
मुकेश शर्मा
मुकेश शर्मा दिल्ली यूनिर्विसिटी से जर्नलिज्म डिग्री होल्डर हैं और पिछले 8 साल से Health Journalism से जुड़े हुए ... Read More
Written By: Mukesh Sharma | Published : June 17, 2026 5:06 PM IST
loneliness impact on health (AI generated image)
हम बीमारियों से बचाव की बात करते हैं, फिटनेस की बात करते है और यहां तक कि अब तो हम भारतीय मेंटल हेल्थ की भी बात करने लगे हैं। लेकिन मेंटल हेल्थ से ही जुड़ा एक टॉपिक है, जिसे हम अभी तक इग्नोर कर देते हैं और यहां तक कि उसे हेल्थ से जुड़ी कोई समस्या समझा ही नहीं जाता है। वह टॉपिक कोई और नहीं बल्कि “अकेलापन” है। हालांकि, आपको इस बात का ध्यान रखना होगा कि अकेलेपन का मतलब अकेला रहना नहीं होता है बल्कि अकेलापन महसूस करना होता है। सरल शब्दों में कहें तो आप अपने लोगों या दोस्तों के बीच रहते हुए भी अकेलापन महसूस कर सकते हैं, वहीं हो सकता है काम से शहर से दूर किसी फ्लैट पर अकेले रहते हैं और क्या पता फिर भी आपको अकेलापन महसूस न हो। इस लेख में हम अकेलेपन के बारे में कुछ ऐसी ही चीजों के बारे में जानेंगे।
विश्व स्वास्थ्य संगठन की एक रिपोर्ट के अनुसार अकेलापन अपने आप में मेंटल हेल्थ प्रॉब्लम नहीं है बल्कि यह एक अनुभव है। लेकिन इसमें कोई शक नहीं है कि अकेलापन अनुभव होना डिप्रेशन, स्ट्रेस और एंग्जायटी जैसे मेंटल हेल्थ डिसऑर्डर से गहराई से जुड़ा होता है। सरल शब्दों में कहें तो अकेलेपन को आप कोई मानसिक बीमारी तो नहीं कह सकते हैं, लेकिन इसे कई बड़ी मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य होने का खतरा काफी हद तक बढ़ जाता है।
कोई एक नहीं बल्कि कई अलग-अलग फैक्टर हैं, जिनके कारण शहरों में अकेलेपन की समस्या तेजी से बढ़ती जा रही है जैसे -
इनके जैसे और भी कई इसी तरह कारण हैं, जिनके कारण शहरों में रहने वाले लोगों में अकेलापन बढ़ रहा है और क्रोनिक लोनलीनेस के कारण लोग लगातार बीमार पड़ते जा रहे हैं।
WION Health Pulse के दूसरे सेशन में इंटरव्यू के दौरान Dr. Jitendra Nagpal, Senior Consultant Psychiatrist and In Charge of the Institute of Mental Health & Life Skills Promotion at Moolchand Medcity ने बताया कि भारत के शहरी इलाकों की यंग जनरेशन अपनी करियर लाइफ में तो खूब तरक्की कर रही है, लेकिन अकेलेपन का बढ़ता दबाव लगातार उनकी मानसिक और शारीरिक हेल्थ को खराब कर रहा है।
इस बारे में आगे डॉ. जितेंद्र नागपाल ने बताया कि भारत में इसी कारण से नॉन-कम्युनिकेबल डिजीज का खतरा तेजी से बढ़ता जा रहा है। भारतीय संस्कृति में परिवार हर व्यक्ति के लिए उसका सबसे बड़ा सपोर्ट होता है और एक परिवार के रूप में हम अपने बच्चों को खूब तरक्की करने के लिए मोटिवेट करते हैं। लेकिन क्या सिर्फ ऊंचे लक्ष्य पाने के लिए ही अपने बच्चों को प्रेरित कर रहे हैं या फिर एक अच्छा जीवन जीने के लिए भी प्रेरित कर रहे हैं, हम सबको खुद से यह सवाल जरूर पूछना चाहिए।
डिसक्लेमर: इस लेख का उद्देश्य केवल अकेलेपन की गंभीरता और उससे होने वाली अन्य स्वास्थ्य समस्याओं के बारे में जानकारी देना है और इसमें दी गई जानकारी का इस्तेमाल किसी समस्या का इलाज करने के लिए नहीं है। इसके लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।