क्यों दुर्लभ बीमारियों के इलाज में पुरानी दवाओं को ज्यादा प्रभावी मानी जाती हैं, इनके पीछे की वजह जानें?
रेयर डिजीज की सिर्फ पहचान करना ही मुश्किल नहीं होता है, बल्कि पहचान होने के बाद उसके लिए दवाएं ढूंढना भी कई बार मुश्किल हो जाता है। इस लेख में हम रेयर डिजीज के इलाज की दवाएं व अन्य पुरानी दवाओं से जुड़ी कुछ ऐसी ही जानकारियां लेंगे।
दुर्लभ बीमारियों का इलाज अक्सर चुनौतियों से भरा होता है, क्योंकि उन बीमारियों पर अक्सर ज्यादा रिसर्च की जाती है जो जिनके मामले ज्यादा होते हैं। इसलिए दुर्लभ बीमारियों के लिए सही इलाज उपलब्ध होना कई बार चुनौती भरा हो सकता है। कई मरीजों को बीमारी की पहचान होने में ही कई वर्ष लग जाते हैं। वहीं, बीमारी का पता चलने के बाद भी डॉक्टरों को ऐसी दवा या इलाज ढूंढने में कठिनाई हो सकती है जो मरीज के लिए प्रभावी हो, आसानी से मिल जाए और उसकी लागत भी ज्यादा न हो। ऐसे समय में पुरानी या कम इस्तेमाल होने वाली दवाएं मरीजों के लिए बड़ी मदद साबित हो सकती हैं। ये दवाएं भले ही नई न हों या इनके बारे में ज्यादा चर्चा न होती हो, लेकिन कई मामलों में इनकी उपयोगिता आज भी बनी हुई है। कुछ दवाएं वर्षों पहले विकसित की गई थीं, कुछ का इस्तेमाल केवल खास बीमारियों में किया जाता है, जबकि कुछ दवाएं बाजार में कम दिखाई देती हैं लेकिन चिकित्सा के लिहाज से अब भी महत्वपूर्ण हैं।
समय के साथ दवाओं का असर कम हो जाता है?
अगर कुछ दवाओं की बात की जाए तो हां ऐसा कहा जा सकता है कि समय के साथ-साथ दवाओं का असर कम हो जाता है। लेकिन खासतौर जिनका जरूरत से ज्यादा सेवन किया जा रहा हो या फिर एक लंबे समय से इस्तेमाल किया जा रहा हो। कुछ दवाएं समय के साथ कम इस्तेमाल होने लगती हैं या लोगों की नजरों से दूर हो जाती हैं। इसके कई कारण हो सकते हैं। कई बार जिन बीमारियों के लिए ये दवाएं बनाई जाती हैं, उनके मरीज बहुत कम होते हैं। ऐसे में दवा कंपनियां इनका ज्यादा प्रचार नहीं करतीं। वहीं, नई दवाएं आने के बाद पुरानी लेकिन असरदार दवाओं पर ध्यान कम हो जाता है।
इसके अलावा दवा की पर्याप्त जानकारी न होना, सीमित रूप से दवा उपलब्ध न होना और यहां तक कि डिमांड कम होने की वजह से भी कुछ दवाएं आसानी से नहीं मिल पाती हैं। डॉ. सूफी रूमी, मेडिकल स्पोक्सपर्सन, जॉली हेल्थकेयर के अनुसार किसी दवा का पुराना या कम चर्चित होना यह नहीं बताता कि वह कम उपयोगी है। ऐसी कई दवाएं आज भी खास बीमारियों के इलाज में अहम भूमिका निभाती हैं, खासकर तब जब इलाज के विकल्प बहुत कम हों। रेयर डिजीज के मरीजों के लिए ऐसी दवाएं कई बार बीमारी को नियंत्रित करने, लक्षणों को कम करने और बेहतर जीवन जीने में महत्वपूर्ण मदद कर सकती हैं।
दुर्लभ बीमारियों की दवाएं
जब बाद दुर्लभ बीमारियों की आती है, तो कई बार उनकी कुछ दवाएं ढूंढने में ज्यादा समय लग जाता है और वे हर जगह नहीं मिल पाती हैं। इसलिए जिन लोगों को कोई दुर्लभ बीमारी है, उन्हें दवाओं मिलने में कई बार मुश्किल हो जाती है। साथ ही दुर्लभ बीमारियों की कई बार पहचान भी जल्दी नहीं हो पाती है और इस कारण से भी कई बार स्थिति और खराब हो जाती है। कई बार डॉक्टरों को यह पता होता है कि मरीज को किस दवा या थेरेपी की जरूरत है, लेकिन उस दवा तक पहुंच बनाना ही बड़ी चुनौती बन जाता है।
यह समस्या खासतौर पर उन दवाओं के साथ अधिक देखने को मिलती है जो आसानी से उपलब्ध नहीं होतीं या जिनका उपयोग दुर्लभ संक्रमणों, मेटाबॉलिक विकारों, आनुवंशिक बीमारियों और अन्य कम प्रचलित रोगों के इलाज में किया जाता है। ऐसे मामलों में स्वास्थ्य व्यवस्था को ऐसे भरोसेमंद सहयोगियों की जरूरत होती है, जो जरूरी और विशेष उपचार मरीजों तक पहुंचाने में मदद कर सकें।
दूसरी बीमारियों का इलाज करने में कारगर पुरानी दवाएं
कई पुरानी दवाएं ऐसी मिल जाती हैं, जिनका पहले किसी दूसरी समस्या का इलाज में इस्तेमाल होता है, जबकि अब दूसरी समस्याओं के इलाज में होता है और यह बदलाव वैज्ञानिक शोध के आधार पर ही होता है। यह तरीका इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि नई दवा बनाने और उसे मंजूरी मिलने में कई साल लग सकते हैं। वहीं, पुरानी दवाओं के बारे में पहले से काफी जानकारी उपलब्ध होती है, इसलिए उन्हें जरूरतमंद मरीजों तक जल्दी पहुंचाया जा सकता है। इससे कई मरीजों को समय पर सही इलाज मिल सकेगा और कोई उपयोगी दवा सिर्फ कम पहचान की वजह से नजरअंदाज नहीं होगी।
डिसक्लेमर: इस लेख का उद्देश्य दुर्लभ बीमारियों के इलाज में आ रही समस्याओं के बारे में जानकारी देना है। इसमें दी गई किसी भी जानकारी का इस्तेमाल किसी भी बीमारी के इलाज के रूप में नहीं किया जाना चाहिए। इसके लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।