की तुलना में अब कम उम्र में ज्यादा हो रहे हैं इनमें प्रमुख जोखिम कारक हैं:

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