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Written By: akhilesh dwivedi | Updated : September 30, 2019 9:26 AM IST
यलो फीवर क्यों है जानलेवा, कैसे करें बचाव ?
येलो फीवर (Yellow fever) से नाइजीरिया के बाउची में 16 लोगों की मौत हो गयी है. मच्छरों के काटने से होने वाली बीमारी येलो फीवर जानलेवा मानी जाती है. नाइजीरिया जैसे देशों में येलो फीवर का प्रकोप हर साल हो ही जाता है. नाइजीरिया, अफ्रीका, साउथ अमेरिका में येलो फीवर का प्रकोप सबसे ज्यादा देखने को मिलता है. येलो फीवर का इलाज अभी तक कोई खास नहीं है. इस जानलेवा बुखार से बचने के लिए वैक्सीन जरूर कारगर हैं. येलो फीवर के वैक्सीन (Vaccine) से मौत जैसा खतरा टल जाता है.
मच्छरों के काटने से होने वाला येलो फीवर भी एक तरह के वायरस से फैलता है. येलो फीवर ऐसा बुखार है जिसे हैमरैजिक रोग कहा जाता है. इस जानलेवा बुखार को येलो फीवर इसलिए कहा जाता है क्योंकि कुछ मरीजों में पीलिया के लक्षण पाये जाते हैं. मच्छरों के काटने के बाद शरीर में पीलापन बढ़ने के कारण इसे येलो फीवर कहा जाता है.
तेज बुखार या फीवर
शरीर के किसी भी अंग से खून बहना (मुंह, नाक, कान, और पेट कहीं से भी)
कमजोरी के साथ उल्टी, जी मचलाना, पेट में दर्द
कुछ लोगों में गंभीर पीलिया
किडनी और लिवर पर सीधा असर. कई बार दोनों काम करना बंद कर देते हैं.
अगर आंकड़ों की बात करें तो आधे से ज्यादा लोग येलो फीवर होने के बाद मर जाते हैं. येलो फीवर होने के बाद लिवर और किडनी फंक्शन काम नहीं करता जिससे मरीज को बचाने में बहुत मुश्किल होती है. अगर येलो फीवर के वैक्सीन को पहले से ही लगवा लिया जाये तो इससे जान बच सकती है. येलो फीवर का वैक्सीनेशन कई देशों में किया जाता है. भारत में भी येलो फीवर का वैक्सीनेशन होता है.
अगर आप विदेश यात्रा पर जा रहे हैं खासकर अफ्रीका या नाइजीरिया तो आपको येलो फीवर का वैक्सीन लगवा लेना चाहिए. येलो फीवर की वजह से लिवर, किडनी, हार्ट और पेट से संबंधित कई बीमारिया एक साथ हो जाती हैं, जिसकी वजह से इलाज करना बहुत मुश्किल हो जाता है.