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ओवेरियन कैंसर का पता क्यों नहीं चल पाता है? डॉक्टर से जानें महिलाओं को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए

Ovarian Cancer: बहुत कम महिलाएं व पुरुष ओवेरियन कैंसर के बारे में जानते हैं। इसलिए हमने डॉक्टर से कैंसर के इस प्रकार के बारे में विस्तार से जाना। आइए बताते हैं उन्होंने क्या जानकारी दी।

ओवेरियन कैंसर का पता क्यों नहीं चल पाता है? डॉक्टर से जानें महिलाओं को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए
VerifiedMedically Reviewed By: Dr. Richa Arora Miglani

Written by Vidya Sharma |Updated : February 16, 2026 3:34 PM IST

ओवेरियन कैंसर को अक्सर साइलेंट किलर कहा जाता है क्योंकि इसके लक्षण जल्दी पता नहीं चलते हैं। भारत में यह महिलाओं में होने वाला तीसरा सबसे ज्यादा कैंसर है। गौरतलब है कि सर्वाइकल और यूटरिन कैंसर महिलाओं में सबसे ज्यादा होते हैं। फिर भी ओवेरियन कैंसर के बारे में जागरूकता बहुत कम है। इंडियन काउंसिल आफ मेडिकल रिसर्च के अनुसार हर एक लाख महिलाओं में से 6.8 महिलाओं को हर साल ओवेरियन कैंसर होता है। यह आंकड़े दिखने में छोटे लग सकते हैं लेकिन जिस किसी भी महिला को यह कैंसर होता है, उसकी पूरी जिंदगी उथल-पुथल हो जाती है क्योंकि अक्सर यह बीमारी बहुत देर से पता चलती है जिस वजह से इलाज बहुत ही मुश्किल हो जाता है। 

हमने आरजी हॉस्पिटल्स के मिनिमली इनवेसिव गायनेकोलॉजी & रोबोटिक सर्जरी के प्रमुख डॉक्टर ऋचा अरोड़ा मिगलानी से बात की। उन्होंने बताया कि ‘चूंकि ओवेरियन कैंसर चुपचाप बढ़ता है इसलिए यह बहुत खतरनाक होता है। शुरुआती स्टेज में लक्षण इतने हल्के होते हैं कि वह नजरअंदाज हो जाते हैं। पेट फूलना, जल्दी पेट भर जाना, पेल्विक हिस्से में हल्की तकलीफ होना, या बार-बार पेशाब आना शरीर की आम समस्याओं जैसा लग सकता है।' वह आगे कहती हैं कि 'कई औरतें इन लक्षणों को नजरअंदाज कर देती हैं, और इसके लिए खाने, हार्मोन, स्ट्रेस या लंबे काम के दिनों को जिम्मेदार ठहराती हैं। जब तक वे डॉक्टर के पास पहुंचती हैं, तब तक कैंसर एडवांस्ड स्टेज में पहुंच चुका होता है, जिससे इलाज मुश्किल हो जाता है और ठीक होने में ज्यादा समय लगता है।' आइए विस्तार से जानते हैं कि ऐसा क्यों होता है और समय रहते ओवेरियन कैंसर की पहचान क्यों नहीं हो पाती?

ओवेरियन कैंसर को जल्दी पहचानना क्यों मुश्किल होता है?

अन्य कैंसर में पहचान के लिए कई तरीके होते हैं लेकिन ओवेरियन कैंसर में कोई भी साधारण या विश्वसनीय स्क्रीनिंग टेस्ट नहीं होता है इसलिए बहुत सारी महिलाएं रुटीन चेकअप नहीं कर पाती है। इसका अर्थ है कि बीमारी अक्सर तब पकड़ में आती है जब लक्षण बहुत गंभीर हो जाते हैं और उन्हें नजरअंदाज करना मुश्किल हो जाता है। मामले और भी पेचीदा इसलिए हो जाता है क्योंकि अंडाशय पेट के अंदर गहराई में छिपे होते हैं, इसलिए सामान्य जांच के दौरान छोटी वृद्धि भी आमतौर पर महसूस नहीं की जा सकती है।

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इन्हीं दो कारणों की वजह से ओवेरियन कैंसर बिना ज्यादा ध्यान खींचे और चुपचाप बढ़ता है। जब तक इसका पता चलता है, तब तक बहुत देर हो चुकी होती है। देर से पता चलने पर इमोशनल शॉक लगता है और लंबे तथा मुश्किल इलाज के साथ पैसे की भी समस्या होती है। 

किनको होता है सबसे ज्यादा खतरा?

