Gen-z में ओवरथिंकिंग क्यों बढ़ रही है? क्या मोबाइल और सोशल मीडिया इसके लिए जिम्मेदार हैं
#HumFitTohIndiaHit: जैन-जी में ओवरथिंकिंग का बढ़ना काफी गंभीर समस्या है, जिसके पीछे कई कारण काम करते हैं। सोशल मीडिया, मोबाइल का अत्यधिक उपयोग, करियर का दबाव और जानकारी की अधिकता जैसे कारक इस समस्या को बढ़ा रहे हैं।
Written by Dr. Astik Joshi|Updated : March 17, 2026 8:57 AM IST
पिछले कुछ सालों में भारत में मानसिक स्वास्थ्य के प्रति बड़े स्तर पर जागरूकता देखी गई है। पहले मेंटल हेल्थ, डिप्रेशन, एंजाइटी पर लोग खुलकर बात कर रहे हैं। लेकिन जैन-जी (Gen Z) यानी 1997 से 2012 के बीच जन्मी पीढ़ी में ओवरथिंकिंग, एंग्जायटी और मानसिक तनाव तेजी से बढ़ रहा है।
आज का युवा पहले से ज्यादा जागरूक, डिजिटल रूप से कनेक्टेड और महत्वाकांक्षी है, लेकिन इसके साथ ही वह अधिक सोचने, खुद की तुलना करने और भविष्य को लेकर चिंतित रहने की समस्या से भी जूझ रहा है। ओवरथिंकिंग सिर्फ ज्यादा सोचने की आदत नहीं है, बल्कि यह एक मानसिक प्रक्रिया है जिसमें व्यक्ति बार-बार एक ही विचार, चिंता या स्थिति के बारे में सोचता रहता है और उससे बाहर नहीं निकल पाता।
ओवरथिंकिंग क्या होती है?
ओवरथिंकिंग का मतलब है किसी बात, घटना या फैसले के बारे में जरूरत से ज्यादा सोचते रहना। ओवर थिंकिंग को मुख्य रूप से 2 हिस्सों में बांटा जाता है।
रूमिनेशन (Rumination)- ओवरथिंकिंग की इस स्थिति में व्यक्ति बार-बार पिछली घटनाओं के बारे में सोचता है। जैसे- “मैंने ऐसा क्यों कहा?” “अगर मैंने ऐसा किया होता तो क्या होता?”
वरींग (Worrying)- इस स्थिति में व्यक्ति भविष्य को लेकर चिंतित रहता है। उदाहरण के लिए- “अगर मैं फेल हो गया तो?” “अगर मुझे अच्छी नौकरी नहीं मिली तो?”
दोनों ही स्थितियां मानसिक तनाव को बढ़ाती हैं।
जैन-जी में ओवरथिंकिंग क्यों बढ़ रही है?
सोशल मीडिया पर तुलना- आज की पीढ़ी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक, इंस्टाग्राम और ट्विटर पर ज्यादा समय बिता रही है। ऐसे प्लेटफॉर्म पर लोग अक्सर अपनी जिंदगी का सबसे अच्छा हिस्सा दिखाते हैं। जब जेन-जी के युवा इन पोस्ट्स को देखते हैं तो उनके मन में तुलना शुरू हो जाती है। यह तुलना धीरे-धीरे मन में नेगेटिव ख्याल लेकर आती है और व्यक्ति अपने जीवन के फैसलों को लेकर ज्यादा सोचने लगता है।
मोबाइल और डिजिटल ओवरलोड- मोबाइल फोन आज के समय में जानकारी का सबसे बड़ा सोर्स बन चुकी है। लेकिन लगातार नोटिफिकेशन, मैसेज, ईमेल और सोशल मीडिया अपडेट दिमाग को हमेशा एक्टिव रखते हैं। इस स्थिति में जब दिमाग को लगातार नई जानकारी मिलती रहती है तो उसे आराम करने का समय नहीं मिलता। इससे सोचने की सीमा ज्यादा हो जाती है। इससे ओवरथिंकिंग बढ़ जाती है।
भविष्य को लेकर असुरक्षा- जैन-जी एक ऐसी पीढ़ी है जो असल जिंदगी से लेकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कॉम्पिटिशन के दौर में जी रही है। आज के युवाओं को कई तरह के दबाव झेलने पड़ते हैं अच्छी नौकरी पाने का दबाव आर्थिक स्थिरता की चिंता, बदलती टेक्नोलॉजी का डर इन सब कारणों से युवा अक्सर भविष्य को लेकर ज्यादा सोचने लगते हैं।
बहुत ज्यादा जानकारियां- पुरानी पीढ़ियों के पास जानकारी की कमी देखी जाती थी। जो लोग जानकारी रखते थे, उन्हें इसे प्राप्त करने में सालों की पढ़ाई, रिसर्च और घंटों मेहनत करनी पड़ती थी। लेकिन जैन-जी के पास सभी प्रकार की जानकारियां एक क्लिक पर मौजूद हैं। AI, Chatboat, Chatgpt जैसे टूल ने जानकारी को जैन-जी के सामने बिल्कुल आसानी से परोस दिया है। जब कोई व्यक्ति किसी समस्या या फैसले के बारे में इंटरनेट पर खोजता है तो उसे इतने ज्यादा विकल्प और राय मिलती हैं कि वह कन्फ्यूजन में पड़ जाता है। इतनी जानकारी मिलने के बाद किसी भी मुश्किल का फैसला लेना सिर्फ मुश्किल नहीं बल्कि नामुमकिन सा हो जाता है।
परफेक्शनिज्म- जैन-जी में परफेक्शनिज्म यानी हर चीज को बिल्कुल सही करने की इच्छा भी काफी बढ़ गई है। सोशल मीडिया पर दूसरों की उपलब्धियां देखकर कई युवा यह मान लेते हैं कि उन्हें भी हर क्षेत्र में परफेक्ट होना चाहिए। जब कोई व्यक्ति खुद से बहुत ज्यादा उम्मीदें रखता है तो वह छोटी-छोटी गलतियों पर भी ज्यादा सोचने लगता है। इससे ओवरथिकिंग की परेशानी होना लाजिमी है।
क्या मोबाइल के कारण जैन-जी में हो रही है ओवरथिकिंग?
मोबाइल खुद समस्या नहीं है, लेकिन उसका अनियंत्रित उपयोग मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है।
लगातार नोटिफिकेशन ध्यान भटकाते हैं
सोशल मीडिया तुलना की भावना बढ़ाता है
देर रात स्क्रीन देखने से नींद खराब होती है
डिजिटल जानकारी दिमाग को ज्यादा सक्रिय रखती है
इन सभी कारणों से दिमाग को शांत होने का मौका नहीं मिलता और व्यक्ति ज्यादा सोचने लगता है।
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निष्कर्ष
जैन-जी में ओवरथिंकिंग का बढ़ना काफी गंभीर समस्या है, जिसके पीछे कई कारण काम करते हैं। सोशल मीडिया, मोबाइल का अत्यधिक उपयोग, करियर का दबाव और जानकारी की अधिकता जैसे कारक इस समस्या को बढ़ा रहे हैं। हालांकि तकनीक को पूरी तरह दोष देना सही नहीं होगा। असली जरूरत है डिजिटल संतुलन, स्वस्थ आदतों और मानसिक जागरूकता की। अगर जैन-जी अपने समय, तकनीक और मानसिक ऊर्जा का सही उपयोग करना सीख जाए तो वे न सिर्फ ओवरथिंकिंग से बच सकते हैं बल्कि अधिक संतुलित जीवन जी सकता है।
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