इलाज जितना ही क्यों जरूरी है रेगुलर बीपी चेकअप? एक्सपर्ट ने बताया कैसे साइलेंट किलर बनता है हाइपरटेंशन

इलाज जितना ही क्यों जरूरी है रेगुलर बीपी चेकअप? एक्सपर्ट ने बताया कैसे साइलेंट किलर बनता है हाइपरटेंशन

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Written By: Mukesh Sharma | Published : May 17, 2026 2:40 PM IST

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Medically Verified By: dr. purushotam lal

17 मई को मनाए जाने वाले वर्ल्ड हाइपरटेंशन डे 2026 की थीम “कंट्रोलिंग हाइपरटेंशन टुगेदर: चेक योर ब्लड प्रेशर रेगुलरली, डिफीट द साइलेंट किलर” यह संदेश देती है कि हाई बीपी को केवल दवा या अस्पताल के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता। इसे कंट्रोल में रखने के लिए समय-समय पर ब्लड प्रेशर की जांच, हेल्दी लाइफस्टाइल, सही खानपान, नियमित एक्सरसाइज और जागरूकता बेहद जरूरी है। हाई ब्लड प्रेशर को मैनेज करने के लिए जितना जरूरी इन चीजों का ध्यान रखना है, उतना ही जरूरी सही जागरूकता भी है। इसलिए हाई ब्लड प्रेशर यानी हाइपरटेंशन जिसको “साइलेंट किलर” भी कहा जाता है, क्योंकि यह लंबे समय तक बिना किसी साफ लक्षण के शरीर को नुकसान पहुंचाता रहता है। विश्व उच्च रक्तचाप दिवस के मौके पर हेल्थ एक्सपर्ट्स ने इस बारे में कई महत्वपूर्ण जानकारियां दी हैं, जिनके बारे में आप इस लेख में जानेंगे।

बड़ी समस्या बनती जा रही हाइपरटेंशन

ग्लोबल स्तर पर हाइपरटेंशन आज एक बड़ी पब्लिक हेल्थ समस्या बन चुका है। डब्लू.एच.ओ. के अनुसार, साल 2024 में दुनिया भर में 30 से 79 वर्ष की उम्र के करीब 1.4 अरब लोग हाई ब्लड प्रेशर से प्रभावित थे, लेकिन इनमें से लगभग 44% लोगों को यह तक पता नहीं था कि उन्हें यह बीमारी है। भारत में भी हाई ब्लड प्रेशर का कारण होने वाली समस्याएं और इस बीमारी के मरीज तेजी से बढ़ रहे हैं। एन.एफ.एच.एस.-5 के आंकड़ों के मुताबिक, 15 वर्ष से अधिक उम्र की करीब 21.3% महिलाएं और 24% पुरुष हाइपरटेंशन से प्रभावित हैं। यह दिखाता है कि बड़ी संख्या में लोग बिना नियमित जांच और इलाज के हाई बीपी के साथ जीवन जी रहे हैं, जिससे किडनी फेलियर, स्ट्रोक और हार्ट डिजीज का खतरा बढ़ जाता है।

जागरूकता की कमी ऊी है सबसे बड़ी समस्या

कार्डियोलॉजिस्ट्स मानते हैं कि बड़ी समस्या केवल इलाज की नहीं है, बल्कि अवेयरनेस की भी है। कई लोग अपना ब्लड प्रेशर तभी चेक कराते हैं जब उन्हें सिरदर्द, सीने में तकलीफ या थकान महसूस होती है। जबकि हाइपरटेंशन लंबे समय तक बिना किसी लक्षण के रह सकता है और अचानक हार्ट अटैक, किडनी डिजीज, हार्ट फेलियर या स्ट्रोक जैसी गंभीर समस्याओं का कारण बन सकता है। अगर हम इस बीमारी से पूरी तरह से जागरूक हों, तो स्थिति के गंभीर होने से पहले ही उसका पता लगाया जा सकता है

सिर्फ बुजुर्गों तक सीमित नहीं रहा हाइपरटेंशन

डॉ. पुरुषोत्तम लाल, इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट एवं चेयरमैन, मेट्रो ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल्स ने कहा कि, हाइपरटेंशन अब केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं है। बल्कि यह युवाओं में भी अब तेजी से बढ़ा है और इसके पीछे का प्रमुख कारण स्ट्रेस, खराब नींद, फिजिकल एक्टिविटी की कमी, मोटापा, स्मोकिंग और अनियमित हेल्थ चेकअप रहा है। सबसे बड़ा खतरा यह है कि शुरुआती स्टेज में लोगों को कोई परेशानी महसूस नहीं होती, इसलिए वे स्क्रीनिंग को नजरअंदाज कर देते हैं। रेगुलर बीपी मॉनिटरिंग शरीर को होने वाले लंबे समय के नुकसान से बचा सकती है।