जिन महिलाओं को मेनोपॉज होता है उन्हें ओवेरियन कैंसर होने का ज्यादा खतरा होता है लेकिन युवा महिलाओं को भी यह हो सकता है। PCOS और एंडोमेट्रियोसिस से पीड़ित महिलाओं को भी ओवेरियन कैंसर होने का ज्यादा खतरा होता है। बहुत देर उम्र में बच्चे पैदा करना और कम बच्चे पैदा करने या गर्भावस्था धारण ही ना करना भी ओवेरियन कैंसर होने के खतरे को बढ़ा देता है। इसके अलावा जिनके परिवार में ब्रेस्ट कैंसर या ओवेरियन कैंसर पहले रहता है उन्हें भी इसका खतरा रहता है खास करके ऐसी महिलाएं जो भी BRCA जीन म्यूटेशंस वाली होती है उन्हें सबसे ज्यादा खतरा होता है। प्रदूषण, केमिकल एक्स्पोज़र और मोटापे से भी ओवेरियन कैंसर होने की संभावना प्रबल हो जाती है। 

ओवेरियन कैंसर के लक्षण- जिन्हें महिलाओं को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए

ओवेरियन कैंसर अक्सर अपने आप नजर नहीं आता है। इस कैंसर के शुरुआती लक्षण बहुत ही साधारण से लग सकते हैं। इसी वजह से लोग इन पर ज्यादा ध्यान नहीं देते हैं। सबसे जरूरी चीज यह होती है कि लगातार ऐसे लक्षणों पर नजर रखना जो अक्सर दिखे और जल्दी ना जाए। अगर निम्न लक्षण कुछ हफ्तों से ज्यादा रहें, तो इनकी जांच करवाना जरूरी है-

  • लगातार पेट फूलना या पेट में भारीपन होना 
  • पेल्विक या पेट के निचले हिस्से में दर्द होना 
  • थोड़ा-थोड़ा खाने के बाद पेट भरा हुआ महसूस होना
  • बार-बार या तुरंत पेशाब आना
  • कब्ज या पेट में बदलाव होना 
  • बिना किसी वजह के वजन में बदलाव होना 
  • लगातार थकान होना 
  • सेक्स के दौरान दर्द होना 

अक्सर यह लक्षण अपने आप में नुकसानदेह नहीं होते हैं लेकिन जब यह नए लगे या बहुत असामान्य लगे तो समझ ले कि आपका शरीर डॉक्टर की मदद मांग रहा है।

महिलाओं को क्या करना चाहिए?

ओवेरियन कैंसर को रोकने का कोई निश्चित तरीका नहीं है, लेकिन सतर्क रहने से मदद मिलती है। नियमित चाहे आप ठीक महसूस कर रही हों, तब भी गाइनेकोलॉजिकल चेकअप जरूरी होता है। अगर आपके परिवार में कैंसर है, तो जेनेटिक काउंसलिंग से स्थिति साफ हो सकती है। रोजाना के छोटे-छोटे फैसले जैसे शारीरिक रूप से सक्रिय रहना, PCOS या एंडोमेट्रियोसिस को मैनेज करना, वजन नियंत्रण में रखना, और नुकसानदायक केमिकल्स के संपर्क में कम आना भी लंबे समय तक सेहत के लिए अच्छे होते हैं।

चुप्पी को तोड़े 

डॉक्टर कहती हैं कि ओवेरियन कैंसर धीरे-धीरे बढ़ सकता है, लेकिन महिलाओं को चुपचाप तकलीफ़ नहीं झेलनी चाहिए। लगातार हो रही परेशानी के बारे में बात करना, अपनों को लक्षणों को गंभीरता से लेने के लिए प्रोत्साहित होना या अन्य महिलाओं को प्रोत्साहित करना, और जल्दी डॉक्टर को दिखाना इलाज के नतीजे में बदलाव ला सकता है।

जागरूकता बचाव का वादा नहीं करती, लेकिन इसका मतलब जल्दी डायग्नोसिस, बेहतर इलाज के विकल्प और ज्यादा समय हो सकता है। ऐसी दुनिया में जहां महिलाएं अक्सर खुद की सेहत को ज्यादा तवज्जो नहीं देती हैं वहां अगर महिला अपने शरीर पर ध्यान देती है और अगर मतलबी कही जाती है तो मतलबी होना भी बहुत जरूरी है।

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Highlights

  • अन्य कैंसर में पहचान के लिए कई तरीके होते हैं लेकिन ओवेरियन कैंसर में कोई भी साधारण या विश्वसनीय स्क्रीनिंग टेस्ट नहीं होता है
  • ओवेरियन कैंसर धीरे-धीरे बढ़ सकता है, लेकिन महिलाओं को चुपचाप तकलीफ़ नहीं झेलनी चाहिए।
  • लगातार पेट फूलना या पेट में भारीपन होना, पेल्विक या पेट के निचले हिस्से में दर्द होना इसके लक्षण हैं।

Disclaimer: प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।