
अंजू रावत
अंजू रावत एक अनुभवी हेल्थ, फिटनेस, रिलेशनशिप, ब्यूटी और लाइफस्टाइल लेखक हैं, जिन्हें इन विषयों पर लिखने ... Read More
vitamin D
"मेरी हड्डियां कमजोर हो गई हैं... मुझे कमर, पीठ, हाथ और पैरों में अक्सर ही दर्द रहता है..." जब भी कोई ऐसी शिकायत करता है, तो उसे विटामिन डी की जांच कराने की सलाह दी जाती है। क्योंकि, हमारी हड्डियों, मांसपेशियों, नसों और इम्यून सिस्टम के लिए विटामिन डी बहुत जरूरी होता है। जब शरीर में इस विटामिन की कमी होती है, तो कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं होनी शुरू हो जाती हैं। आमतौर पर सूरज की रोशनी से विटामिन डी लेने की सलाह दी जाती है। लेकिन, कुछ खाद्य पदार्थों जैसे- सैल्मन मछली, टूना फिश, अंडे की जर्दी, मशरूम, फोर्टिफाइड दूध और फोर्टिफाइड प्लांट बेस्ड मिल्क आदि से विटामिन डी प्राप्त किया जा सकता है। वैसे तो सूरज की किरणों और खाद्य पदार्थों से विटामिन डी मिल जाता है, लेकिन जब शरीर में विटामिन डी की मात्रा काफी कम हो जाती है तो डॉक्टर इसका सप्लीमेंट लेने की सलाह दे सकते हैं। लेकिन, विटामिन डी की जरूरत क्या और कितनी होती है, आइए इस लेख में जानते हैं-
National Institute of Health के अनुसार, विटामिन डी एक ऐसा पोषक तत्व है, जो शरीर में कैल्शियम के अवशोषण में मदद करता है। फिर विटामिन डी और कैल्शियम मिलकर हड्डियों को मजबूत बनाने का काम करते हैं, ऑस्टियोपोरोसिस के खतरे को कम करने में मदद करते हैं। हालांकि, विटामिन डी शरीर में इसके अलावा भी कई अन्य काम करता है। जैसे-
NIH के अनुसार, विटामिन डी जरूरत उम्र के हिसाब से अलग-अलग हो सकती है।
जब शरीर में लंबे समय तक विटामिन डी की कमी रहती है, तो कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं विकसित हो सकती हैं। जैसे-
Disclaimer: शरीर के कई जरूरी कार्यों को करने के लिए विटामिन डी की जरूरत होती है। यह हड्डियों, मांसपेशियों और इम्यून सिस्टम को स्वस्थ रखने में भूमिका निभाता है। अगर बार-बार थकान होती है और लंबे समय से मांसपेशियों-हड्डियों में दर्द बना हुआ है, तो डॉक्टर की सलाह पर विटामिन डी की जांच जरूर कराएं। विटामिन डी की पूर्ति के लिए नियमित धूप लें और संतुलित-पौष्टिक आहार लें। अगर शरीर में विटामिन डी की कमी ज्यादा हो जाती है तो डॉक्टर की सलाह पर सप्लीमेंट लिया जा सकता है। NIH के अनुसार, बिना डॉक्टर की सलाह के विटामिन डी का सप्लीमेंट बिल्कुल नहीं लेना चाहिए। इससे शरीर में कैल्शियम का स्तर बढ़ सकता है और किडनी प्रभावित हो सकती है।