Computer Vision Syndrome: क्यों बढ़ रही है कंप्यूटर विजन सिंड्रोम की समस्या? डॉक्टर से जानिए ड्राई आई होने पर क्या करें
लगभग 80% लोग कंप्यूटर और लैपटॉप का इस्तमाल करते है जिससे उन्हें धुंधली दृष्टि, आंखों में जलन, आंखों में सूजन, सूखी आंखें और सिरदर्द जैसे कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है.
आज लाखों लोग कंप्यूटर, टैबलेट और स्मार्ट फोन को अपनी रोजमर्रा की जरूरतों के आधार पर उपयोग करते हैं। कंप्यूटर स्क्रीन की चमक एवं ज्यादा इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के प्रयोग के कारण आंखों में थकान, धुंधला दिखाई देना, सिरदर्द , ड्राई आई, काम करते हुए आंखों से पानी आना और आइस्ट्रेन जैसे कई अन्य लक्षण आम हो गए हैं। लगभग 80% लोग कंप्यूटर और लैपटॉप का इस्तमाल करते है जिससे उन्हें धुंधली दृष्टि, आँखों में जलन, आंखों में सूजन, सूखी आंखें और सिरदर्द जैसे कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। क्योंकि से समस्याएं कंप्यूटर पर काम करने से होती हैं इसलिए इन्हें मेडिकल भाषा में कंप्यूटर विजन सिंड्रोम (सीवीएस) (Computer Vision Syndrome) कहते हैं। अक्सर आंखों की समस्या हर किसी में अलग अलग होती है जैसे किसी को ड्राई आई की प्रॉब्लम होती है तो कुछ लोगों को धुंधला दिखता है। आज के दौर में हर कोई कंप्यूटर, टैबलेट और स्मार्टफोन पर पर कम से कम 8 से 10 घंटे बिताता है। जिससे उनकी आंखों में सूखापन (Dry Eye Problem) रहता है। ग्रेटर नोएडा के शारदा अस्पताल में नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ अदिति शर्मा आज इस समस्या से बचने के लिए कुछ आसान टिप्स बता रही हैं।
इन लक्षणों के दिखने पर डॉक्टर से संपर्क करें
- आंखों या सिर में भारीपन और धुंधला दिखाई देना
- आंखें लाल होना और पानी आना
- आंखों में खुजली होना
- रंगों का साफ दिखाई न देना
- लगातार सिरदर्द होना और आंखों में थकावट महससू होना
ये सच है कि उम्र बढ़ने के साथ आंखों की रोशनी कम होने लगती है लेकिन अगर डाइट और लाइफस्टाइल पर ध्यान दिया जाए तो इस समस्या को काफी हद तक कम किया जा सकता है। इसके लिए अपनी डाइट में फल, हरी सब्जियां और सलाद शामिल करें। सुबह उठकर टहलने, योग, एक्सरसाइज करें और पर्याप्त नींद लेकर इस समस्या से जल्द से जल्द बचा जा सकता है।
आंख से पानी आए तो क्या करें?
अगर आपकी आंखों से लगातार पानी निकल रहा है और साथ ही हल्की सूजन आ गई है तो ऐसे में आप तुरंत अपनी आंखों की सिकाई करें। इसके लिए सूती साफ कपड़ा लें और उसे गर्म पानी में निचोड़कर अपनी आंखों की सिकाई करें। बार-बार आंखों को धोने से बचें, दिन में केवल 2 बार ठंडे पानी से आंखें धोएं। अगर आंखों में ज्यादा जलन और खुजली महसूस हो रही है तो ठंडे पानी से धोएं।
आंखों में भारीपन क्यों होता है?
शुगर के लगातार बढ़ने और ब्लड प्रेशर के कारण भी आंखों पर दबाव पड़ता है। जिससे आंखों में भारीपन महसूस होता है और यही भारीपन ग्लूकोमा या काला मोतिया बन जाता है। अगर इसका समय रहते इलाज न कराया जाए तो व्यक्ति अंधेपन का शिकार हो जाता है। 40 साल की उम्र के बाद यह समस्या ज्यादातर लोगों में दिखाई देती है। सब्जियों का सूप आंखों की समस्या को दूर करने के लिए काफी फायदेमंद होता है।
ड्राई आई सिंड्रोम
यह एक ऐसी समस्या है जिससे आंखों में पर्याप्त मात्रा में आंसू नहीं बन पाते, लंबे समय तक मोबाइल लैपटॉप का इस्तेमाल करने से यह समस्या होती है। इससे बचने के लिए डॉक्टर द्वारा दिये गए ड्रॉप का इस्तेमाल करें और अपनी स्क्रीन टाइम को कम करे। अपनी मर्जी से कोई भी आई ड्रॉप का इस्तेमाल न करें।
बच्चों के लिए खास टिप्स
बच्चों में आंखों की एलर्जी कॉस्मेटिक उत्पादों और आंख के ड्रॉप्स से भी हो सकती है जिनका उपयोग आंखों में सूखापन का इलाज करने के लिए किया जाता है। इसलिए बिना डॉक्टर की सलाह के कोई भी ड्रॉप या दवा बच्चों की आंखों में ना डालें। बच्चों को धूल, मिट्टी से बचाएं।