इस वर्ल्ड हाइपरटेंशन डे पर संदेश हर घर तक पहुंचना चाहिए कि लक्षणों का इंतजार न करें, समय-समय पर बीपी चेक कराएं और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह लें। ऐसा करके हाइपरटेंशन के मामलों को बढ़ने से भी काफी हद तक रोका जा सकता है।

रेगुलर बीपी मॉनिटरिंग बहुत जरूरी

डॉ. आर. एस. वेंकटेसुलु, लीड कंसल्टेंट कार्डियोलॉजी, स्पर्श हॉस्पिटल, हेन्नूर रोड, बेंगलुरु ने कहा कि, हाइपरटेंशन को मिलकर कंट्रोल करने का मतलब है मरीज के आसपास एक सपोर्ट सिस्टम तैयार करना। परिवार को रेगुलर बीपी मॉनिटरिंग, हेल्दी डाइट, फिजिकल एक्सरसाइज और समय पर दवा लेने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए। वर्कप्लेस पर भी रेगुलर हेल्थ चेकअप को बढ़ावा देना जरूरी है, क्योंकि स्ट्रेस और लंबे समय तक बैठकर काम करना अब बड़ी वजह बन चुके हैं। कई मामलों में लाइफस्टाइल सुधार और दवा साथ मिलकर भविष्य में कार्डियोवैस्कुलर रिस्क को कम कर सकते हैं। लक्ष्य केवल बीपी मशीन पर नंबर कम करना नहीं, बल्कि हार्ट, ब्रेन, किडनी और ब्लड वेसल्स की सुरक्षा करना है।

बीपी को कब नहीं करना चाहिए नजरअंदाज

डॉ. (मेजर) अभिनव श्रीवास्तव, कंसल्टेंट, कार्डियोलॉजिस्ट, रीजेंसी हॉस्पिटल, गोरखपुर के अनुसार सबसे जरूरी कदम शुरुआती स्तर पर अवेयरनेस बढ़ाना है। लोगों को अपना BP नंबर उसी तरह पता होना चाहिए जैसे उन्हें अपना मोबाइल नंबर याद रहता है। अगर बीपी लगातार 140/90 mmHg या उससे अधिक रहे तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। बॉर्डरलाइन हाई बीपी में भी लाइफस्टाइल सुधार जरूरी है। नमक कम करना, रोजाना वॉक करना, वजन नियंत्रित रखना, अच्छी नींद लेना और टोबैको से दूरी बनाना बहुत बड़ा फर्क ला सकता है। लेकिन बिना डॉक्टर की सलाह के खुद से दवा लेना खतरनाक हो सकता है।

डॉ. संजीव अग्रवाल, डायरेक्टर- कार्डियोलॉजी, श्री बालाजी एक्शन मेडिकल इंस्टीट्यूट, दिल्ली के अनुसार हाइपरटेंशन को कंट्रोल करना हार्ट अटैक और स्ट्रोक से बचाव के सबसे प्रभावी तरीकों में से एक है। लेकिन इसके लिए शुरुआती पहचान, सही जांच और लंबे समय तक ट्रीटमेंट का पालन जरूरी है। मरीजों को समझना चाहिए कि हाइपरटेंशन को मैनेज किया जा सकता है, लेकिन इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। रेगुलर फॉलोअप, जरूरत पड़ने पर घर पर बीपी मॉनिटरिंग, दवाओं का सही पालन और अनुशासित लाइफस्टाइल बेहद महत्वपूर्ण हैं। हेल्थकेयर सिस्टम, परिवार और समाज, सभी को मिलकर बीपी जांच को एक रेगुलर आदत बनाना होगा।

डिसक्लेमर: इस लेख का उद्देश्य केवल हाइपरटेंशन जुड़ी सही जानकारी देना है और इसमें दी गई किसी भी जानकारी का इस्तेमाल हाई बीपी या किसी भी बीमारी के इलाज के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। इसके लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।

FAQs

हार्ट हेल्थ के लिए सबसे जरूरी क्या है?

संतुलित आहार, व्यायाम, तनाव नियंत्रण और नियमित जांच सबसे जरूरी होता है।

ब्लड प्रेशर का नॉर्मल लेवल कितना होना चाहिए?

आमतौर पर एक वयस्क महिला या पुरुष का ब्लड प्रेशर लेवल 120/80 mmHg के बीच  होता है।

हाई ब्लड प्रेशर लेवल के लक्षण क्या हैं?

ब्लड प्रेशर लेवल बढ़ने पर सिरदर्द, कमजोरी, थकान और हाथों-पैरों में कमजोरी जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

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