... Read More
By clicking “Accept All Cookies”, you agree to the storing of cookies on your device to enhance site navigation, analyze site usage, and assist in our marketing efforts. Cookie Policy.
Written By: Puja Mehrotra | Published : March 27, 2025 12:16 PM IST
पीरियड्स के दौरान हाइजीन का ध्यान रखना बेहद जरूरी होता है. अक्सर महिलाएं लापरवाही में सैनिटरी नैपकिन (Sanitary Napkin) या टैम्पोन लंबे समय तक लगाए रखती हैं, जिससे इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है. एक्सपर्ट्स के मुताबिक, सैनिटरी नैपकिन को 4 से 6 घंटे में बदलना बहुत जरूरी होता है, भले ही फ्लो हल्का हो. ऐसा न करने पर बैक्टीरियल और फंगल इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है, जिससे गंभीर समस्याएं हो सकती हैं.
लड़कियों और महिलाओं में सबसे बड़ी समस्या होती है यूरिनरी इन्फेक्शन की. ये तब और भयावह हो जाती है जब लड़कियां पीरियड्स के दौरान घंटों सैनिटरी नैपकिन नहीं बदलती हैं और फिर उन्हें इन्फेक्शन, खुजली और प्राइवेट पार्ट में कई तरह की परेशानियों से दो चार होना पड़ता है. इंडिया.कॉम ने महिलाओं की इस समस्या पर एक्सपर्ट से बात की और जानने की कोशिस की कि कितनी देर और कितने घंटे में सैनिटरी नैपकिन को बदल देना चाहिए.
पीरियड्स के दौरान हाइजीन का ध्यान रखना बेहद जरूरी होता है. अक्सर महिलाएं लापरवाही में सैनिटरी नैपकिन (Sanitary Napkin) या टैम्पोन लंबे समय तक लगाए रखती हैं, जिससे इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है. एक्सपर्ट्स के मुताबिक, सैनिटरी नैपकिन को 4 से 6 घंटे में बदलना बहुत जरूरी होता है, भले ही फ्लो हल्का हो. ऐसा न करने पर बैक्टीरियल और फंगल इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है, जिससे गंभीर समस्याएं हो सकती हैं.
पीरियड के दौरान सैनिटरी नैपकिन को कितने घंटे बाद बदलना चाहिए, यह इस बात पर निर्भर करता है कि आपका फ्लो कितना हल्का या ज्यादा है. डॉ. आकांक्षा वत्स फैमिली फिजिशियन हैं वो बताती हैं, 'सामान्य तौर पर सैनिटरी नैपकिन को हर 4 से 6 घंटे में बदल देना चाहिए. आपका फ्लो कम हो या फिर ज्यादा इसका इससे बहुत फर्क नहीं पड़ता है. इन्फेक्शन का खतरा कम हो इसलिए एक समय के बाद सैनिटरी पैड्स को बदल लेना चाहिए. अगर आपका फ्लो भारी है, तो इसे 2 से 4 घंटे में बदलना बेहतर होता है.' डॉक्टर आकांक्षा आगे बताती हैं, 'लड़कियां फ्लो नहीं होने पर या जानकारी के अभाव में कई कई बार एक एक दिन तक पैड्स नहीं बदलती हैं जिसके बाद वह इन्फेक्शन और खुजली की शिकायत के साथ हमारे पास आती हैं.'
लंबे समय तक एक ही नैपकिन का इस्तेमाल करने से बैक्टीरिया पनप सकता है जिससे यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन (UTI) या रैशेज जैसी समस्याएं हो सकती हैं. पीएसआरआई की सीनियर कंसलटेंट और गाइनोकोलॉजिस्ट बीरबाला ने बताया, 'पर्सनल हाइजिन मेंटेन करने के लिए नियमित अंतराल पर नैपकिन बदलें और हर बार हाथ अच्छे से धोएं. अगर आपको कोई असुविधा या जलन महसूस हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए.'
बैक्टीरियल ग्रोथ: लंबे समय तक एक ही नैपकिन लगाए रखने से बैक्टीरिया और फंगस तेजी से पनपने लगते हैं, जिससे वजाइना इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है.
जलन और खुजली: लंबे समय तक गीले नैपकिन की वजह से वजाइना में जलन, खुजली और रैशेज हो जाते हैं या फिर होने का खतरा होता है.
टॉक्सिक शॉक सिंड्रोम (TSS): अगर लंबे समय तक नैपकिन या टैम्पोन कप्स का इस्तेमाल करने से कई बार TSS नामक रेयर लेकिन गंभीर बैक्टीरियल इंफेक्शन हो सकता है. इसमें अक्सर तेज बुखार, उल्टी, दस्त और ब्लड प्रेशर जैसे लक्षण देखने को मिलते हैं.
यूटीआई का खतरा: पीरियड्स के दौरान सफाई में लापरवाही बरतने से यूटीआई (Urinary Tract Infection) का खतरा भी बढ़ जाता है.
खुशबू वाले नैपकिन से बचें: खुशबू वाले नैपकिन में सुगंध के लिए केमिकल का उपयोग किया जाता है और जरूरी नहीं कि वह आपको सूट करे. यह भी हो सकता है कि यह स्किन को नुकसान पहुंचाए .
कॉटन नैपकिन चुनें: इन दिनों बाजार में कई तरह के पैड्स मौजूद हैं. खुशबू वाले, सिंथेटिक पैड और कॉटन पैड. एक्सपर्ट का मानना है कि बेस्ट कॉटन नैपकिन ही होती है इसमें स्किन को सांस लेने की जगह भी मिलती है.
टैम्पोन/मेंस्ट्रुअल कप का सही इस्तेमाल करें: टैम्पोन को हर 4-6 घंटे में बदलें. मेंस्ट्रुअल कप को भी सही तरीके से साफ करने की जरूरत होती है.
डॉ. आकांक्षा कहती हैं कि अगर आपको इन्फेक्शन हो भी जाता है तो आप ये ध्यान रखिए कि आपको सिर्फ पानी से ही अपने प्राइवेट पार्ट को साफ करना है क्योंकि शरीर सेल्फ रिकवरी करती है. एक्सर्पट सलाह देते हैं कि अगर पीरियड्स के दौरान आपको बार-बार जलन, खुजली, या फिर जरूरत से ज्यादा डिस्चार्ज हो तो यह इंफेक्शन हो सकता है. ऐसे में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें.