बार-बार बिना सोचे-समझे पेन किलर दवाएं लेने से शरीर का कौन सा अंग डैमेज होने का खतरा बढ़ जाता है?

Painkiller ke Side Effect: छोटी-मोटी बीमारियों के लिए मेडिकल स्टोर से खुद दवाएं लेकर आने की आदत भी बेहद गलत है और कई बार इसके गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। इस बारे में हम इस लेख में बात करेंगे।

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Written By: Mukesh Sharma | Published : December 31, 2025 1:50 PM IST

Pain Killer Tablet Side Effects in Hindi: आजकल हर घर में लोग खुद डॉक्टर बन कर बैठे हुए हैं, खासतौर पर पिछले दशक में जब से धीरे-धीरे इंटरनेट का इस्तेमाल बढ़ा है उसके साथ-साथ लोग खुद को डॉक्टर समझने लग गए हैं। छोटी-मोटी बीमारियां होती हैं, तो इंटरनेट पर सर्च करते हैं और खुद ही मेडिकल स्टोर से जाकर दवाएं ले लेते हैं। आजकल लोगों को लगने लगा है कि सिर्फ यह पता होना चाहिए कि कौन सी बीमारी में कौन सी दवा लेनी है और फिर आपको डॉक्टर से पूछने की जरूरत नहीं है। इसमें सबसे ज्यादा इस्तेमाल पेन किलर दवाओं का बढ़ा है, सिरदर्द हो या बदन दर्द या फिर शरीर का कोई जोड़ दर्द कर रहा हो, लोग खुद से पेन किलर ले लेते हैं। पेन किलर से आराम मिल जाता है और लोगों को लगता है कि उन्हें खुद को ठीक कर लिया है। लेकिन कभी सोचा है कि पेन किलर भी अलग-अलग प्रकार के होते हैं और शरीर में जाकर उनका काम करने का तरीका भी अलग होता है। जरूरी नहीं कि हर पेन किलर हर व्यक्ति के लिए ही सुरक्षित हो।

भारतीयों के साथ पेन किलर का रिश्ता

भारत में आमतौर पर और सबसे ज्यादा इस्तेमाल की जाने वाली पेनकिलर एसिटामिनोफेन (Acetaminophen) है, जिसे हम पैरासिटामोल के नाम से जानते हैं। इसके अलावा कुछ नॉन स्टेरॉयडल एंटी-इंफ्लेमेटरी ड्रग्स (NSAIDs) पेन किलर दवाएं भी हैं जिनमें डिक्लोफेनाक और इबुप्रोफेन आदि शामिल हैं। लोग आमतौर पर होने वाले बुखार, दर्द और सूजन आदि से निपटने के लिए इन पेन किलर दवाओं का सहारा लेने लगे हैं और इनका इस्तेमाल हमारे देश में बहुत आम हो गया है।

(और पढ़ें - पेन किलर दवाओं के साइड इफेक्ट्स)

स्वास्थ्य पर पेन किलर दवाओं का असर

इस बात को समझना होगा कि पेन किलर दवाएं होती तो दर्द कम करने के लिए ही हैं और ऐसा भी नहीं है कि ये शरीर में जाते ही सीधा नुकसान पहुंचाती है। लेकिन मरीज की बीमारी, उम्र और स्वास्थ्य क्षमताओं के आधार पर पेन किलर दवा का प्रकार व उसकी डोज निर्धारित की जाती है जो कि लोग अक्सर नहीं करते हैं और मेडिकल स्टोर से दवा लेकर उसका इस्तेमाल करने लग जाते हैं।

एसिटामिनोफेन जिन्हें हम पैरासिटामोल के नाम से जानते हैं, उसे अक्सर सबसे आम दवा माना जाता है, लेकिन बहुत ही कम लोग जानते हैं कि इसकी गलत डोज लिवर के सबसे बड़े दुश्मनों में से एक हो सकती है। इसके बाद ज्यादा या लंबे समय तक इसका इस्तेमाल किडनी पर भी प्रभाव डालता है।

(और पढ़ें - पैरासिटामोल खाने से लिवर पर क्या असर पड़ता है)

एनएसएआईडी पेन किलर जैसे डिक्लोफेनाक और इबुप्रोफेन जैसी दवाएं भी काफी प्रभावी पेन किलर हैं, जो ज्यादा दर्द को भी कंट्रोल कर देती हैं। लेकिन इन दवाओं की ज्यादा डोज या लंबे समय से इस्तेमाल आपके पेट के लिए अच्छा नहीं माना जाता है, क्योंकि ये पेट व आंतों के अंदर छाले पैदा कर सकती हैं। पेट के अंदर छाले जिन्हें पेप्टिक अल्सर या स्टमक अल्सर के नाम से जाना जाता है, जो बेहद दर्दनाक और गंभीर स्थिति होती है। इसके अलावा लंबे समय से इनका इस्तेमाल किडनी और लिवर को भी नुकसान पहुंचाता है और यहां तक कि हार्ट से जुड़ी समस्याएं होने के खतरे को भी बढ़ा देता है।

खुद डॉक्टर न बनें और अपने परिवार को सुरक्षित रखें

अगर आप भी इंटरनेट पर सर्च करके दवाएं लाने में माहिर हो गए हैं और घर पर बच्चों व बुजुर्गों के लिए भी आप खुद ही सर्च करके दवाएं लाना शुरु कर चुके हैं तो आपको आज से ही ये आदत बंद कर देनी चाहिए। अगर घर में किसी को कोई दर्द या तकलीफ है, तो डॉक्टर के पास जाएं और जरूरी टेस्ट आदि कराकर अच्छे से बीमारी को डायग्नोस करने में डॉक्टर की मदद करें।

डॉक्टर मरीज की हेल्थ कंडीशन के अनुसार दवाएं देते हैं और अगर डॉक्टर को जरा सा भी लगता है कि पेन किलर या कोई भी दवा मरीज की किडनी या लिवर पर उल्टा असर डाल सकती है, तो वे पहले किडनी फंक्शन टेस्ट व लिवर फंक्शन टेस्ट कराते हैं या फिर दवाओं की डॉज में कुछ जरूरी बदलाव करते हैं।

अस्वीकरण: प्रिय पाठकों यह आर्ट‍िकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।

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