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निसंतानता या बांझपन (Infertility) को लेकर समाज मे कई तरह की भ्रांतियां हैं। भारतीय सामाजिक मानदंडों में प्रजनन क्षमता का एक महत्वपूर्ण स्थान है, जिसमें बच्चे पैदा करने पर जोर दिया जाता है, और अंततः समाज हमेशा महिलाओं को गर्भ धारण करने में असमर्थता के लिए दोषी ठहराता है। जबकि, डब्ल्यूएचओ के अनुसार, सामान्य आबादी में बांझपन की मौजूदगी 15 से 20 प्रतिशत है, जिसमें पुरुष बांझपन (Male Infertility) के कारणों का योगदान 20 से 40 प्रतिशत है। शोधकर्ताओं के अनुसार, पुरुष बांझपन की दर लगभग 23% है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि भारत में पिछले कुछ वर्षों से पुरुष बांझपन कि समस्या बढ़ रही है।
बांझपन एक प्रजनन समस्या है जो असुरक्षित यौन संबंध के 12 महीने या उससे अधिक समय के बाद भी गर्भावस्था के विफलता का कारण बनता है - International Committee for Monitoring Assisted Reproductive Technology, World Health Organization (WHO).
पुरुष बांझपन (Male Infertility) के कई कारण हैं। जैसे कि, शुक्राणुओं में कमी, शुक्राणु का कम उत्पादन, शुक्राणु (Sperm) के असामान्य कार्य में लेकर रुकावट, या शुक्राणु के वितरण मार्ग में रुकावट आदि। जननांग पथ (Genital Tract) की चोट या संक्रमण के कारण ऐसी कई समस्याएं हो सकती हैं। अन्य बाहरी कारक भी बांझपन का कारण बन सकते हैं: जैसे धूम्रपान, अत्यधिक शराब का पीना, खराब आहार का सेवन, कम व्यायाम, मोटापा, तनाव और कुछ रसायनों या कीटनाशकों के संपर्क में आना। बीमारियां, चोटें, पुरानी स्वास्थ्य समस्याएं और बदलती जीवनशैली पुरुष बांझपन की समस्याओं में सहायता कर सकती हैं।
जब लक्षण का पता चलता हैं, तो भारतीय सामाजिक मानसिकता सही समय पर मदद मांगने में देरी करती है- कुछ मामलों में पुरुष समाज में गलतफहमी या शर्मिंदगी के डर से अपने स्वयं के इनफर्टिलिटी टेस्ट (प्रजनन परीक्षण) से गुजरने से हिचकिचाते हैं। यहीं कारण है कि, पुरुषों और महिलाओं को अपने प्रजनन स्वास्थ्य (Reproductive Health) के प्रति समान रूप से जागरूक होने की आवश्यकता है। पुरुषों को यौन क्रिया संबंधी समस्याओं का इलाज कराने में संकोच नहीं करना चाहिए।
अच्छी खबर यह है कि, जितनी जल्दी आप किसी विशेषज्ञ के पास जाते हैं, उतनी ही जल्दी आप समस्या का निदान और समाधान कर सकते हैं। शारीरिक परीक्षण, ब्लड टेस्ट, सामान्य हार्मोन परीक्षण और वीर्य विश्लेषण (Semen Analysis) सहित आपके संपूर्ण चिकित्सा इतिहास का निदान किया जाता है। वीर्य विश्लेषण (क्या शुक्राणु अच्छी तरह से काम कर रहा है, और क्या वे गतिशील हैं) शुक्राणुओं के गठन और शुक्राणु की गतिशीलता के स्तर को देखता है। हालांकि, इसमें परिणाम चाहे जो भी हो, भले ही वीर्य परीक्षण में शुक्राणुओं की संख्या कम हो या शुक्राणु न हों, उपचार के कई विकल्प उपलब्ध हैं।
इसके बाद, ट्रांसरेक्टल अल्ट्रासाउंड, टेस्टिकुलर बायोप्सी (बांझपन के कारण को खत्म करने के लिए सहायक प्रजनन तंत्र में उपयोग के लिए शुक्राणु का संग्रह), हार्मोनल प्रोफाइल, और पोस्ट-स्खलन मूत्र विश्लेषण (यह पता लगाने के लिए कि शुक्राणु मूत्राशय में पीछे हट रहे हैं या नहीं) जैसे उपचार विकल्प भी शामिल हैं।
