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Written By: Pallavi | Published : August 25, 2022 11:52 AM IST
Lumpy Virus in India: लंपी वायरस का प्रकोप इस समय पूरे भारत में है। स्थिति ये है कि लगभग 20 राज्यों में ये वायरस फैल चुका है और इस वायरस से लगभग 8 हजार से ज्यादा जानवरों की मौत हो चुकी है। पर, राहत की बात ये है कि राजस्थान जैसे राज्य में इस वायरस के खिलाफ वैक्सीनेशन (lumpy virus vaccination) की शुरुआत हो चुकी है लेकिन यूपी के पश्चिमी जिलों में ये तेजी से फैल रहा है। इन राज्यों की स्थानीय प्रशासन लंपी वायरस को फैलने से रोकने की कोशिश कर रही और इसके लिए दवाइयों से लेकर हर तरह के कदम उठा रही है। लेकिन फिर भी ये वायरस तेजी से फैल रहा है। तो, प्रश्न ये है कि आखिरकार ये वायरस इतनी तेजी से फैल क्यों रहा है और इसे कैसे रोका जा सकता है।
लंपी वायरसके तेजी से फैलने के पीछे कई कारण हैं। पर सबसे पहले हमें ये समझना होगा कि ये वायरस जानवरों में तेजी से फैलता है और ये जूनोटिक बीमारी है जिसे कंट्रोल करना थोड़ा मुश्किल है। ये वायरस, पॉक्सविरिडे परिवार (poxviridae family) के कैप्रिपोक्सवायरस जीनस (Capripoxvirus genus) का एक वायरस है। जिसमें कि अलग-अलग वायरस अलग-अलग जानवरों को प्रभावित करता है। जैसे कि शीपपॉक्स वायरस (Sheeppox virus) और गोटपॉक्स वायरस (Goatpox virus) भी प्रिपोक्सवायरस जीन की फैमिली का होता है। लंपी वायरस मूल रूप से मवेशियों जैसे गाय और भैंसों को प्रभावित करता है।
मंकीपॉक्स वायरस आमतौर पर छोटे माइट्स, मक्खियों और मच्छरों द्वारा फैल सकता है। दरअसल, ये वायरस को एक जगह से दूसरी जगह ले जाते हैं और इन जानवरों को बैठ कर उनके खून में इसे मिला देते हैं। इससे वे संक्रमित हो जाते हैं। इसी तरह ये
-दूषित पानी
-भूसा
-जानवरों का खाना
-बारिश में मक्खियों के द्वारा फैल सकता है।
लंपी वायरस जानवर की सर्कुलेटरी सिस्टम पर हमला करता है और ब्लड वेसेल्स में सूजन या लिवर, फेफड़े, प्लीहा, लिम्फ नोड्स आदि जैसे विभिन्न अंगों में घावों का कारण बनता है। यह एपिडर्मिस का कारण होता है, जिससे त्वचा की बाहरी सतह डर्मिस से अलग हो जाती है। इससे किसी जानवर के शरीर पर गांठ बनने लगता है। साथ ही बुखार, जानवरों के मुंह से बलगम निकलना, भूख न लगना आदि अन्य लक्षण महसूस हो सकते हैं। ऐसे में बाहरी घाव दबाव या घर्षण के कारण फट सकते हैं और घातक साबित होते हैं। जानवरों में ब्रोन्कोपमोनिया भी विकसित हो सकता है, जिससे उनका श्वसन तंत्र खराब होने लगता है, शरीर में सूजन आने लगती है और जानवर कमजोर हो कर मर सकता है।
NADIS Animal Health Skills की मानें तो, इस त्वचा रोग के लिए कोई खास ट्रीटमेंट नहीं है। बस कुछ एंटीबायोटिक्स, एंटीइंफ्लेमेटरी दवाएं और विटामिन इंजेक्शन के जरिए इसे रोका जा सकता है। इसके अलावा इन वैक्सीन के जरिए इस बीमारी को रोका जा सकता है। जैसे
-lumpy skin disease virus (LSDV) Neethling vaccine
-Kenyan sheep and goat pox (KSGP) O-180 strain vaccines
-Gorgan goat pox (GTP) vaccine
भारत में आईसीएआर-नेशनल रिसर्च सेंटर ऑन इक्विन्स (ICAR-NRCE), IVRI और Lumpi-ProVacInd वैक्सीन लगाई जा रही है। इसके अलावा वैज्ञानिक वायरस के प्रसार को रोकने के प्रयास में संक्रमित जानवरों को स्वस्थ लोगों से अलग करने की सलाह देते रहे हैं। इसके अलावा बूचड़खाने में इस बीमारी को लेकर खास ध्यान रखा जाना चाहिए। क्योंकि यहां से ये तेजी से फैल सकता है।