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हाई बीपी को Silent Killer क्यों कहा जाता है? जानें इसके शुरुआती लक्षण

हाई ब्लड प्रेशर एक आम लेकिन गंभीर समस्या है। आजकल कई लोग हाई बीपी की समस्या से जूझ रहे हैं। हाई बीपी में हृदय को रक्त पंप करने के लिए ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है, इसे साइलेंट किलर भी माना जाता है।

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Written By: Anju Rawat | Published : July 15, 2026 6:44 PM IST

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Medically Verified By: Dr. Viveka Kumar

High Blood Pressure: क्या आपको हर वक्त सिरदर्द रहता है? या अक्सर थकान-कमजोर महसूस होती है? ये संकेत हाई बीपी के हो सकते हैं। इसलिए इन लक्षणों के नजर आने पर एक बार बीपी का चेकअप जरूर कराना चाहिए। हालांकि, कई लोगों में हाई बीपी के कोई लक्षण नहीं दिखते हैं। दरअसल, हाई बीपी के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। पहले इसे सिर्फ बुजुर्गों और अधिक उम्र के लोगों से जोड़ा जाता था। लेकिन, अब बच्चों और युवाओं में हाई बीपी के मामले सामने आ रहे हैं। लेकिन, हैरानी की बात यह है कि हाई बीपी के लक्षण शुरुआत में नजर नहीं आते हैं। जब बीमारी काफी बढ़ चुकी होती है और शरीर के अंगों को नुकसान पहुंचा चुकी होती है, तब इसका पता चलता है। हाई बीपी को साइलेंट किलर कहा जाता है यानी यह शरीर को अंदर ही अंदर नुकसान पहुंचा रहा होता है और व्यक्ति की जान तक ले सकता है। आइए, मैक्स हॉस्पिटल, साकेत के कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. विवेका कुमार (Dr. Viveka Kumar, Chairman, Cardiology, Max Hospital, Saket) से जानते हैं कि हाई बीपी को साइलेंट किलर क्यों कहा जाता है?

हाई बीपी को क्यों कहा जाता है Silent Killer?

डॉ. विवेका कुमार बताते हैं कि आजकल बीपी की समस्या बेहद आम हो गई है, कई लोग इस बीमारी से जूझ रहे हैं। दरअसल, हाई बीपी बिना लक्षणों के ही शरीर के अंदर धीरे-धीरे नुकसान पहुंचाता रहता है। बहुत से लोगों को सालों तक इस बीमारी का पता ही नहीं होता है और जब पता चलता है, तब तक यह बीमारी हृदय, किडनी, आंखों और मस्तिष्क को प्रभावित कर चुका होती है। यही वजह है कि इसे साइलेंट किलर (Silent Killer) कहा जाता है।

हाई बीपी क्या है और क्यों होता है?

डॉ. विवेका कुमार बताते हैं कि हाई बीपी तब होता है, जब धमनियों में खून का दबाव सामान्य से ज्यादा हो जाता है। लगातार धमनियों पर दबाव पड़ने से, हृदय को ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है। इससे हार्ट अटैक, स्ट्रोक, किडनी फेलियर और आंखों की रोशनी कमजोर होने जैसी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं। सबसे खतरनाक बात यह है कि शुरुआती चरण में इसके कोई स्पष्ट संकेत नहीं होते। यही कारण है कि इसे Silent Killer कहा जाता है।

हाई बीपी के लक्षण क्या होते हैं?

डॉ. विवेका बताते हैं कि शुरुआत में ज्यादातर लोग हाई बीपी के लक्षणों को सामान्य समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। आमतौर पर हाई बीपी के लक्षण तब महसूस होते हैं, जब स्थिति बिगड़ चुकी होती है और कई अंगों को नुकसान पहुंचा चुकी होती है। लेकिन, अगर आपको ये लक्षण नजर आए तो एक बार बीपी की जांच जरूर कराएं। जैसे-

  • बार-बार सिरदर्द होना
  • नाक से खून आना
  • थकान और कमजोरी महसूस होना
  • धुंधला दिखाई देना

हालांकि, ये लक्षण सिर्फ हाई बीपी के नहीं होते हैं। हाई बीपी के अलावा भी कुछ स्वास्थ्य समस्याओं में इस तरह के लक्षण महसूस हो सकते हैं। इसलिए बीपी की नियमित जांच बहुत जरूरी है। कई लोगों में लंबे समय तक हाई बीपी के कोई लक्षण नजर नहीं आते हैं।

हाई बीपी के क्या कारण हैं?

हाई बीपी कई कारणों की वजह से हो सकता है। इनमें शामिल हैं-

  • लंबे समय तक तनाव में रहना
  • बैलेंस्ड और पोषक तत्वों से भरपूर भोजन न खाना
  • ज्यादा नमक का सेवन करना
  • मोटापा और शारीरिक गतिविधि न करना
  • धूम्रपान और शराब का सेवन
  • यह जेनेटिक भी हो सकता है, यानी परिवार में यह बीमारी है तो आप में इसका खतरा ज्यादा हो सकता है

हाई बीपी से बचाव के लिए क्या करें?

हाई बीपी से बचाव के लिए आप कुछ चीजों का ध्यान रख सकते हैं।

  • हाई बीपी से बचने के लिए बैलेंस डाइट लेना बहुत जरूरी है।
  • नमक का सेवनकम मात्रा में करें।
  • रोजाना एक्सरसाइज या योग जरूर करें।
  • वजन कंट्रोल में रखें और मोटापे से बचें।
  • तनाव दूर करें और धूम्रपान-शराब का सेवन न करें।

अगर हाई बीपी की वजह से होने वाली गंभीर समस्याओं से बचना है, तो समय-समय पर बीपी की जांच जरूर करवाते रहें। खासकर, अगर आपके परिवार में हाई बीपी का इतिहास रहा है तो नियमित जांच बहुत जरूरी है।

Disclaimer: हाई बीपी की समस्या को हल्के में लेने की भूल बिल्कुल नहीं करनी चाहिए। यह बिना लक्षण या संकेत के ही शरीर को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है। यही वजह है कि हाई बीपी को साइलेंट किलर भी कहा जाता है। इसलिए हाई बीपी की समय-समय पर जांच बहुत जरूरी है। साथ ही, हेल्दी डाइट और लाइफस्टाइल को फॉलो करना जरूरी है।