पुरुष बांझपन का निदान करने में मदद करने के लिए सबसे नई तकनीकों में से एक है शुक्राणु का डीएनए विखंडन परीक्षण (DNA Fragmentation Test)। यह जांच शुक्राणु की आनुवंशिक सामग्री में किसी भी समस्या का आकलन करने के लिए किया जाता है, क्योंकि यह पता लगा सकता है कि शुक्राणु में कोई डीएनए क्षति तो नहीं है। इसके अलावा, पुरुष बांझपन के कारण का अध्ययन करने के लिए स्पर्म ऐनुप्लोइडी टेस्ट (सैट) किया जा सकता है। यह शुक्राणु के नमूने में गुणसूत्र संबंधी असामान्यताओं को दर्शाता है।
सबसे पहले और सबसे महत्वपूर्ण, डॉक्टर उन कारकों से दूर रहने की सलाह देते हैं जो बांझपन का कारण बनते हैं, जैसें कि, धूम्रपान और शराब छोड़ना, जीवनशैली में बदलाव करना जो मधुमेह, मोटापा आदि को नियंत्रित करते हैं। इसके बाद, प्रजनन पथ में विभिन्न संक्रमणों से संबंधित एंटीबायोटिक उपचार की सिफारिश की जाती है। संभोग समस्याओं का इलाज दवा या परामर्श के रूप में किया जाता है, जो स्तंभन दोष या शीघ्रपतन जैसी स्थितियों में प्रजनन क्षमता में सुधार करने में मदद कर सकता है। अंडकोष की रुकावट के कारण एज़ोस्पर्मिया (निल शुक्राणु), ओलिगोस्पर्मिया (सीमित शुक्राणु उत्पादन) जैसी समस्याओं का इलाज किया जा सकता है। यह एक ऐसी तकनीक हैं, जहां डॉक्टर अंडकोष से शुक्राणु प्राप्त कर सकते हैं।
सहायक प्रजनन तकनीकों (एआरटी) में विभिन्न उपचार उपलब्धी दुनिया भर में बांझपन से जूझ रहे हजारों जोड़ों के लिए एक वरदान बनी हैं । पुरुष बांझपन के उपचार के लिए सबसे लोकप्रिय सहायक प्रजनन तकनीक में इंट्रायूटरिन इन्सेमिनेशन (IUI), इन विट्रो फर्टिलायझेशन (IVF) और इंट्रासाइटोप्लाज्मिक स्पर्म इंजेक्शन (आईसीएसआई) हैं। उन्ह उपचार प्रक्रिया में सामान्य स्खलन, सर्जिकल निष्कर्षण या दाता व्यक्तियों से शुक्राणु प्राप्त करना शामिल है।
आईवीएफ में, अंडाशय से अंडा निकाला जाता है और प्रयोगशाला स्थितियों में शुक्राणु द्वारा निषेचित किया जाता है, और निषेचित अंडे (भ्रूण) को वापस गर्भाशय में फिर से प्रत्यारोपित किया जाता है। आईयूआई में स्पर्म को एक विशेष ट्यूब की मदद से महिला के गर्भाशय में रखा जाता है। इस विधि का उपयोग केवल तभी किया जाता है जब पुरुष साथी के शुक्राणुओं की संख्या बहुत कम होती है, शुक्राणु की गतिशीलता कम होती है, या प्रतिगामी स्खलन होता है। (आईसीएसआई) एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें शुक्राणु और अंडे दोनों संबंधित साथी से प्राप्त किए जाते हैं, और फिर एक शुक्राणु को अंडे में इंजेक्ट किया जाता है। इसके बाद निषेचित अंडे को महिला के गर्भाशय में प्रत्यारोपित किया जाता है।
अब पुरुष बांझपन जैसी समस्याओं से निपटने वाले जोड़ों की मदद के लिए माइक्रो-टीईएसई, आईएमएसआई और स्पर्म वीडी क्रायोप्रेजर्वेशन डिवाइस जैसी उन्नत प्रौद्योगिकियां भी उपलब्ध हैं।
(Inputs By: DR. Hrishikesh Pai, Consultant Gynaecologist, And Infertility Specialist)