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Written By: Atul Modi | Published : August 21, 2023 8:41 PM IST
छींकना (Sneeze) शरीर के श्वसन तंत्र की प्राकृतिक प्रक्रिया है। यह नाक के पैसेज (मार्ग) को साफ करती है और इरिटेंट्स, कणों या किसी अन्य संभावित वायरस को समाप्त करती है। इससे श्वसन तंत्र की कार्यक्षमता सुचारू रूप से चलती रहती है। हालांकि, 2018 में एक केस के अनुसार, एक ब्रिटिश आदमी ने छींक को रोकने का प्रयास किया। इससे उसके गले में चोट पहुंची। रिपोर्ट के अनुसार, 34 वर्षीय इस आदमी ने अपनी मुंह को बंद करके और दोनों नाक के छिद्रों को बंद करके छींक रोकने की कोशिश की थी। जिस वजह से छींक की तेजी ने उसके गले को चोट पहुंचाई।
एक्सपर्ट के मुताबिक, जब छींक तेजी से आती है और उसे मुंह और नाक बंद करके रोका जाता है तो ऐसे में श्वसन तंत्र पर दबाव बढ़ता है। जब छींक की तेजी कम की जाती है, तो दबाव दूसरी जगह निकलने की कोशिश करता है। यही नहीं यह दबाव ज्यादातर शरीर के कमजोर हिस्सों का चयन करता है। छींक को रोकने से गले में चोट के अलावा अचानक दबाव कान के पर्दे के फटने, बढ़ी हुई आंखों की रोशनी, या रक्त वाहिनियों में चोट का कारण हो सकता है। इसके कारण भयंकर दर्द, निगलने में परेशानी या आवाज की गुणवत्ता में असर हो सकता है।
इन समस्याओं को कम करने के लिए पर्याप्त उपचार जरूरी है। अगर किसी को लगता है कि छींक को रोकना किसी नुकसान का कारण बन गया है, तो तुरंत चिकित्सा सहायता प्राप्त करना आवश्यक है। छींक दबाने से आपको कितनी क्षति पहुंची है इसका अनुमान चिकित्सक लगा सकता है। केवल एक्सपर्ट ही इस अवस्था में उचित सलाह दे सकते हैं। अगर किसी व्यक्ति को छींक रोकने की जरूरत भी है तो वह अपने होंठ और नाक को बंद करने से बचे।
यदि व्यक्ति ऐसी स्थिति में हैं जहां उसको लगता है कि छींक को रोकने की आवश्यकता है, तो मुंह को व्यापक रूप से खोलकर और छींक को बिना रुकावट के बाहर निकलने के तरीकों का उपयोग करें। ध्यान दें कि छींकना एक स्वाभाविक प्रक्रिया है जो हमारे शरीर और वायु मार्गों को स्वस्थ बनाए रखने के लिए आवश्यक है।